दिल्ली में अमित शाह से जयराम ठाकुर की मुलाकात, हिमाचल भाजपा में चुनावी रणनीति को लेकर मंथन तेज

दिल्ली में अमित शाह से जयराम ठाकुर की मुलाकात, हिमाचल भाजपा में चुनावी रणनीति को लेकर मंथन तेज

हमीरपुर की बैठकों से पहले केंद्रीय नेतृत्व से संवाद, संगठन की मजबूती और प्रदेश के मुद्दों पर चर्चा

शिमला/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के भीतर संगठनात्मक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल की केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद अब नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक को पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक विषयों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैठक को शिष्टाचार भेंट बताया गया है, जबकि विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जयराम ठाकुर की अमित शाह से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भाजपा हिमाचल में अपने संगठन को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करने में जुटी है। पार्टी के प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम और पदाधिकारियों की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में 3 और 4 अक्टूबर को हमीरपुर में भाजपा कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग तथा प्रदेश पदाधिकारी बैठक प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठनात्मक गतिविधियों, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा होनी है।

बिंदल के बाद जयराम की शाह से मुलाकात

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने 28 सितंबर को नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की थी। उस बैठक में संगठनात्मक विषयों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई थी। बिंदल ने मुलाकात को मार्गदर्शन और संगठन को मजबूत करने से जुड़ा बताया था।

इसके कुछ ही दिन बाद जयराम ठाकुर का अमित शाह से मिलना पार्टी के भीतर केंद्रीय नेतृत्व और हिमाचल भाजपा के बीच संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक में किन-किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसका आधिकारिक विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार संगठन में समन्वय और तालमेल को लेकर चर्चा हुई है। प्रदेश में भाजपा के विभिन्न स्तरों पर संगठन को सक्रिय रखने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को एक दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिए जाने की बात कही जा रही है।

मिशन-2027 पर नजर

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष होने हैं। ऐसे में भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के बीच बैठकों का सिलसिला बढ़ना चुनावी तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी संगठन बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक अपनी गतिविधियों को व्यवस्थित करने पर काम कर रही है।

सूत्रों के अनुसार चुनाव से पहले पार्टी विभिन्न स्तरों पर सर्वेक्षण भी करा सकती है। इन सर्वेक्षणों के जरिए विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, स्थानीय मुद्दों, जनता के बीच पार्टी की स्थिति और संभावित चुनौतियों का आकलन किए जाने की संभावना है।

सर्वेक्षणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर पार्टी अपनी आगामी रणनीति तैयार कर सकती है। हालांकि, अभी किसी विशेष विधानसभा क्षेत्र या संभावित उम्मीदवारों को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

पुराने चुनावी नतीजों की भी होगी समीक्षा

भाजपा की आगामी रणनीति तैयार करने में पिछले चुनावों के परिणामों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा उपचुनावों में सामने आए परिणामों का क्षेत्रवार विश्लेषण कर सकती है।

इस दौरान यह देखा जा सकता है कि किन क्षेत्रों में संगठन मजबूत रहा, कहां पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक स्तर पर अतिरिक्त काम की जरूरत है। बूथ स्तर के प्रदर्शन, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा संभव है।

पार्टी के लिए यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय समीकरणों की भूमिका अलग होती है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद प्रदेश संगठन को क्षेत्रवार रणनीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

राष्ट्रीय और प्रदेश के मुद्दों पर भी फोकस

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व के साथ बातचीत में राष्ट्रीय और हिमाचल से जुड़े प्रदेश स्तरीय मुद्दों को गंभीरता से उठाने पर भी चर्चा हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर से जुड़े मुद्दे के अलावा हिमाचल से संबंधित किशाऊ बांध परियोजना और कांग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियां भी भाजपा के राजनीतिक एजेंडे में शामिल हैं।

भाजपा इन मुद्दों को आने वाले समय में किस तरह जनता के बीच ले जाती है, यह प्रदेश संगठन की आगामी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी की ओर से राज्य सरकार के कामकाज और चुनावी वादों को लेकर भी लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।

किशाऊ परियोजना जैसे बड़े विकास और जलविद्युत से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और हिमाचल के बीच समन्वय का विषय भी महत्वपूर्ण है। भाजपा इन विषयों को प्रदेश के विकास और आर्थिक हितों से जोड़कर जनता के सामने रख सकती है।

संगठन में तालमेल पर जोर

जयराम ठाकुर और अमित शाह की बैठक के संदर्भ में संगठन में बेहतर समन्वय का मुद्दा भी चर्चा में है। भाजपा आगामी चुनाव में संगठन की विभिन्न इकाइयों के बीच तालमेल को महत्वपूर्ण मान रही है।

प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, विधायक, सांसद, प्रदेश पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर संवाद के जरिए चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा सकता है। पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों और चुनावी गतिविधियों के लिए तैयार करने पर जोर रहेगा।

3 और 4 अक्टूबर को हमीरपुर में होने वाले प्रशिक्षण वर्ग और प्रदेश पदाधिकारी बैठक को इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन बैठकों में प्रदेश संगठन की गतिविधियों और आने वाले महीनों के कार्यक्रमों को लेकर मंथन होने की संभावना है।

भूपेंद्र यादव से भी हुई मुलाकात

अमित शाह से मुलाकात के बाद जयराम ठाकुर ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से भी नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे भी शिष्टाचार भेंट बताया गया है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए वन, पर्यावरण, वन भूमि, विकास परियोजनाओं की स्वीकृतियां और पर्यावरणीय मंजूरियां महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के साथ प्रदेश से जुड़े मामलों पर संवाद का अपना महत्व है।

मुलाकात के दौरान प्रदेश हित से जुड़े विषयों के जल्द निपटारे के लिए केंद्र की ओर से सहयोग का आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बैठक के बाद किसी नई परियोजना या बड़े नीतिगत निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।

दिल्ली दौरे से बढ़ी संगठनात्मक गतिविधियां

जयराम ठाकुर की लगातार केंद्रीय नेताओं से हो रही मुलाकातों के बीच हिमाचल भाजपा का संगठनात्मक कार्यक्रम भी तेज हो रहा है। प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल का 3 और 4 अक्टूबर का हमीरपुर प्रवास इसी का हिस्सा है। वहां कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग के साथ प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक भी होगी।

ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रदेश के शीर्ष नेताओं की बैठकों के बाद अब पार्टी की नजर जमीनी संगठन को सक्रिय करने पर रहेगी। आने वाले महीनों में मंडल, जिला और बूथ स्तर पर गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, जयराम ठाकुर और अमित शाह की बैठक के बाद पार्टी की ओर से किसी नई चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों या संगठनात्मक फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व के साथ संवाद और आगामी संगठनात्मक बैठकों के जरिए पार्टी अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करती नजर आ रही है।

चुनावी तैयारियों के साथ मुद्दों पर भी रहेगा जोर

भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दो स्तरों पर काम महत्वपूर्ण रहेगा। एक ओर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना होगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार करनी होगी।

केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई मुलाकातों में संगठनात्मक तालमेल, प्रदेश के प्रमुख मुद्दों और चुनावी तैयारियों पर चर्चा की सूचना इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है। अब हमीरपुर की बैठकों में प्रदेश संगठन की दिशा और आगामी कार्यक्रमों को लेकर होने वाला मंथन महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल अमित शाह, राजीव बिंदल और जयराम ठाकुर के बीच हुई मुलाकातों का विस्तृत आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है। इसलिए बैठकों में किसी विशेष निर्णय या चुनावी फार्मूले को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि हिमाचल भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को गति देना शुरू कर दिया है।