दिल्ली-एनसीआर के विशाल पर्यटन बाजार पर हरियाणा की नजर, पीपीपी मॉडल से विकसित होंगे प्रमुख स्थल

दिल्ली-एनसीआर के विशाल पर्यटन बाजार पर हरियाणा की नजर, पीपीपी मॉडल से विकसित होंगे प्रमुख स्थल

मोरनी से कुरुक्षेत्र तक पर्यटन ढांचे को नया स्वरूप देने की तैयारी, ग्रामीण और हरित पर्यटन पर भी रहेगा फोकस

हरियाणा सरकार ने प्रदेश को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल करने के लिए पर्यटन क्षेत्र के विकास की नई रणनीति तैयार की है। सरकार की नजर खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के बड़े घरेलू पर्यटन बाजार पर है। इसके लिए प्रदेश के चुनिंदा पर्यटन स्थलों और पर्यटन परिसरों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित करने की योजना बनाई गई है।

सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के निवेश, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इनमें गुणवत्तापूर्ण आवास, खान-पान, मनोरंजन, आयोजन स्थल, साहसिक गतिविधियां और अन्य पर्यटक सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही सरकार पर्यटन विकास और प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रही है।

पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम स्वरा राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन में हरियाणा के पर्यटन विकास की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन को केवल घूमने-फिरने की गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे निवेश, रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और विरासत संरक्षण से जोड़कर विकसित किया जाएगा।

निजी निवेश से पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प

हरियाणा सरकार पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मॉडल को महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रही है। इसके तहत ऐसे पर्यटन स्थलों की पहचान की जाएगी जहां निजी क्षेत्र की भागीदारी से सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सकता है।

सरकार की योजना में पर्यटकों के ठहरने के लिए बेहतर आवास, स्थानीय और क्षेत्रीय व्यंजनों को बढ़ावा देने वाले खान-पान केंद्र, मनोरंजन सुविधाएं, आयोजन स्थल और साहसिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां विकसित करना शामिल है।

मंत्री के अनुसार निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और प्रबंधन विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए पर्यटन स्थलों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। हालांकि, विकास के दौरान संबंधित क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार का जोर ऐसे पर्यटन मॉडल पर है जिसमें स्थानीय लोगों को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके। इससे पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

दिल्ली-एनसीआर बनेगा प्रमुख बाजार

हरियाणा की पर्यटन रणनीति में दिल्ली-एनसीआर को महत्वपूर्ण बाजार माना जा रहा है। पर्यटन मंत्री ने सम्मेलन में बताया कि वर्ष 2025 में देश में करीब 428.7 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। दिल्ली-एनसीआर से हरियाणा की भौगोलिक निकटता और सड़क नेटवर्क के कारण प्रदेश इस बड़े घरेलू पर्यटन बाजार का लाभ उठा सकता है।

सरकार अब ऐसे पर्यटन उत्पाद विकसित करने की दिशा में काम कर रही है जिन्हें दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटक सप्ताहांत या छोटी अवधि की यात्रा के रूप में चुन सकें।

कुरुक्षेत्र, सूरजकुंड, पिंजौर और मोरनी जैसे स्थलों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों को भी अनुभव आधारित पर्यटन से जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन स्थलों के साथ-साथ स्थानीय जीवन, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश का अनुभव उपलब्ध कराना है।

मोरनी और प्राकृतिक स्थलों पर हरित पर्यटन

हरियाणा पर्यटन विकास में ग्रीन टूरिज्म यानी हरित पर्यटन को प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रहा है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों वाले क्षेत्रों में ऐसी पर्यटन गतिविधियां विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जिनसे पर्यटकों को प्रकृति के करीब आने का अवसर मिले और पर्यावरण पर दबाव भी सीमित रहे।

मोरनी, टिक्करताल, हथनीकुंड बैराज और तिलयार झील जैसे स्थानों में पर्यावरण आधारित पर्यटन तथा साहसिक गतिविधियों की संभावनाएं तलाशने की योजना है।

मोरनी क्षेत्र को पहाड़ी और प्राकृतिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के साथ वहां पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसी तरह टिक्करताल और अन्य जलाशय आधारित स्थलों पर साहसिक और अनुभव आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक पर्यटन गतिविधियों से प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और स्थानीय पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गांवों को भी पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की तैयारी

हरियाणा की पर्यटन नीति में ग्रामीण क्षेत्रों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। सरकार ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से पर्यटकों को गांवों की जीवनशैली, खेती, पारंपरिक खान-पान और हरियाणवी लोक संस्कृति से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

पर्यटन मंत्री के अनुसार सितंबर 2026 तक प्रदेश में 38 पंजीकृत फार्म टूरिज्म स्थल और 11 होम-स्टे मौजूद हैं। इन स्थलों के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में रहने और स्थानीय जीवन का अनुभव लेने का अवसर मिल रहा है।

फार्म टूरिज्म से किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल सकता है। वहीं ग्रामीण युवाओं के लिए आतिथ्य, खान-पान, गाइड, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के रास्ते खुल सकते हैं।

होम-स्टे मॉडल के विस्तार से भी ग्रामीण परिवार पर्यटन अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ सकते हैं। सरकार ग्रामीण पर्यटन को केवल आवास सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और अनुभव से जोड़ने वाले मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

स्थानीय खान-पान और संस्कृति को मिलेगा मंच

हरियाणा के ग्रामीण पर्यटन मॉडल में स्थानीय खान-पान और लोक संस्कृति को भी बढ़ावा देने की योजना है। पर्यटकों को पारंपरिक हरियाणवी व्यंजनों के साथ स्थानीय जीवनशैली से परिचित कराया जा सकता है।

इससे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थों और पारंपरिक कला से जुड़े लोगों के लिए बाजार का विस्तार हो सकता है। सरकार का प्रयास पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ केवल बड़े निवेशकों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने का है।

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान दिया जा सकता है, ताकि पर्यटकों को बेहतर आतिथ्य और स्थानीय अनुभव उपलब्ध कराया जा सके।

कुरुक्षेत्र से सूरजकुंड तक अलग-अलग पर्यटन अनुभव

प्रदेश सरकार पर्यटन स्थलों को उनकी विशेषताओं के आधार पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कुरुक्षेत्र को धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। सूरजकुंड को हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने पर जोर रहेगा।

पिंजौर को ऐतिहासिक और विरासत पर्यटन से जोड़ा जा सकता है, जबकि मोरनी और टिक्करताल जैसे क्षेत्रों में प्रकृति तथा साहसिक पर्यटन की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।

इस तरह सरकार अलग-अलग क्षेत्रों को एक जैसे पर्यटन केंद्र बनाने के बजाय उनकी स्थानीय विशेषताओं के आधार पर पर्यटन उत्पाद तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है।

सप्ताहांत पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी

दिल्ली-एनसीआर से हरियाणा की निकटता को देखते हुए वीकेंड टूरिज्म पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है जहां दिल्ली और आसपास के शहरों से लोग कम समय में पहुंच सकें और एक से दो दिन की यात्रा कर सकें।

इसके लिए सड़क संपर्क, पार्किंग, खान-पान, आवास, मनोरंजन और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करना जरूरी होगा। पीपीपी मॉडल के जरिए इन क्षेत्रों में निजी निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जाएगी।

सरकार का मानना है कि सप्ताहांत पर्यटन के विस्तार से प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ होटल, रेस्तरां, परिवहन, स्थानीय खरीदारी और मनोरंजन से जुड़े कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।

स्टार्टअप और युवाओं को जोड़ने पर जोर

पर्यटन क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार युवाओं और स्टार्टअप को भी जोड़ रही है। पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के माध्यम से नए विचारों और तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं, बुकिंग, स्थानीय अनुभव, यात्रा प्रबंधन, पर्यटक मार्गदर्शन और अन्य तकनीकी सुविधाओं के लिए स्टार्टअप की भूमिका बढ़ाई जा सकती है।

सरकार की योजना पर्यटन क्षेत्र को पारंपरिक सरकारी व्यवस्थाओं तक सीमित रखने के बजाय निजी उद्यम, तकनीक और नए कारोबारी मॉडल के साथ जोड़ने की है।

निवेश के साथ रोजगार पर भी नजर

पर्यटन मंत्री ने होटल समूहों, टूर ऑपरेटरों, स्टार्टअप, तकनीकी कंपनियों और स्थानीय उद्यमियों से हरियाणा के पर्यटन क्षेत्र में निवेश और भागीदारी का आह्वान किया। सरकार का मानना है कि पर्यटन में निवेश बढ़ने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

होटल और रिसॉर्ट के अलावा परिवहन, खान-पान, मनोरंजन, स्थानीय उत्पाद, गाइड सेवाओं और आयोजन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में फार्म टूरिज्म और होम-स्टे मॉडल से स्थानीय परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है।

‘ग्रीन भी, ग्रोथ भी’ पर आधारित होगा मॉडल

हरियाणा सरकार अपने पर्यटन मॉडल को ‘ग्रीन भी, ग्रोथ भी’ की अवधारणा पर आगे बढ़ाने की बात कह रही है। इसका मतलब पर्यटन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां और रोजगार बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देना है।

सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार किया जाए, लेकिन इससे प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इसी वजह से प्राकृतिक क्षेत्रों में पर्यटन परियोजनाओं को पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य सरकार की प्रस्तावित रणनीति में पीपीपी निवेश, ग्रामीण पर्यटन, हरित पर्यटन, साहसिक गतिविधियां, विरासत संरक्षण और स्टार्टअप आधारित नवाचार को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है। दिल्ली-एनसीआर के बड़े घरेलू पर्यटन बाजार की निकटता को देखते हुए हरियाणा अब अपने पर्यटन स्थलों को सप्ताहांत और अनुभव आधारित पर्यटन के लिए अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।