हरियाणा में 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की तैयारी, शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश

हरियाणा में 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की तैयारी, शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण को लेकर सरकार के स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से संबंधित केस और सेवा रिकॉर्ड मंगवाए जाएं। इसके बाद इन मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि अतिथि अध्यापकों के मामलों में वर्ष 2014 की नीति के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी, उसी तर्ज पर स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के मामलों की जांच और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की ओर से मिले इन निर्देशों को अतिथि अध्यापक संगठन लंबे समय से चली आ रही अपनी मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। अतिथि अध्यापकों का कहना है कि वे करीब 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और लगातार नियमितीकरण की मांग उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि अब उनके सेवा संबंधी मामलों को जिलों से मंगवाकर नीति और न्यायालय के निर्णय के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने प्रधान सचिव को दिए निर्देश

अतिथि अध्यापकों के संयुक्त संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा से मुलाकात कर नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन पर शिक्षा मंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया के नाम निर्देश जारी किए। इसमें कहा गया कि महाविद्यालयों के अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण की तर्ज पर वर्ष 2014 की नीति के अनुसार निरीक्षण कराया जाए और स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों के मामलों को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए जल्द प्रस्तुत किया जाए।

इन निर्देशों के बाद अब शिक्षा विभाग के स्तर पर जिलों से संबंधित शिक्षकों का सेवा रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज मंगवाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। रिकॉर्ड प्राप्त होने के बाद यह देखा जाएगा कि संबंधित अतिथि अध्यापक सरकार की निर्धारित नीति और अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं। इसके आधार पर उनके केस आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर पर भेजे जाएंगे।

कालेजों के अतिथि शिक्षकों को मिल चुका है लाभ

अतिथि अध्यापकों की मांग का एक प्रमुख आधार महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया है। सरकार महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों को नियमित कर चुकी है। इसके बाद स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों की ओर से भी लंबे समय से समान प्रक्रिया लागू करने की मांग की जा रही है।

अतिथि अध्यापक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षक भी लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं। उन्होंने वर्षों तक सरकारी स्कूलों में अध्यापन कार्य किया है और विभिन्न परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में उनके नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया शुरू किए जाने की आवश्यकता है।

संगठन का कहना है कि महाविद्यालयों के अतिथि शिक्षकों के मामलों में जिस नीति और प्रक्रिया को आधार बनाया गया, उसी आधार पर स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापकों के मामलों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट के फैसले का भी दिया जा रहा हवाला

अतिथि अध्यापक संगठनों ने नियमितीकरण की मांग के समर्थन में हाई कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि न्यायालय की ओर से इस संबंध में फैसला आने के बाद अब सरकार को उसे ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।

अतिथि अध्यापकों का कहना है कि उनके मामले में सरकार की संबंधित नीति और न्यायालय के निर्णय को आधार बनाकर सेवा मामलों की जांच की जा सकती है। इसके लिए प्रत्येक शिक्षक का रिकॉर्ड संबंधित जिले से मंगवाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका परीक्षण किया जाना जरूरी है।

संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि करीब दो दशक से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नियमितीकरण होने से उनके सेवा भविष्य को स्थायी आधार मिल सकेगा और लंबे समय से चली आ रही मांग का समाधान हो सकेगा।

मुख्यमंत्री से भी मिल चुका है प्रतिनिधिमंडल

अतिथि अध्यापकों के संयुक्त संगठन के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया और विभाग के निदेशक स्तर के अधिकारियों के साथ भी संगठन की बातचीत हुई है।

31 अगस्त को विधानसभा सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में भी अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। संगठन ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा था कि वर्षों से सरकारी स्कूलों में काम कर रहे अतिथि अध्यापकों को सेवा का स्थायी आधार दिया जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने यह भी स्पष्ट किया कि अतिथि अध्यापकों की सबसे प्रमुख मांग नियमितीकरण है। उनका कहना है कि सेवा नियमों में बदलाव या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े पत्रों के बजाय सरकार को उनके मूल मुद्दे पर निर्णय लेना चाहिए।

सेवा नियमों के पत्र से पैदा हुई थी निराशा

अतिथि अध्यापकों के अनुसार, हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से सेवा नियमों से संबंधित पत्र जारी होने के बाद शिक्षकों के बीच निराशा का माहौल बना था। उनका कहना था कि लंबे समय से वे नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं और उनका मुख्य मुद्दा उनकी सेवाओं को स्थायी स्वरूप देना है।

संगठन का कहना है कि करीब 20 वर्षों से शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए भविष्य की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। अतिथि अध्यापक लगातार अलग-अलग स्तरों पर सरकार के समक्ष अपनी मांग रखते रहे हैं। अब शिक्षा मंत्री की ओर से जिलों से केस मंगवाने के निर्देश दिए जाने के बाद उन्हें उम्मीद है कि मामला प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ेगा।

जल्द शुरू करनी होगी विभागीय प्रक्रिया

अतिथि अध्यापक संगठन के मीडिया प्रभारी डा. अजय लोहाना ने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा मंत्री की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देश के बाद अब शिक्षा विभाग को जिलों से सभी अतिथि अध्यापकों के सेवा संबंधी रिकॉर्ड और केस मंगवाने के लिए जल्द पत्र जारी करना चाहिए।

संगठन के अनुसार, जिलों से रिकॉर्ड मिलने के बाद प्रत्येक मामले की नीति के अनुरूप जांच की जा सकती है। इसके बाद हाई कोर्ट के निर्णय और सरकार की वर्ष 2014 की नीति को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

अतिथि अध्यापकों का कहना है कि उनका संगठन सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से इस मामले का समाधान चाहता है। उनका जोर इस बात पर है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के मामलों को स्पष्ट नीति और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाया जाए।

दो दशक की सेवा के बाद स्थायी व्यवस्था की मांग

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापक करीब दो दशक से अलग-अलग विषयों और कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि इतने लंबे समय तक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहने के बाद भी उनके भविष्य को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई है।

उनका कहना है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले जिलावार सेवा रिकॉर्ड मंगवाना और निर्धारित नीति के अनुसार मामलों की जांच करना व्यावहारिक कदम है। इससे पात्र शिक्षकों के मामलों को अलग-अलग स्तर पर सत्यापित कर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा जा सकेगा।

शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद अब निगाहें शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि विभाग की ओर से जिलों को पत्र जारी कर रिकॉर्ड और केस मंगवाए जाते हैं, तो करीब 12 हजार अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े मामलों की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है। संगठन को उम्मीद है कि सरकार हाई कोर्ट के फैसले और वर्ष 2014 की नीति को ध्यान में रखते हुए उनके मामलों पर जल्द निर्णय लेगी।