हरियाणा में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच प्रदेश कांग्रेस ने मतदाता सूचियों की समीक्षा के लिए सात अक्टूबर को प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में दोपहर दो बजे होने वाली बैठक में पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
बैठक में एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों में हुए बदलाव, हटाए गए या संभावित रूप से हटाए जाने वाले नाम, प्राप्त दावे-आपत्तियां और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने से जुड़े मामलों की विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा की जाएगी। पार्टी ने जिला स्तर पर नियुक्त एसआईआर प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की ओर से जारी पत्र में एसआईआर प्रभारियों से कहा गया है कि वे प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की स्थिति का अलग-अलग आकलन करें। रिपोर्ट में मतदाता सूची से हटाए गए नामों, संभावित रूप से हटाए जाने वाले नामों, प्राप्त दावों और आपत्तियों तथा ऐसे पात्र नागरिकों की जानकारी शामिल करने को कहा गया है, जिनके नाम किसी कारण से मतदाता सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं।
हरियाणा में एसआईआर की प्रक्रिया जून में शुरू हुई थी। चुनाव आयोग के अनुसार प्रदेश में घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन और गणना का काम किया गया। इसके बाद नोटिस जारी करने और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी, जबकि इनका निपटारा 28 अक्टूबर तक किया जाना है। अंतिम मतदाता सूची छह नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
मतदाता सूची में बदलावों पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में होने वाले बदलावों पर विधानसभा स्तर तक निगरानी रखने की रणनीति बनाई है। पार्टी का कहना है कि एसआईआर के दौरान मृतक, दोहरे नामांकन, स्थायी रूप से स्थान बदल चुके मतदाताओं, अनुपस्थित मतदाताओं और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों की जांच की जा रही है।
कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त ने पार्टी स्तर पर 45 से 50 लाख नाम प्रभावित होने की संभावित आशंका का उल्लेख किया है। यह आंकड़ा कांग्रेस की ओर से व्यक्त की गई आशंका है। वहीं, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों में एसआईआर के दौरान विभिन्न श्रेणियों में नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार अगस्त की शुरुआत तक 44.86 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए जाने थे, जिनमें से 42.69 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए जा चुके थे। ये नोटिस संबंधित मतदाताओं तक बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से पहुंचाए गए थे।
कांग्रेस अब इन्हीं मामलों की विधानसभा क्षेत्रवार स्थिति जुटाकर प्रदेश स्तर पर समीक्षा करना चाहती है। पार्टी की बैठक में यह देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में कितने मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और कितने लोगों ने अपने नाम को लेकर दावे या आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
30 सितंबर तक मिले दावे-आपत्तियों की होगी समीक्षा
सात अक्टूबर की बैठक में 30 सितंबर तक प्राप्त दावों और आपत्तियों की स्थिति भी प्रमुख एजेंडे में शामिल है। कांग्रेस ने अपने जिला और विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों से संबंधित आंकड़े जुटाने को कहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मतदाताओं ने सूची में नाम जोड़ने, नाम में संशोधन या अन्य आपत्तियों के लिए आवेदन किया है।
चुनाव आयोग ने भी पात्र मतदाताओं को मसौदा सूची में अपना नाम जांचने और आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से दावा या सुधार दर्ज कराने की व्यवस्था की है। आयोग ने सितंबर में स्पष्ट किया था कि पात्र मतदाता का नाम केवल पुराने मतदाता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के आधार पर हटाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस की बैठक में इन प्रक्रियाओं की जमीनी स्थिति पर पार्टी के एसआईआर प्रभारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। पार्टी यह भी देखेगी कि दावे और आपत्तियां दाखिल करने में मतदाताओं को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा और किन मामलों में प्रक्रिया अधूरी रह गई।
बीएलए-2 की भूमिका और प्रदर्शन भी एजेंडे में
बैठक में बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए-2 की विधानसभा क्षेत्रवार भूमिका और प्रदर्शन की भी समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस ने अपने संगठन को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सक्रिय रखने के लिए बूथ स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर जोर दिया है।
एसआईआर के दौरान बीएलए की भूमिका राजनीतिक दलों की ओर से मतदाता सूची की प्रक्रिया पर नजर रखने से जुड़ी है। चुनाव आयोग ने भी राजनीतिक दलों से एसआईआर की शुरुआत से पहले बीएलए-1 और बीएलए-2 की नियुक्ति करने का आग्रह किया था।
कांग्रेस की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह आकलन किया जाएगा कि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में नियुक्त बीएलए-2 ने कितने मामलों की जानकारी पार्टी संगठन तक पहुंचाई और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर किस तरह काम किया गया।
इसके साथ ही उन नोटिसों की भी समीक्षा की जाएगी, जिनकी प्रक्रिया किसी कारण से पूरी नहीं हो सकी। पार्टी ने एसआईआर प्रभारियों से ऐसे मामलों की संख्या और उनके पीछे के कारणों की जानकारी जुटाने को कहा है।
युवा मतदाताओं के पंजीकरण पर भी चर्चा
कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान नए मतदाताओं, विशेषकर युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने को भी बैठक के एजेंडे में रखा है। पार्टी की ओर से निर्वाचन आयोग के फार्म-6 में किए गए बदलावों के बाद युवा मतदाताओं के पंजीकरण की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में यह पता लगाया जाएगा कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु पूरी कर चुके कितने पात्र युवाओं ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है और कितने मामले अभी प्रक्रिया में हैं। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद छूटे हुए पात्र नागरिकों और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए बीएलए-1 की नियुक्ति से जुड़े विषय पर भी चर्चा होगी।
कांग्रेस का जोर इस बात पर है कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यदि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से रह जाता है तो उसके पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रयास किए जाएं।
सांसदों और विधायकों से मांगी गई जानकारी
प्रदेश कांग्रेस ने पार्टी के सभी सांसदों, विधायकों और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों से एसआईआर प्रभारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। पार्टी चाहती है कि जिला और विधानसभा स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं को एकत्र कर सात अक्टूबर की प्रदेश स्तरीय बैठक में समेकित रिपोर्ट रखी जाए।
राव नरेंद्र सिंह के अनुसार, बैठक का उद्देश्य मतदाता अधिकारों से जुड़े मामलों की विधानसभा स्तर तक निगरानी करना और जरूरी कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।
कांग्रेस की रणनीति के तहत जिला स्तर पर पहले सूचनाएं एकत्र की जाएंगी। इसके बाद विधानसभा क्षेत्रवार रिपोर्ट प्रदेश स्तर पर प्रस्तुत होगी। इससे पार्टी संगठन को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों और लंबित मामलों की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
एसआईआर एक्शन कमेटी में ये नेता शामिल
हरियाणा कांग्रेस ने एसआईआर से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए राज्य स्तरीय एक्शन एवं मानीटरिंग कमेटी का भी गठन किया है। इस कमेटी में प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, थानेसर के विधायक अशोक अरोड़ा, नूंह के विधायक आफताब अहमद और रोहतक के विधायक बीबी बत्रा शामिल हैं।
इसके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व मंत्री कर्ण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री डॉ. एमएल रंगा, एडवोकेट रणधीर राणा, सुरेंद्र शर्मा, धर्मवीर गोयत, एडवोकेट श्वेता ढुल, एडवोकेट मोहन ढिल्लो, सेवानिवृत्त आईएएस विनय यादव और एडवोकेट बीरेंद्र रंगा को भी कमेटी में पदाधिकारी बनाया गया है।
कमेटी की भूमिका एसआईआर से संबंधित पार्टी स्तर की निगरानी और विधानसभा तथा जिला स्तर से आने वाली सूचनाओं के समन्वय से जुड़ी है। सात अक्टूबर की बैठक में इस व्यवस्था के तहत जुटाई गई रिपोर्टों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
अंतिम सूची से पहले संगठन की सक्रियता बढ़ी
हरियाणा में एसआईआर के अंतिम चरणों के बीच कांग्रेस ने अपने संगठन को बूथ से प्रदेश स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया है। चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद छह नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है।
ऐसे में सात अक्टूबर की बैठक को पार्टी के लिए विधानसभा क्षेत्रवार स्थिति की समीक्षा का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। बैठक में यह देखा जाएगा कि किन क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े मामले अधिक हैं, कहां दावे-आपत्तियां दर्ज हुई हैं, किन पात्र नागरिकों के नाम अभी शामिल नहीं हुए हैं और किन मामलों में नोटिस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
कांग्रेस नेतृत्व ने अपने संगठन को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची से जुड़े प्रत्येक मामले की जानकारी स्थानीय स्तर पर जुटाई जाए और आवश्यक दस्तावेजों के साथ उसे पार्टी के संबंधित एसआईआर प्रभारियों तक पहुंचाया जाए। इसके आधार पर प्रदेश स्तर पर समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।




