चंडीगढ़ में देशभर के मेयरों का महामंथन, कार्यकाल से लेकर नगर निकायों के अधिकार तक उठेंगे मुद्दे

चंडीगढ़ में देशभर के मेयरों का महामंथन, कार्यकाल से लेकर नगर निकायों के अधिकार तक उठेंगे मुद्दे

चंडीगढ़ में सोमवार और मंगलवार को देशभर के महापौरों का बड़ा जमावड़ा होने जा रहा है। ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल की 118वीं नेशनल एग्जीक्यूटिव मीटिंग में देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 40 मेयर हिस्सा लेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया करेंगे। इस दौरान देश के अलग-अलग शहरों से जुड़े शहरी प्रशासन, नगर निकायों की कार्यप्रणाली और महापौरों के अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में सबसे प्रमुख मुद्दा महापौर के कार्यकाल में एकरूपता लाने का रहेगा। इसके अलावा नगर निकायों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देने, केंद्र एवं राज्य सरकारों से मिलने वाली ग्रांट तय करने में आबादी के साथ नगर निगम के क्षेत्रफल को भी आधार बनाने और देश के नौ केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निकायों के लिए अलग मंच तैयार करने जैसे प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने रविवार को यूटी स्टेट गेस्ट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सम्मेलन की तैयारियों और एजेंडे की जानकारी दी। उनके साथ ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार भी मौजूद रहे।

मेयर के कार्यकाल में एकरूपता पर जोर

सम्मेलन में महापौर के कार्यकाल को लेकर देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने के प्रस्ताव पर विशेष चर्चा होगी। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मेयर का कार्यकाल अलग-अलग है। चंडीगढ़ में फिलहाल मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का है, जबकि गुजरात समेत कुछ राज्यों में महापौर पांच वर्ष तक पद पर रहते हैं।

सौरभ जोशी ने कहा कि अलग-अलग अवधि होने के कारण देश में महापौर की भूमिका और अधिकारों को लेकर भी काफी अंतर देखने को मिलता है। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मॉडल एक्ट को लेकर सुझाव मांगे हैं। इसी संदर्भ में मेयर के कार्यकाल को लेकर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक वर्ष का कार्यकाल शहरी निकाय के निर्वाचित प्रमुख के लिए काफी कम माना जा रहा है, जबकि पांच वर्ष की अवधि भी सभी जगह लागू करना व्यावहारिक नहीं हो सकता। इसलिए दोनों के बीच कोई ऐसा कार्यकाल तय करने पर विचार किया जा रहा है, जिसे देशभर में समान रूप से लागू किया जा सके।

चंडीगढ़ के मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव

चंडीगढ़ में मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने का मुद्दा पहले से ही चर्चा में है। यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की ओर से मेयर का कार्यकाल बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है।

अब ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होने की उम्मीद है। मेयर सौरभ जोशी का कहना है कि लंबे कार्यकाल से महापौर को शहर के विकास से जुड़ी योजनाओं को समझने, उन्हें लागू करने और उनके परिणाम देखने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है।

वर्तमान व्यवस्था में एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होते ही महापौर बदल जाता है। ऐसे में कई विकास योजनाओं और प्राथमिकताओं को लगातार नेतृत्व परिवर्तन का सामना करना पड़ता है। सम्मेलन में इस विषय पर देश के विभिन्न नगर निगमों के अनुभव भी साझा किए जाएंगे।

नौ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंच का प्रस्ताव

बैठक में देश के नौ केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निकायों के लिए अलग मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इस पहल के पीछे तर्क है कि केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निकायों की प्रशासनिक व्यवस्था राज्यों से अलग होती है और उनकी समस्याएं भी कई मामलों में अलग प्रकृति की होती हैं।

चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासन का सीधा हस्तक्षेप अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसके विपरीत राज्यों में नगर निगमों को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निकायों की समस्याओं और जरूरतों को एक साझा मंच पर उठाने के लिए अलग प्लेटफॉर्म तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

इस मंच के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेशों के नगर निगमों के सामने आने वाली समान समस्याओं को एक साथ केंद्र सरकार के सामने रखा जा सकेगा। इससे नीतिगत स्तर पर समाधान तलाशने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

आबादी के साथ क्षेत्रफल को भी फंडिंग का आधार बनाने की मांग

नगर निगमों को मिलने वाली ग्रांट में आबादी के साथ क्षेत्रफल को भी महत्वपूर्ण आधार बनाने का मुद्दा भी सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में शामिल है।

सौरभ जोशी ने कहा कि देश में ऐसे कई नगर निगम हैं जिनका भौगोलिक क्षेत्र काफी बड़ा है, लेकिन उनकी आबादी अपेक्षाकृत कम है। मौजूदा व्यवस्था में यदि फंड आवंटन में आबादी को प्रमुख आधार बनाया जाता है तो बड़े क्षेत्रफल वाले नगर निगमों को उनकी वास्तविक जरूरत के मुकाबले कम राशि मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी बड़े क्षेत्र में सड़कों का निर्माण और रखरखाव, सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का रखरखाव और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में अधिक खर्च आता है। इसलिए केवल आबादी के आधार पर नगर निगमों की वित्तीय जरूरत तय करना पर्याप्त नहीं है।

मेयरों की बैठक में इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा और केंद्र सरकार से ग्रांट वितरण की व्यवस्था में क्षेत्रफल को भी उचित महत्व देने की मांग की जाएगी।

नगर निगमों को अधिक अधिकार देने पर भी चर्चा

सम्मेलन में नगर निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से अधिक मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श होगा। मेयरों का मानना है कि यदि नगर निगमों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और निर्णय लेने के अधिक अधिकार मिलें तो वे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को तेजी से पूरा कर सकते हैं।

सौरभ जोशी ने कहा कि नगर निगमों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें मजबूत वित्तीय आधार की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकारों से मिलने वाली ग्रांट के अलावा स्थानीय स्तर पर राजस्व बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया जाना जरूरी है।

ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल को केंद्र सरकार और देश के नगर निगमों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि देशभर के मेयर अपने अनुभव और समस्याएं साझा करेंगे। इससे शहरी प्रशासन के लिए बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।

‘सशक्त नगर-विकसित भारत’ रहेगा सम्मेलन का विषय

दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘सशक्त नगर-विकसित भारत’ रखा गया है। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों को मजबूत करने के साथ शहरों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।

निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय, नागरिकों की भागीदारी, स्वच्छ और हरित शहरों का विकास, स्मार्ट सुविधाओं का विस्तार तथा नगर निकायों को आत्मनिर्भर बनाने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

चंडीगढ़ की ओर से शहर के नियोजित विकास मॉडल, स्वच्छता व्यवस्था, हरित क्षेत्रों, जल प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी सम्मेलन में अन्य शहरों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाएगा। अलग-अलग शहरों के मेयर अपने यहां लागू सफल व्यवस्थाओं और सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी जानकारी देंगे।

19 राज्यों से आएंगे करीब 40 मेयर

सौरभ जोशी ने बताया कि सम्मेलन में सिक्किम, केरल, तमिलनाडु, असम, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और दिल्ली समेत कई राज्यों से मेयरों के पहुंचने की पुष्टि हुई है। उत्तर-पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और मध्य भारत के शहरों का भी प्रतिनिधित्व रहेगा।

करीब 40 मेयरों की मौजूदगी वाले इस सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के नगर निकायों के अनुभव एक मंच पर आएंगे। इससे शहरों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा का अवसर मिलेगा।

मेयरों के लिए विशेष फिल्म शो

सम्मेलन में हिस्सा लेने चंडीगढ़ पहुंचने वाले मेयरों के लिए शहर में विशेष कार्यक्रम भी रखा गया है। मेहमान महापौरों के लिए एलांते मॉल में ‘हनुमान अंश’ फिल्म का विशेष शो आयोजित किया जाएगा।

दो दिवसीय कार्यक्रम को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। सम्मेलन के दौरान फायर फाइटिंग स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। नगर निगम के कई अन्य विभागों में कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द की गई हैं, ताकि सम्मेलन के दौरान किसी प्रकार की व्यवस्था संबंधी परेशानी न हो।

कुल मिलाकर चंडीगढ़ में होने वाली ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल की यह बैठक केवल महापौरों की औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रहेगी। मेयर के कार्यकाल में समानता, नगर निकायों को अधिक अधिकार, फंड वितरण में क्षेत्रफल को महत्व और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग मंच जैसे मुद्दे सीधे देश की शहरी शासन व्यवस्था से जुड़े हैं। ऐसे में सम्मेलन में होने वाले फैसलों और केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले सुझावों पर सभी की नजर रहेगी।