हरियाणा के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई का पारंपरिक तरीका अब तेजी से आधुनिक तकनीक से जुड़ रहा है। कभी स्लेट-तख्ती, खड़िया मिट्टी और ब्लैकबोर्ड की चाक के सहारे शुरू होने वाली प्राथमिक शिक्षा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट टीवी जैसे डिजिटल साधनों तक पहुंच गई है। निपुण हरियाणा मिशन के तहत सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को नई तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि कक्षा में बच्चों की रुचि बढ़ाने के साथ सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इसी कड़ी में बुधवार से छह दिवसीय विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल के साथ-साथ बच्चों के स्तर और जरूरत के अनुसार शिक्षण सामग्री तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिले के करीब 400 प्राथमिक शिक्षकों को इस प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षकों को तकनीक से परिचित कराना नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल कक्षा शिक्षण में किस तरह किया जाए, इस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गणित, अंग्रेजी और अन्य बुनियादी विषयों को बच्चों के लिए सरल, रुचिकर और गतिविधि आधारित बनाने के तरीके भी प्रशिक्षण में शामिल किए गए हैं।
गणित का डर दूर करने पर जोर
प्राथमिक स्तर पर गणित को अक्सर बच्चों के लिए कठिन विषय माना जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को ऐसे तरीके सिखाए जाएंगे, जिनसे बच्चों के मन से गणित का डर कम किया जा सके और वे संख्याओं तथा गणितीय अवधारणाओं को आसानी से समझ सकें।
इसके लिए शिक्षकों को टीएलएम यानी शिक्षण-अधिगम सामग्री किट के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्मार्ट टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को दृश्य एवं गतिविधि आधारित तरीके से समझाने के तरीके भी बताए जाएंगे।
शिक्षकों को व्यावहारिक लेसन प्लान तैयार करने का अभ्यास कराया जाएगा। इसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि पाठ योजना केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों की उम्र, सीखने के स्तर और उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप हो।
प्रशिक्षण के दौरान यह भी समझाया जाएगा कि एक ही कक्षा में अलग-अलग क्षमता वाले बच्चों को किस तरह पढ़ाया जाए। डिजिटल सामग्री और शिक्षण-अधिगम सामग्री का संयोजन कर बच्चों को अभ्यास के अधिक अवसर देने पर भी जोर रहेगा।
एआई बनेगा शिक्षकों का नया सहायक
छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का शैक्षणिक उपयोग है। शिक्षकों को बताया जाएगा कि एआई की मदद से वे अपनी रोजमर्रा की शैक्षणिक तैयारियों को अधिक आसान और कम समय में पूरा कर सकते हैं।
एआई के जरिए बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार अलग-अलग प्रकार की कार्यपत्रिकाएँ तैयार की जा सकेंगी। इससे शिक्षक एक ही विषय पर अलग-अलग क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक अभ्यास सामग्री तैयार कर पाएंगे।
इसके अलावा किसी कठिन अवधारणा को बच्चों के सामने सरल तरीके से रखने के लिए उपयुक्त शैक्षणिक वीडियो तलाशने और तैयार करने की प्रक्रिया भी प्रशिक्षण का हिस्सा होगी। शिक्षकों को यह समझाया जाएगा कि डिजिटल सामग्री का चयन करते समय बच्चों की उम्र और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
परीक्षा और नियमित अभ्यास के लिए नमूना प्रश्नपत्र तैयार करने में भी एआई की सहायता ली जा सकेगी। इससे शिक्षकों को प्रश्न तैयार करने और शिक्षण सामग्री व्यवस्थित करने में लगने वाला समय कम होगा।
बच्चों के लिए तैयार होगी स्तर-आधारित सामग्री
प्रशिक्षण में इस बात पर भी जोर दिया जाएगा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल स्मार्ट टीवी पर वीडियो दिखाने तक सीमित न रहे। डिजिटल साधनों का उद्देश्य बच्चों को सक्रिय रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल करना है।
शिक्षक बच्चों के सीखने के स्तर के आधार पर कार्यपत्रक, अभ्यास प्रश्न, गतिविधियां और दृश्य सामग्री तैयार कर सकेंगे। इससे कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास उपलब्ध कराया जा सकेगा, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सामग्री दी जा सकेगी।
एआई के इस्तेमाल से शिक्षकों को व्यक्तिगत स्तर पर बच्चों की जरूरत समझने और उनके लिए अलग-अलग अभ्यास तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। इस तरह तकनीक को शिक्षक का विकल्प नहीं बल्कि उसकी सहायता करने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर रहेगा।
अंग्रेजी सीखने का तरीका भी होगा आसान
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंग्रेजी भाषा शिक्षण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी अंग्रेजी मजबूत करने के लिए शिक्षकों को भाषा शिक्षण की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बच्चों को अंग्रेजी के शब्दों और ध्वनियों से परिचित कराने के लिए स्मार्ट टीवी तथा दृश्य-श्रव्य माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा। ध्वनि आधारित अभ्यास और गतिविधियों के जरिए बच्चों को उच्चारण समझने तथा शब्दों को सही तरीके से बोलने का अवसर मिलेगा।
एक्शन वर्ड्स और अन्य बुनियादी शब्दावली को खेल और गतिविधियों के माध्यम से सिखाने के तरीके भी बताए जाएंगे। इससे बच्चों के लिए अंग्रेजी सीखना केवल किताब और कॉपी तक सीमित न रहकर सुनने, देखने और बोलने की प्रक्रिया से जुड़ सकेगा।
समग्र प्रगति पर भी रहेगी नजर
प्रशिक्षण में बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को समझने और उसका आकलन करने के तरीकों पर भी चर्चा होगी। समग्र प्रगति कार्ड से संबंधित प्रक्रियाओं के माध्यम से बच्चों के सीखने को केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी व्यापक प्रगति के रूप में देखने पर जोर दिया जाएगा।
शिक्षकों को यह समझाया जाएगा कि बच्चों की प्रगति का नियमित आकलन करने से समय रहते उनकी कमजोरियों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद उसी आधार पर अतिरिक्त अभ्यास और शिक्षण गतिविधियां तैयार किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण भी होगा डिजिटल निगरानी के दायरे में
निपुण हरियाणा के तहत चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसकी निगरानी व्यवस्था को भी डिजिटल बनाया गया है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता और शिक्षकों की सीखने की प्रगति पर नजर रखने के लिए प्रत्येक दिन की शुरुआत प्री-टेस्ट से होगी, जबकि दिन के अंत में पोस्ट-टेस्ट के जरिए यह जांचा जाएगा कि प्रशिक्षण से शिक्षकों ने कितना सीखा।
इस व्यवस्था से प्रशिक्षण के प्रभाव का तत्काल आकलन किया जा सकेगा। यदि किसी विषय में शिक्षकों को अधिक सहायता की जरूरत महसूस होती है तो उसके अनुसार प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
निपुण ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति
प्रशिक्षण में शिक्षकों की उपस्थिति को भी डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा। इसके लिए निपुण ऐप और संपर्क स्मार्ट शाला ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उपस्थिति की प्रक्रिया में पारदर्शिता आने के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने वाले शिक्षकों का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा।
डिजिटल निगरानी से अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों की भागीदारी कैसी रही और निर्धारित गतिविधियों को किस स्तर तक पूरा किया गया।
तकनीक के साथ बदलेगा कक्षा का माहौल
निपुण हरियाणा मिशन के तहत किए जा रहे इन प्रयासों का व्यापक उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। सरकारी स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट टीवी और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक जीवंत बनाने के लिए किया जा रहा है।
पारंपरिक ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण के साथ जब दृश्य-श्रव्य सामग्री, गतिविधियां, स्मार्ट उपकरण और एआई आधारित सामग्री जुड़ती है तो बच्चों को कठिन विषयों को समझने के लिए कई माध्यम उपलब्ध होते हैं। खासकर प्राथमिक कक्षाओं में इसका महत्व अधिक है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे देखकर, सुनकर और गतिविधियों के जरिए अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं।
प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को भी इस बदलाव के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्हें केवल उपकरण चलाने की जानकारी देने के बजाय यह सिखाने पर जोर है कि किसी तकनीक का उपयोग किस समय, किस उद्देश्य और किस तरह किया जाए।
जिला एफएलएन के संयोजक डा. विक्रम सिंह के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम को तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। इसकी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल निगरानी से जोड़ा गया है, ताकि शिक्षकों की उपस्थिति, सीखने की प्रगति और प्रशिक्षण के परिणामों का प्रभावी आकलन किया जा सके।
करीब 400 प्राथमिक शिक्षकों के प्रशिक्षण के बाद उम्मीद है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल कक्षाओं में और व्यापक स्तर पर होगा। इससे बच्चों को गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों को नए और अधिक रोचक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही शिक्षकों के लिए भी पाठ योजना, अभ्यास सामग्री और मूल्यांकन तैयार करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।
निपुण हरियाणा के इस प्रयास से सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा का स्वरूप धीरे-धीरे डिजिटल और गतिविधि आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में एआई, स्मार्ट टीवी और अन्य तकनीकी संसाधन यदि शिक्षकों के मार्गदर्शन और बच्चों की जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल किए जाते हैं, तो प्राथमिक शिक्षा में सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




