पंजाब में अंतिम मतदाता सूची जारी, 13.60 लाख की कमी; पुनरीक्षण के बाद 2.01 करोड़ मतदाता दर्ज

पंजाब में अंतिम मतदाता सूची जारी, 13.60 लाख की कमी; पुनरीक्षण के बाद 2.01 करोड़ मतदाता दर्ज

ड्राफ्ट सूची के मुकाबले 7.06 लाख मतदाता बढ़े, जांच के बाद 86,038 नाम अयोग्य; 7.97 लाख नए मतदाता भी जुड़े

चंडीगढ़। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। नई सूची के अनुसार, राज्य में अब कुल 2,01,00,727 पंजीकृत मतदाता हैं। वहीं, 9 जून 2026 को उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या 2,14,61,043 थी। इस तरह शुरुआती आंकड़े की तुलना में अंतिम सूची में 13,60,316 मतदाता कम दर्ज हुए हैं।

हालांकि, शुरुआती और अंतिम आंकड़ों के बीच का यह अंतर केवल हटाए गए नामों की संख्या नहीं है। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के विवरण का सत्यापन, पुराने रिकॉर्ड से मिलान, नए नामों को जोड़ने और दावे-आपत्तियों के निपटारे सहित कई चरण पूरे किए गए। इस दौरान नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया और संदिग्ध या त्रुटिपूर्ण विवरण वाले मामलों की जांच भी की गई।

पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल 1,93,94,435 मतदाता दर्ज थे। दावे-आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम सूची में यह संख्या बढ़कर 2,01,00,727 हो गई। इस प्रकार ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में 7,06,292 मतदाताओं की वृद्धि हुई है।

निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान 7,97,263 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। दूसरी ओर, नोटिस जारी किए गए 35,49,036 मतदाताओं के मामलों की जांच की गई। सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद 86,038 मतदाताओं को अयोग्य घोषित किया गया। निर्वाचन कार्यालय का कहना है कि यह कार्रवाई जांच और कारण सहित आदेश की प्रक्रिया के आधार पर की गई।

शुरुआती आंकड़े और अंतिम सूची में 13.60 लाख का अंतर

पंजाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अलग-अलग चरणों में मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर देखने को मिला। 9 जून 2026 को राज्य में 2,14,61,043 मतदाता दर्ज थे। इसके बाद 13 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 1,93,94,435 रह गई।

इस तरह शुरुआती आंकड़े और ड्राफ्ट सूची के बीच 20,66,608 मतदाताओं का अंतर सामने आया। इसके बाद निर्वाचन कार्यालय ने दावे और आपत्तियां दर्ज करने, मतदाताओं के विवरण का सत्यापन करने और पात्र लोगों के नाम शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की।

इन प्रक्रियाओं के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2,01,00,727 हो गई। ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 7,06,292 मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि लगभग 3.64 प्रतिशत है।

हालांकि, अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या शुरुआती आंकड़े से अब भी 13,60,316 कम है। इस अंतर को समझने के लिए पुनरीक्षण के विभिन्न चरणों में हुए बदलावों को देखना जरूरी है। केवल शुरुआती आंकड़े से अंतिम सूची की तुलना करके यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इतने ही नाम काटे गए हैं।

निर्वाचन प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड से विवरण का मिलान, मतदाताओं की पात्रता की जांच, नए पंजीकरण और दावे-आपत्तियों पर निर्णय जैसे चरण शामिल रहे। इसलिए अलग-अलग सूचियों में दर्ज कुल संख्या के बीच अंतर का आकलन पूरी प्रक्रिया के संदर्भ में करना होगा।

7.97 लाख नए मतदाताओं के नाम शामिल

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नए मतदाताओं को पंजीकरण का अवसर भी दिया गया। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, इस प्रक्रिया में 7,97,263 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। नए नाम शामिल होने से ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई।

मतदाता सूची में नाम शामिल होना चुनाव में मतदान करने के लिए जरूरी है। इसलिए पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिकों के नाम दर्ज करने और विवरण में सुधार करने पर भी ध्यान दिया गया। जिन लोगों के नाम पहले की सूची में नहीं थे, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते थे।

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया गया। इस दौरान मतदाताओं के विवरण की जांच की गई और पात्र पाए गए लोगों को अंतिम सूची में शामिल किया गया। इसी प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या ड्राफ्ट सूची के मुकाबले 7 लाख से अधिक बढ़ी।

निर्वाचन कार्यालय के लिए यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतन करने का महत्वपूर्ण चरण है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करना और रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों या विसंगतियों को दूर करना है।

35.49 लाख मतदाताओं को नोटिस, जांच के बाद 86 हजार अयोग्य

पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन कार्यालय ने 35,49,036 मतदाताओं को नोटिस जारी किए। इन मामलों में मतदाताओं के विवरण का पुराने रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया था या उपलब्ध जानकारी में त्रुटियां पाई गई थीं। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं से जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, नोटिस जारी होने के बाद सुनवाई और दस्तावेजों की जांच की गई। इसके बाद 86,038 मतदाताओं को अयोग्य घोषित किया गया। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय जांच और कारण सहित आदेश के आधार पर लिया गया।

नोटिस जारी होना और किसी मतदाता को अयोग्य घोषित किया जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। नोटिस का उद्देश्य संबंधित विवरण की जांच करना और मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होता है। इसलिए नोटिस पाने वाले सभी मतदाताओं को अयोग्य घोषित किए गए लोगों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

इसी तरह, शुरुआती आंकड़े और अंतिम सूची के बीच दर्ज कुल अंतर को भी केवल नाम हटाए जाने से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। नए पंजीकरण, सत्यापन, दावे-आपत्तियों पर फैसले और अन्य संशोधनों का भी कुल संख्या पर असर पड़ा है।

अंतिम सूची में पुरुष मतदाता अधिक

अंतिम मतदाता सूची में पंजाब के कुल 2,01,00,727 मतदाताओं में 1,03,76,026 पुरुष, 97,24,195 महिलाएं और 506 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, अंतिम सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है। वहीं, थर्ड जेंडर मतदाताओं के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। ये आंकड़े राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की श्रेणीवार स्थिति को दर्शाते हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का अद्यतन होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी सूची के आधार पर पात्र मतदाताओं को मतदान का अधिकार मिलता है। इसलिए मतदाताओं को अपने नाम, पते और अन्य विवरण की जांच करने की जरूरत है, ताकि चुनाव के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

पोलिंग स्टेशनों की संख्या भी बढ़ी

मतदाताओं की सुविधा के लिए पंजाब में पोलिंग स्टेशनों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। पहले राज्य में 24,453 पोलिंग स्टेशन थे, जिन्हें बढ़ाकर अब 25,332 कर दिया गया है। इस तरह पोलिंग स्टेशनों की संख्या में 879 की बढ़ोतरी हुई है।

मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ने से मतदाताओं के लिए मतदान व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए पोलिंग स्टेशनों की संख्या और उनके स्थान का महत्व रहता है।

हालांकि, प्रत्येक मतदाता को अपने निर्धारित मतदान केंद्र की जानकारी आधिकारिक मतदाता सूची और निर्वाचन संबंधी सेवाओं के माध्यम से प्राप्त करनी चाहिए। केवल राज्य में पोलिंग स्टेशनों की कुल संख्या बढ़ने से किसी व्यक्ति का मतदान केंद्र अपने आप नहीं बदलता।

वेबसाइट पर देख सकते हैं अपना नाम

मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब की आधिकारिक वेबसाइट www.ceopunjab.gov.in पर अंतिम मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है। मतदाता वेबसाइट पर जाकर संबंधित सूची में अपना नाम और अन्य विवरण जांच सकते हैं।

जिन पात्र नागरिकों के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हैं, वे नाम दर्ज कराने के लिए फार्म नंबर छह भरकर आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने के साथ-साथ अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है।

मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपना नाम, पते और अन्य जरूरी विवरण ध्यान से जांचें। यदि किसी जानकारी में गलती है या नाम सूची में नहीं मिलता है, तो निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही पंजाब में पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे आधिकारिक सूची में अपने पंजीकरण की स्थिति सुनिश्चित करें। निर्वाचन कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन जून के शुरुआती आंकड़े की तुलना में कुल संख्या कम बनी हुई है। इस अंतर का सही आकलन पुनरीक्षण के दौरान हुए सभी बदलावों को ध्यान में रखकर ही किया जा सकता है।