मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात के बाद भाजपा नेता का आरोप, राजनीतिक दलों ने प्रक्रिया में शामिल होकर नहीं जताई कोई आपत्ति
चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों के नेता देश के दूसरे हिस्सों, खासकर दिल्ली में, चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि पंजाब में इसी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने कोई बड़ी आपत्ति दर्ज नहीं करवाई। जाखड़ ने इसे राजनीतिक दलों का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि यदि किसी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया पर संदेह था तो उसे निर्धारित संवैधानिक व्यवस्था के तहत अपनी आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए थी।
सुनील जाखड़ ने इस मुद्दे पर पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा से मुलाकात कर राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया के बारे में जानकारी हासिल की। मुलाकात के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वह यह जानना चाहते थे कि पंजाब में मतदाता सूचियों की समीक्षा के लिए कोई अलग प्रक्रिया अपनाई गई थी या देश के अन्य राज्यों की तरह ही यहां भी काम हुआ था।
जाखड़ के मुताबिक, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पंजाब में भी वही प्रक्रिया अपनाई गई, जो देश के अन्य राज्यों में लागू थी। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि प्रक्रिया समान थी तो पंजाब में उस दौरान आपत्तियां दर्ज नहीं कराने वाले दल दूसरे राज्यों में इसे लेकर विरोध क्यों कर रहे हैं।
दिल्ली में प्रदर्शन, पंजाब में आपत्ति क्यों नहीं?
जाखड़ ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन दलों के नेता देश के विभिन्न हिस्सों में एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में पंजाब के भी कई नेता दिखाई दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां ये नेता लोगों के बीच जाकर एसआईआर को लेकर विरोध जता रहे हैं, जबकि पंजाब में पूरी प्रक्रिया के दौरान संबंधित दलों की ओर से कोई बड़ी आपत्ति सामने नहीं आई।
भाजपा नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने और अपनी शिकायतें दर्ज कराने का अधिकार है। लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। यदि किसी चरण में कोई गड़बड़ी नजर आती है तो संबंधित पार्टी को उसी समय अधिकारियों के सामने तथ्य रखने चाहिए, ताकि समस्या का समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि पंजाब में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया गया था। इसके बावजूद यदि अब वही दल दूसरे राज्यों में इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पंजाब में उन्होंने अपनी आपत्तियां क्यों दर्ज नहीं कराईं।
जाखड़ ने इसे राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए कहा कि एक ही प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग रवैया अपनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यदि राजनीतिक दलों को वास्तव में प्रक्रिया पर कोई संदेह था, तो उन्हें अपनी शिकायतें समय रहते संबंधित अधिकारियों के सामने रखनी चाहिए थीं।
25 हजार से अधिक बूथों पर प्रतिनिधियों की भागीदारी का दावा
एसआईआर की प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा करते हुए जाखड़ ने कहा कि पंजाब में 25 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। उनके अनुसार, चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत पंजीकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के रूप में प्रक्रिया में भाग लिया।
जाखड़ ने दावा किया कि मतदाता सूचियों की समीक्षा के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने अलग-अलग चरणों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में प्रक्रिया की प्रगति से संबंधित आंकड़े साझा किए गए और प्रतिनिधियों से कहा गया कि वे उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी सहमति या आपत्ति दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता सूचियों की समीक्षा को पारदर्शी बनाना और राजनीतिक दलों को पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने का अवसर देना था। जाखड़ के मुताबिक, प्रतिनिधियों को यह मौका मिला कि वे अपने क्षेत्र में मतदाताओं से संबंधित विवरण की जांच करें और यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई दे तो उसे अधिकारियों के संज्ञान में लाएं।
भाजपा नेता ने दावा किया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी राजनीतिक दल ने बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका नहीं जताई। जहां कहीं कोई समस्या सामने आई, उसे दूर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी पार्टी को किसी मतदाता का नाम हटाए जाने या नया नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति थी, तो उसके पास संबंधित अधिकारियों के सामने मामला उठाने का अवसर था।
हालांकि, जाखड़ के ये दावे उनके द्वारा साझा की गई जानकारी और मुलाकात के बाद दिए गए बयान पर आधारित हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की ओर से इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आने पर राजनीतिक दलों के पक्ष भी स्पष्ट हो सकेंगे।
मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जाखड़ ने कुछ विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया संबंधित क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी की गई। उन्होंने दावा किया कि जिन विधानसभा क्षेत्रों का उन्होंने उल्लेख किया, वहां संबंधित दलों के नेताओं ने अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त किया था और इन प्रतिनिधियों की सहमति के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ी।
भाजपा नेता ने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं, क्योंकि उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। उनके अनुसार, भाजपा के प्रतिनिधियों ने समय-समय पर समीक्षा के दौरान अपनी सहमति दर्ज कराई।
जाखड़ का तर्क है कि मतदाता सूची में संशोधन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया और राजनीतिक दलों को उसमें भागीदारी का अवसर मिला। ऐसे में यदि बाद में किसी दल को प्रक्रिया पर सवाल उठाना है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी आपत्ति किस विशेष चरण, आंकड़े या निर्णय को लेकर है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना और नियमों के अनुसार अपात्र या हटाए जाने योग्य प्रविष्टियों की समीक्षा करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की भागीदारी का महत्व बढ़ जाता है।
‘प्रदर्शन से पहले संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करें’
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने से पहले उन्हें चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत उपलब्ध अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को बूथ स्तर पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त करने, प्रक्रिया की जानकारी लेने और किसी भी गड़बड़ी पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है।
जाखड़ ने कहा, “मैं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं से कहना चाहता हूं कि प्रदर्शन करने से पहले संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सवाल तो करो। वहां तो सभी जगह सहमति दी है और बाहर लोगों में जाकर विरोध कर रहे हैं, यह नहीं होना चाहिए।”
उनका कहना था कि यदि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने समीक्षा के दौरान अपनी सहमति दी थी, तो बाद में विरोध करते समय उन्हें उन बिंदुओं को स्पष्ट करना चाहिए जिन पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। जाखड़ के अनुसार, केवल राजनीतिक मंचों पर विरोध जताने के बजाय संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर शिकायत दर्ज कराना अधिक उचित तरीका है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी राजनीतिक दल की चिंता को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसी चिंताओं को सामने रखने के लिए निर्धारित व्यवस्था मौजूद है, जिसका इस्तेमाल करना जरूरी है।
एसआईआर पर सियासी टकराव तेज होने के संकेत
पंजाब में एसआईआर को लेकर जाखड़ के बयान से राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। भाजपा जहां इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी और सहमति का हवाला देकर कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के विरोध पर सवाल उठा रही है, वहीं इस मुद्दे पर आगे होने वाली प्रतिक्रियाएं विवाद की दिशा तय कर सकती हैं।
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान राजनीतिक दलों की भागीदारी किस तरह हुई, किन बिंदुओं पर सहमति या आपत्ति दर्ज की गई और दूसरे राज्यों में एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों का आधार क्या है। जाखड़ ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात के बाद कहा कि पंजाब में अपनाई गई प्रक्रिया देश के अन्य राज्यों जैसी ही थी।
भाजपा नेता ने अपने बयान में राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे मतदाता सूची से संबंधित किसी भी शिकायत को तथ्यों के साथ संबंधित अधिकारियों के सामने रखें। उनके अनुसार, इससे न केवल शिकायतों का समाधान संभव होगा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच पैदा होने वाले संदेह भी दूर किए जा सकेंगे।
फिलहाल, जाखड़ ने पंजाब में एसआईआर के दौरान राजनीतिक दलों की भागीदारी और कथित सहमति को आधार बनाकर कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के विरोध पर सवाल उठाए हैं। अब इस मुद्दे पर संबंधित दलों की प्रतिक्रिया और चुनावी अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली विस्तृत जानकारी महत्वपूर्ण होगी।




