रावी-उज के कहर से अजनाला को स्थायी राहत की मांग, धालीवाल ने राज्यपाल से केंद्र तक मुद्दा पहुंचाने की अपील की

रावी-उज के कहर से अजनाला को स्थायी राहत की मांग, धालीवाल ने राज्यपाल से केंद्र तक मुद्दा पहुंचाने की अपील की

अजनाला विधानसभा क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या को स्थायी रूप से खत्म करने और सीमावर्ती इलाके के विकास को गति देने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। धालीवाल के नेतृत्व में अजनाला क्षेत्र का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला, जिसमें इलाके के सरपंचों, चेयरमैनों और जिला परिषद सदस्यों समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे।

मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अजनाला के लोगों की लंबे समय से चली आ रही परेशानी को राज्यपाल के सामने विस्तार से रखा है। उन्होंने कहा कि रावी और उज नदियों में आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण अजनाला क्षेत्र को हर वर्ष गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में पानी का दबाव बढ़ने से किसानों, ग्रामीणों और स्थानीय कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

धालीवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से होकर पंजाब में प्रवेश करने वाली उज नदी का पानी पठानकोट, सुजानपुर, दीनानगर, गुरदासपुर और डेरा बाबा नानक होते हुए अजनाला क्षेत्र तक पहुंचता है। अजनाला में इसका प्रभाव बेहद गंभीर हो जाता है और बाढ़ का पानी लोगों के घरों, खेतों तथा सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को प्रभावित करता हुआ आगे पाकिस्तान की ओर चला जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल इस स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्य करने पड़ते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में समस्या दोबारा खड़ी हो जाती है।

विधायक के मुताबिक बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। किसानों की तैयार फसलें पानी में डूब जाती हैं और लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से जमीन की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इसके अलावा ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचता है, स्कूलों और अन्य सरकारी इमारतों को क्षति होती है तथा कई जगहों पर संपर्क मार्ग टूट जाने से गांवों का मुख्य इलाकों से संपर्क प्रभावित हो जाता है।

धालीवाल ने कहा कि अजनाला जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में लगातार बाढ़ का खतरा केवल प्राकृतिक आपदा की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्र के आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के जोखिम को देखते हुए उद्योग लगाने वाले निवेशक इलाके में आने से हिचकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित होते हैं और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है।

मुलाकात के दौरान विधायक ने राज्यपाल का ध्यान केंद्र सरकार की उस प्रस्तावित योजना की ओर भी दिलाया, जिसमें उज नदी पर बांध बनाने की बात लंबे समय से चल रही है। धालीवाल ने कहा कि यह परियोजना पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से लंबित है। उनके अनुसार यदि उज नदी पर प्रस्तावित बांध का निर्माण जल्द पूरा किया जाता है तो इससे पंजाब के सीमावर्ती इलाकों को बाढ़ के खतरे से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

धालीवाल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष प्राथमिकता के आधार पर उठाएं। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सामने परियोजना को प्रभावी ढंग से रखने की अपील की, ताकि वर्षों से लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके और बांध निर्माण का काम शुरू अथवा पूरा हो सके।

विधायक ने कहा कि बांध बनने से केवल बाढ़ नियंत्रण में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि इसके कई दूसरे आर्थिक और विकासात्मक लाभ भी हो सकते हैं। उनके अनुसार परियोजना के माध्यम से बिजली उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी, सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण किया जा सकेगा और किसानों को पानी की बेहतर उपलब्धता मिल सकती है। साथ ही बांध तथा उससे जुड़ी परियोजनाओं के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि अजनाला और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों को केवल बाढ़ प्रभावित इलाकों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन बार-बार आने वाली बाढ़ और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण उनकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। धालीवाल ने केंद्र और राज्य सरकार से ऐसी दीर्घकालिक योजना तैयार करने की मांग की, जिससे बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिले।

धालीवाल ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए कहा कि यदि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाना है तो विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने लंबे समय से देश की सुरक्षा और सीमाओं की मजबूती में योगदान दिया है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई, उद्योग, रोजगार और बाढ़ नियंत्रण जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

आप विधायक ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों की उपेक्षा का असर वहां की आबादी के आर्थिक और सामाजिक विकास पर पड़ता है। यदि इन क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश नहीं होगा तो रोजगार के अवसर कम होंगे और युवाओं का पलायन बढ़ सकता है। इसलिए अजनाला जैसे इलाकों के लिए विशेष विकास योजना बनाना जरूरी है।

मुलाकात के दौरान धालीवाल ने पिछली बार प्रधानमंत्री की ओर से घोषित करीब 1,600 करोड़ रुपये के मुआवजे का मुद्दा भी राज्यपाल के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों और किसानों को घोषित राहत राशि अभी तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो पाई है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में भी हस्तक्षेप करने और प्रभावित लोगों तक मुआवजा पहुंचाने के लिए केंद्र के साथ बातचीत करने का आग्रह किया।

धालीवाल ने कहा कि अजनाला के लोगों को हर वर्ष बाढ़ के दौरान भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। किसानों की फसलें बर्बाद होने के साथ-साथ ग्रामीण परिवारों के सामने घरों, पशुधन, सड़कों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में केवल हर वर्ष राहत राशि देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाढ़ के मूल कारणों का स्थायी समाधान जरूरी है।

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखी गई मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना। धालीवाल के अनुसार राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात का समय तय करवाने का भरोसा भी दिलाया।

विधायक ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राज्यपाल के हस्तक्षेप से उज नदी से जुड़ी लंबित परियोजना को केंद्र सरकार के स्तर पर गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यदि बांध परियोजना पर ठोस कार्रवाई होती है तो अजनाला सहित पंजाब के कई सीमावर्ती इलाकों को हर वर्ष होने वाले बाढ़ के नुकसान से राहत मिल सकती है।

धालीवाल ने स्पष्ट किया कि अजनाला के लोगों की मांग केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है। क्षेत्र को ऐसी स्थायी व्यवस्था की जरूरत है जिससे बाढ़ का खतरा कम हो, कृषि सुरक्षित रहे, सिंचाई की सुविधाएं बढ़ें, उद्योग स्थापित हो सकें और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और लाखों लोगों के भविष्य से जुड़े विषय के रूप में देखना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से यह भी मांग की कि केंद्र और पंजाब सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर उज नदी परियोजना, बाढ़ नियंत्रण और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास पर समयबद्ध तरीके से काम किया जाए। धालीवाल ने कहा कि अजनाला के लोगों को हर साल बाढ़ आने का इंतजार करने और उसके बाद नुकसान का आकलन करने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर स्थायी समाधान चाहिए।

उन्होंने भरोसा जताया कि राज्यपाल की ओर से केंद्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद लंबे समय से लंबित उज नदी बांध परियोजना और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े दूसरे कार्यों में तेजी आएगी। विधायक ने कहा कि अजनाला के लोगों की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक क्षेत्र को बाढ़ से स्थायी सुरक्षा और विकास के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल जातीं।