गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस देने के विरोध में तीन दिन की हड़ताल; सरकार ने एपीटीईएल जाने का फैसला किया, बिजलीघरों और पावरग्रिड की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
चंडीगढ़। हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को देखते हुए राज्य सरकार ने बिजली आपूर्ति सुचारू रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को प्रशासनिक सचिवों और सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। हड़ताल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए 6230 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा संवेदनशील बिजली संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण उपक्रमों की निगरानी ड्रोन के माध्यम से की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बिजली कर्मचारी यूनियनों से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल के फैसले को स्थगित करें। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों के प्रति गंभीर है और यूनियनों की मांग के अनुरूप विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में जाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में कर्मचारियों को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हड़ताल के कारण आम जनता को बिजली आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए सभी विभागों को सक्रिय रहना होगा। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखें और किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकने के लिए समय रहते कदम उठाएं।
जनहित में हड़ताल स्थगित करने की अपील
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार बिजली कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही है। यूनियनों की मांग के अनुरूप एपीटीईएल में जाने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे आम लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दें और हड़ताल के निर्णय पर पुनर्विचार करें।
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे पर कर्मचारियों में विरोध है। इसी के चलते तीन दिन की हड़ताल का फैसला लिया गया है। सरकार का प्रयास है कि इस दौरान घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों, अस्पतालों और अन्य जरूरी सेवाओं को बिजली आपूर्ति में बाधा का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली आपूर्ति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बिजलीघरों, पावरग्रिड और अन्य संवेदनशील संस्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
तकनीकी कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सेवाएं लेने की तैयारी
हड़ताल के दौरान बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने वैकल्पिक मानव संसाधन जुटाने की योजना भी बनाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अलग-अलग सरकारी विभागों में कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं। इसके अलावा उद्योगों में काम करने वाले तकनीकी कर्मचारियों और पॉलिटेक्निक कॉलेजों तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में संबंधित पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की सेवाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली आपूर्ति से जुड़े जरूरी कामों को प्रभावित होने से बचाना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उपलब्ध तकनीकी मानव संसाधन का आकलन किया जाए और जरूरत के अनुसार उसकी तैनाती की योजना तैयार रखी जाए।
ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बैठक में बताया कि आम लोगों को परेशानी से बचाने के लिए विभाग सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारियों और पड़ोसी राज्यों के बिजली कर्मचारियों की सेवाएं लेने की तैयारी कर रहा है। विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है, ताकि हड़ताल की स्थिति में बिजली आपूर्ति को यथासंभव सामान्य रखा जा सके।
हर जिले में बनेगी निगरानी कमेटी
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में जिला स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। ये कमेटियां हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था और आम जनता से मिलने वाली शिकायतों की निगरानी करेंगी। जिला स्तरीय कमेटियां चंडीगढ़ में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय कमेटी को नियमित रूप से रिपोर्ट देंगी।
उन्होंने उपायुक्तों से कहा कि वे मुख्यालय के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें। इसके लिए हॉटलाइन के माध्यम से संवाद व्यवस्था सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जनता की शिकायतें सुनने और उनका समाधान कराने के लिए अलग-अलग कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा उनके नंबर सार्वजनिक करने को कहा गया है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि किसी जिले में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या सामने आने पर संबंधित अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकें। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों, बिजली विभाग और पुलिस के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उपद्रव और बिजली संस्थानों को नुकसान पहुंचाने पर सख्ती
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि हड़ताल की आड़ में किसी भी तरह का उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति बिजलीघर, पावरग्रिड या किसी अन्य महत्वपूर्ण बिजली संस्थान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हड़ताल के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 6230 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील उपक्रमों की ड्रोन से निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते ध्यान दिया जा सके। पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहने तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बैठक में बताया कि हड़ताल के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा 1501 नंबर पर मिलने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त सभी जिलों में कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर स्थापित किए गए हैं, ताकि लोगों को जरूरत पड़ने पर सहायता मिल सके।
कंट्रोल रूम में तैनात होंगे वरिष्ठ अधिकारी
ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि हड़ताल के दौरान बनाए जाने वाले कंट्रोल रूम में निदेशक स्तर के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। इससे बिजली आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने और संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि हड़ताल के दौरान वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि जरूरी सेवाओं पर असर कम से कम हो और किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
बिजली आपूर्ति के साथ पानी की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि पेयजल आपूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाएं बिजली पर निर्भर रहती हैं। संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सभी जिलों के उपायुक्त ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। बिजली मंत्री अनिल विज, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ सहित अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े इंतजामों की जानकारी दी।
सरकार ने जिला प्रशासन, पुलिस और बिजली विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है। अब हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने, शिकायतों के निपटारे और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कर्मचारियों की मांगों पर समाधान तलाशने के साथ-साथ आम जनता को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।



