हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला में परियोजनाओं की तैयारी; ऑयल इंडिया के साथ करार, 84 शहरी निकायों में घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की योजना
चंडीगढ़। हरियाणा के शहरों में कूड़े के बढ़ते ढेरों और सफाई व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने नई योजना तैयार की है। इसके तहत हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला में कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन परियोजनाओं के लिए ऑयल इंडिया के साथ करार किया गया है और निविदा प्रक्रिया शुरू करने से पहले जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य कचरे के बेहतर निस्तारण के साथ शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि कचरा प्रबंधन की इन परियोजनाओं से शहरों में लंबे समय से जमा कूड़े के निस्तारण में मदद मिलेगी। साथ ही, कचरे का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार तकनीक, निगरानी और जवाबदेही पर विशेष ध्यान दे रही है।
चार शहरों में कचरे से बिजली बनाने की तैयारी
हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला में कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाएं शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए ऑयल इंडिया के साथ करार किया जा चुका है। फिलहाल परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया से पहले आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
शहरी क्षेत्रों में कचरे का उचित निस्तारण स्थानीय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। तेजी से बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और रोजाना निकलने वाले कचरे के कारण कई स्थानों पर कूड़े के बड़े ढेर जमा हो जाते हैं। इससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के साथ पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सरकार की नई योजना के तहत कचरे के निस्तारण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। कचरे से बिजली बनाने वाली परियोजनाओं से अपशिष्ट प्रबंधन को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इन परियोजनाओं की शुरुआत और संचालन की समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
84 शहरी निकायों में घर-घर से उठाया जा रहा कूड़ा
शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि हरियाणा के कुल 87 शहरी निकायों में से 84 में घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए ठेके दिए जा चुके हैं। सरकार अब इस व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि सफाई कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऑनलाइन माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस घर से कूड़ा उठाया गया और किन स्थानों पर सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचे। इससे सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यदि किसी क्षेत्र में नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठाया जाता या सफाई कर्मचारी निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचते, तो संबंधित जानकारी के आधार पर शिकायत और निगरानी की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य केवल कूड़ा उठाने के लिए ठेके देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि निर्धारित सेवाएं वास्तव में लोगों तक पहुंचें।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में चार बड़ी कंपनियों को जिम्मेदारी
विपुल गोयल के अनुसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद में कचरा प्रबंधन का काम चार बड़ी कंपनियों को सौंपा गया है। इन कंपनियों के माध्यम से कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इन शहरों में सफाई कार्यों की निगरानी, कूड़ा उठाने की नियमितता और शिकायतों के निस्तारण को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। तकनीक के इस्तेमाल से संबंधित अधिकारियों को यह पता लगाने में आसानी हो सकती है कि किस क्षेत्र में सफाई कार्य निर्धारित तरीके से हो रहा है और कहां सुधार की आवश्यकता है।
सरकार की योजना है कि शहरी निकायों में सफाई से जुड़े कामों की निगरानी केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रहे। इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे कूड़ा उठाने की प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध हो सके और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
स्वीडन के अनुभव से विकसित होगा सफाई का मॉडल
हरियाणा सरकार कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए विदेशों में अपनाए जा रहे तरीकों का भी अध्ययन कर रही है। विपुल गोयल ने बताया कि स्वीडन में कचरा प्रबंधन के सफल अनुभवों को समझा गया है। वहां एक बंदरगाह क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाने के उदाहरण से प्रेरणा लेते हुए हरियाणा में भी इसी तरह का मॉडल विकसित करने की योजना है।
इस दिशा में गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में काम कर रही स्वीडन की कंपनी के अनुभव का लाभ लेने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए संभावित स्थान की पहचान की जा रही है और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ इस विषय पर बातचीत चल रही है।
सरकार का प्रयास है कि विदेशों में अपनाई जा रही बेहतर व्यवस्थाओं और तकनीकों से सीख लेकर हरियाणा के शहरों में सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए। हालांकि, प्रस्तावित मॉडल को किस स्थान पर और किस स्वरूप में लागू किया जाएगा, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
दीपावली पर शहरों और प्रमुख चौराहों पर होगी रोशनी
शहरी स्वच्छता के साथ सरकार ने त्योहारों के दौरान शहरों को बेहतर स्वरूप देने की भी तैयारी की है। विपुल गोयल ने बताया कि दीपावली के अवसर पर शहरों और प्रमुख चौराहों पर रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य त्योहार के दौरान शहरी क्षेत्रों को आकर्षक और व्यवस्थित बनाना है।
बारिश के बाद सड़कों पर बने गड्ढों को भरने का काम भी किया जा रहा है। बरसात के कारण कई जगह सड़कों की स्थिति प्रभावित होती है, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गड्ढों की मरम्मत को जरूरी बताया गया है।
सरकार की ओर से बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। शहरों की सड़कों और प्रमुख मार्गों पर घूमने वाले पशुओं के कारण यातायात प्रभावित होने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। अभियान के माध्यम से इस समस्या पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया जाएगा।
स्वीडन दौरे में निवेश के लिए समझौते
विपुल गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ स्वीडन दौरे के दौरान करीब चार हजार करोड़ रुपये के निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार इन निवेश प्रस्तावों को राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष अप्रैल में प्रस्तावित निवेश सम्मेलन में स्वीडन के निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा। इस सम्मेलन के माध्यम से हरियाणा में निवेश की संभावनाओं को सामने रखने और विदेशी निवेशकों को राज्य में कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है।
सफाई व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने पर सरकार का जोर
हरियाणा सरकार की योजना में कचरे से बिजली उत्पादन, घर-घर से कूड़ा उठाने की निगरानी, कंपनियों की भागीदारी और विदेशी अनुभवों से सीख लेने जैसे कई पहलू शामिल हैं। इसके साथ ही दीपावली से पहले रोशनी, सड़क मरम्मत और बेसहारा पशुओं से निपटने के लिए कदम उठाने की तैयारी है।
इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परियोजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं, कचरे का नियमित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कितना प्रभावी होता है तथा सफाई से जुड़ी शिकायतों का समाधान कितनी तत्परता से किया जाता है। फिलहाल सरकार की ओर से परियोजनाओं की तैयारी और निविदा से पहले की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।



