कर्मचारियों को 5% महंगाई भत्ता देने की घोषणा के दिन ही ऋण लेने की अधिसूचना जारी; 2049 में लौटानी होगी मूल राशि, हर साल चुकाने होंगे करीब 31 करोड़ रुपये ब्याज
हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) देने की घोषणा के बीच 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक ओर कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की घोषणा की, वहीं दूसरी ओर 400 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी। इस राशि के लिए जारी किए जाने वाले सरकारी प्रतिभूति बांड पर सरकार को 7.77 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
प्रस्तावित ऋण की अवधि 23 वर्ष निर्धारित की गई है। इस हिसाब से सरकार को 400 करोड़ रुपये की मूल राशि पर हर वर्ष लगभग 31.08 करोड़ रुपये ब्याज चुकाना होगा। ब्याज की यह राशि निर्धारित दर और पूरी मूल राशि बकाया रहने की स्थिति के आधार पर है। बांड की शर्तों के अनुसार, मूल राशि का भुगतान 24 जून 2049 को किया जाना है। इससे पहले सरकार को नियमित रूप से ब्याज का भुगतान करना होगा।
वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 400 करोड़ रुपये के सरकारी प्रतिभूति बांड की नीलामी 27 अक्टूबर को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुंबई कार्यालय में होगी। यह हिमाचल प्रदेश एसजीएस 2049 बांड की पुनः जारी की जाने वाली सीरीज है। सरकार का कहना है कि कर्ज से जुटाई जाने वाली राशि प्रदेश के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की सहमति भी प्राप्त कर ली गई है।
27 अक्टूबर को होगी बांड की नीलामी
राज्य सरकार वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए सरकारी प्रतिभूतियां जारी कर रही है। इस बार 400 करोड़ रुपये के बांड जारी किए जाएंगे, जिनकी नीलामी 27 अक्टूबर को आरबीआई के मुंबई कार्यालय में निर्धारित की गई है।
इस प्रक्रिया के माध्यम से निवेशक राज्य सरकार के बांड खरीद सकेंगे और इसके बदले सरकार निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज का भुगतान करेगी। बांड की ब्याज दर 7.77 प्रतिशत सालाना तय की गई है। यह हिमाचल प्रदेश एसजीएस 2049 बांड की पुनः जारी की जाने वाली सीरीज है।
सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से जुटाई गई राशि राज्य सरकार के लिए ऋण का हिस्सा होगी। इसे निर्धारित अवधि में ब्याज सहित चुकाना होगा। अधिसूचना के मुताबिक, बांड की अवधि 23 वर्ष रखी गई है। इसकी शुरुआत 24 जून 2026 से मानी जाएगी और इसकी परिपक्वता तिथि 24 जून 2049 निर्धारित की गई है।
इसका अर्थ है कि सरकार को ऋण की मूल राशि लौटाने के लिए लंबी अवधि मिलेगी, लेकिन इस दौरान ब्याज का भुगतान निर्धारित समय पर करना होगा।
हर साल करीब 31.08 करोड़ रुपये ब्याज का बोझ
400 करोड़ रुपये के इस ऋण पर 7.77 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के हिसाब से सरकार को प्रत्येक वर्ष लगभग 31.08 करोड़ रुपये ब्याज देना होगा। यह गणना पूरी मूल राशि पर एक वर्ष के ब्याज के आधार पर की गई है।
बांड की शर्तों के अनुसार, ब्याज का भुगतान हर साल दो किस्तों में किया जाएगा। पहली किस्त 24 जून और दूसरी किस्त 24 दिसंबर को देय होगी। इस व्यवस्था के तहत सरकार को साल में दो बार निवेशकों को ब्याज चुकाना होगा।
यदि पूरे 23 वर्ष की अवधि में मूल राशि 400 करोड़ रुपये बनी रहती है और ब्याज दर 7.77 प्रतिशत ही रहती है, तो साधारण गणना के आधार पर सालाना ब्याज की कुल राशि लगभग 31.08 करोड़ रुपये होगी। इस दर से 23 वर्षों में ब्याज का कुल योग करीब 715 करोड़ रुपये बैठता है। यह अनुमान पूरी अवधि के लिए मूल राशि पर समान वार्षिक ब्याज के आधार पर है; वास्तविक भुगतान बांड की लागू शर्तों और अवधि के अनुसार होगा।
इस प्रकार, 400 करोड़ रुपये की मूल राशि के अतिरिक्त सरकार को लंबी अवधि में ब्याज के रूप में भी बड़ी रकम चुकानी होगी। मूल राशि का भुगतान 24 जून 2049 को किया जाना निर्धारित है।
2049 में चुकानी होगी मूल राशि
सरकार की अधिसूचना में बांड की अवधि और भुगतान की तारीखों का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, बांड की अवधि 24 जून 2026 से मानी जाएगी और इसकी परिपक्वता 24 जून 2049 को होगी। इसी तारीख को सरकार को 400 करोड़ रुपये की मूल राशि लौटानी होगी।
लंबी अवधि के ऋण का उद्देश्य सरकार को तत्काल वित्तीय संसाधन उपलब्ध करवाना है, ताकि निर्धारित विकास कार्यों के लिए धन जुटाया जा सके। हालांकि, इसके साथ भविष्य के वर्षों में ब्याज और मूलधन चुकाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी रहेगी।
राज्य सरकार ने कहा है कि इस ऋण से प्राप्त राशि प्रदेश के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार की सहमति मिलने के बाद बांड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
सरकारी बांड के जरिए ऋण जुटाना राज्यों के वित्तीय प्रबंधन का एक माध्यम है। इसमें सरकार निवेशकों से धन प्राप्त करती है और तय शर्तों के अनुसार ब्याज तथा मूलधन लौटाती है। इस मामले में भी सरकार ने ब्याज दर, भुगतान की तारीख और परिपक्वता अवधि अधिसूचना में निर्धारित की है।
कर्मचारियों के डीए की घोषणा के साथ आया ऋण का फैसला
शुक्रवार को सरकार ने कर्मचारियों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की। इसी दिन 400 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की अधिसूचना जारी होने से सरकारी खर्च और वित्तीय संसाधनों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के प्रभाव से राहत देने के लिए दिया जाता है। दूसरी ओर, राज्य सरकार को वेतन, पेंशन, विकास योजनाओं और अन्य प्रशासनिक खर्चों के लिए भी वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में सरकार के सामने राजस्व और व्यय के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है।
हालांकि, डीए की घोषणा और नए ऋण की अधिसूचना एक ही दिन जारी होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ऋण की राशि सीधे महंगाई भत्ते के भुगतान के लिए ली जा रही है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस ऋण से प्राप्त धन प्रदेश के विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
इसलिए दोनों फैसलों को अलग-अलग वित्तीय निर्णयों के रूप में देखना जरूरी है। एक तरफ कर्मचारियों को महंगाई भत्ते के माध्यम से राहत देने की घोषणा हुई है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार ने विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
एसएलआर के लिए पात्र होंगे सरकारी बांड
सरकार ने अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया है कि जारी किए जाने वाले बांड बैंकिंग नियमन अधिनियम के तहत वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) के लिए पात्र सरकारी प्रतिभूतियों में गिने जाएंगे।
एसएलआर के तहत बैंकों को अपनी निर्धारित देनदारियों के अनुपात में नकदी, सोना या पात्र सरकारी प्रतिभूतियों जैसी परिसंपत्तियां रखनी होती हैं। इस श्रेणी में पात्रता होने से बांड बैंकिंग नियमन के अंतर्गत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकार की प्रतिभूतियां निवेशकों, विशेषकर निर्धारित नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले बैंकों, के लिए उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, बांड की खरीद और नीलामी में भागीदारी निवेशकों के निर्णय तथा लागू शर्तों पर निर्भर करेगी।
विकास कार्यों के लिए जुटाए जाएंगे संसाधन
हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि 400 करोड़ रुपये के इस ऋण से मिलने वाली राशि विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। बांड की नीलामी के बाद प्राप्त धन राज्य के वित्तीय संसाधनों में शामिल होगा और सरकार इसे निर्धारित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करेगी।
दूसरी ओर, 7.77 प्रतिशत की ब्याज दर पर लिए जा रहे इस ऋण से भविष्य में नियमित ब्याज भुगतान की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। सरकार को हर साल जून और दिसंबर में ब्याज की किस्तें चुकानी होंगी, जबकि मूल राशि 2049 में लौटानी होगी।
फिलहाल, अधिसूचना जारी होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण 27 अक्टूबर को होने वाली बांड नीलामी है। इसके जरिए सरकार 400 करोड़ रुपये जुटाने का प्रयास करेगी। इस ऋण की शर्तों के अनुसार, राज्य को लंबी अवधि में ब्याज और मूलधन का भुगतान करना होगा।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को पांच प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा के साथ ही विकास कार्यों के लिए 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 23 वर्ष की अवधि वाले इस ऋण पर 7.77 प्रतिशत सालाना ब्याज लागू होगा। सरकार को हर वर्ष लगभग 31.08 करोड़ रुपये ब्याज चुकाना होगा और 24 जून 2049 को मूल राशि लौटानी होगी।




