हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवा शुरू करना ही काफी नहीं है, बल्कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसे लगातार लेना भी बेहद जरूरी है। कई मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद रक्तचाप सामान्य होने पर अपनी मर्जी से गोलियां लेना बंद कर देते हैं, जबकि कुछ लोग व्यस्त दिनचर्या या लापरवाही के कारण बार-बार खुराक छोड़ देते हैं। ऐसी आदत दिल की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। एक बड़े अध्ययन के विश्लेषण में सामने आया है कि ब्लड प्रेशर की दवाएं नियमित रूप से लेने वाले मरीजों में दिल से जुड़ी गंभीर घटनाओं का जोखिम 11 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, दवा का फायदा तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है, जब मरीज निर्धारित खुराक और समय का पालन करें। इसके विपरीत, बार-बार दवा छोड़ने वालों में हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा घटने का स्पष्ट लाभ नहीं देखा गया। इस अध्ययन ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान दिलाया है कि हाई बीपी का इलाज लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें मरीज की नियमितता की अहम भूमिका होती है।
91 हजार से ज्यादा लोगों के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
इस शोध में 91,339 लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ESC) कांग्रेस 2026 में प्रस्तुत किए गए। शोधकर्ताओं ने नौ क्लीनिकल ट्रायल से मिले आंकड़ों को आधार बनाया, ताकि यह समझा जा सके कि रक्तचाप की दवाएं नियमित रूप से लेने और बीच-बीच में छोड़ने से स्वास्थ्य परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
हाई ब्लड प्रेशर दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। अनुमान के मुताबिक, 30 से 79 वर्ष की उम्र के लगभग 1.4 अरब लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल और रक्त वाहिकाओं पर लगातार दबाव डालता है। लंबे समय तक इसे नियंत्रित न रखने से दिल का दौरा, स्ट्रोक और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
रक्तचाप कम करने वाली दवाएं इन जोखिमों को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टर के निर्देशों के मुताबिक नियमित रूप से दवा नहीं लेते। इस समस्या को समझना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दवा लिखे जाने और उसका लगातार सेवन किए जाने के बीच का अंतर इलाज की सफलता को प्रभावित कर सकता है।
पांच साल में कम हो गई दवा लेने वाले मरीजों की संख्या
अध्ययन में मरीजों को उनकी दवा लेने की आदत के आधार पर दो समूहों में बांटा गया। जिन मरीजों ने निर्धारित खुराक का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा लिया, उन्हें नियमित रूप से दवा लेने वाले समूह में शामिल किया गया। वहीं, जिन मरीजों ने निर्धारित खुराक का 80 प्रतिशत से कम सेवन किया, उन्हें कम नियमितता वाले समूह में रखा गया।
आंकड़ों से पता चला कि पहले वर्ष में लगभग 88 प्रतिशत मरीज अपनी दवाएं नियमित रूप से ले रहे थे। हालांकि, समय बीतने के साथ इस आदत में गिरावट आई। पांचवें वर्ष तक नियमित रूप से दवा लेने वाले मरीजों का अनुपात घटकर 79 प्रतिशत रह गया।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इलाज शुरू करने के बाद लंबे समय तक उसका पालन करना कई मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शुरुआत में मरीज दवा को लेकर सतर्क रहते हैं, लेकिन कुछ समय बाद खुराक छूटने लगती है। किसी को अपनी दिनचर्या के कारण दवा याद नहीं रहती, तो कोई रक्तचाप सामान्य होने पर यह मान लेता है कि अब दवा की जरूरत नहीं है।
हालांकि, केवल रक्तचाप का सामान्य दिखाई देना इस बात का प्रमाण नहीं है कि बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है। कई मामलों में दवा के प्रभाव से ही बीपी नियंत्रण में रहता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लिए बिना दवा बंद करना या उसकी मात्रा बदलना उचित नहीं है।
नियमित दवा लेने से रक्तचाप पर बेहतर नियंत्रण
शोध में दवा लेने की नियमितता और सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच भी अंतर सामने आया। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर रक्तचाप की रीडिंग में ऊपर दिखाई देने वाली संख्या होती है। यह उस समय का दबाव बताती है, जब दिल सिकुड़कर खून को शरीर में पंप करता है।
नियमित रूप से दवा लेने वाले मरीजों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर, कम नियमितता वाले मरीजों की तुलना में औसतन 5.2 एमएमएचजी कम था। दूसरी ओर, कम नियमितता वाले समूह में यह अंतर लगभग 3 एमएमएचजी दर्ज किया गया।
यह अंतर बताता है कि दवा का लगातार सेवन रक्तचाप को बेहतर ढंग से नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। बीपी नियंत्रण में रहने से दिल और रक्त वाहिकाओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम करने में सहायता मिलती है। हालांकि, हर मरीज में दवा का असर एक जैसा नहीं होता। उम्र, दूसरी बीमारियां, इस्तेमाल की जा रही दवाएं और जीवनशैली जैसे कारक भी रक्तचाप को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए मरीजों के लिए जरूरी है कि वे समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर जांचें और डॉक्टर के साथ उसकी रीडिंग साझा करें। केवल कभी-कभार बीपी मापने के बजाय नियमित निगरानी से यह समझने में मदद मिलती है कि उपचार सही दिशा में काम कर रहा है या उसमें बदलाव की जरूरत है।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम में 11 प्रतिशत तक की कमी
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिल से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को लेकर सामने आया। शोधकर्ताओं ने दिल का दौरा पड़ने, स्ट्रोक होने, इस्केमिक हृदय रोग और हार्ट फेल्योर जैसी स्थितियों का आकलन किया। इस्केमिक हृदय रोग में दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जबकि हार्ट फेल्योर ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता।
विश्लेषण के मुताबिक, नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले मरीजों में गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 11 प्रतिशत तक कम पाया गया। इसके उलट, जिन मरीजों ने दवा लेने में कम नियमितता दिखाई, उनके समूह में जोखिम कम होने का अंतर सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था।
इसका अर्थ यह है कि दवा लेने की नियमित आदत इलाज के अपेक्षित लाभ को हासिल करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, 11 प्रतिशत का आंकड़ा समूहों के बीच देखा गया जोखिम संबंधी अंतर बताता है। इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर मरीज का व्यक्तिगत खतरा निश्चित रूप से 11 प्रतिशत कम हो जाएगा। वास्तविक लाभ मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करता है।
बीपी सामान्य होने पर भी खुद से बंद न करें दवा
हाई ब्लड प्रेशर की एक बड़ी चुनौती यह है कि बहुत से मरीजों को लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। सिरदर्द, चक्कर या बेचैनी न होने पर उन्हें लग सकता है कि उनका रक्तचाप ठीक है। लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर बीपी का स्तर निर्धारित नहीं किया जा सकता।
कई बार दवा लेने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और मरीज इसी स्थिति को बीमारी ठीक होने का संकेत समझ लेते हैं। इसके बाद वे अपनी मर्जी से दवा लेना बंद कर देते हैं। ऐसा करने से रक्तचाप दोबारा बढ़ सकता है और दिल तथा रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
अगर दवा लेने के बाद चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या किसी अन्य तरह की परेशानी होती है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देनी चाहिए। चिकित्सक जरूरत के अनुसार खुराक, दवा का समय या उपचार का तरीका बदल सकते हैं। बिना सलाह के दवा छोड़ना, खुराक घटाना या दोहरी खुराक लेना सुरक्षित तरीका नहीं है।
नियमित दवा लेने की आदत कैसे बनाए रखें?
विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों के लिए दवा का नियमित सेवन आसान बनाना जरूरी है। इसके लिए इलाज की योजना को उनकी दिनचर्या और जरूरतों के मुताबिक व्यवस्थित किया जा सकता है। कुछ आसान उपाय इस दिशा में मददगार हो सकते हैं।
- दवा लेने का निश्चित समय तय करें: डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार दवा लेने का समय रोज एक जैसा रखने से खुराक छूटने की आशंका कम हो सकती है।
- अलार्म या रिमाइंडर का इस्तेमाल करें: मोबाइल फोन में रोज का अलार्म लगाना या दवा की याद दिलाने वाले रिमाइंडर का उपयोग करना उपयोगी हो सकता है।
- नियमित जांच कराएं: समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराएं और रीडिंग डॉक्टर को दिखाएं। इससे उपचार के असर का पता लगाने में मदद मिलती है।
- दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करें: दवा खत्म होने से पहले ही अगली खुराक का इंतजाम करें, ताकि इलाज में अनावश्यक रुकावट न आए।
- दवा से जुड़ी परेशानी साझा करें: यदि दवा महंगी होने, दुष्प्रभाव या दूसरी किसी वजह से नियमित सेवन में दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर से खुलकर बात करें।
एक गोली में कई दवाएं देने का विकल्प भी मददगार
अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों ने दवा के नियमित सेवन को बेहतर बनाने के लिए उपचार की प्रक्रिया को आसान करने पर जोर दिया। कुछ मरीजों को एक से अधिक दवाओं की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर उचित होने पर कई दवाओं के संयोजन वाली एक गोली देने पर विचार कर सकते हैं। इससे रोज अलग-अलग गोलियां लेने का बोझ कम हो सकता है।
इसी तरह, लंबे समय तक असर करने वाली दवाएं भी कुछ मरीजों के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकती हैं। हालांकि, किस मरीज के लिए कौन-सी दवा उपयुक्त है, यह उसकी स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय जरूरतों पर निर्भर करता है। मरीजों को खुद से दवा बदलने के बजाय डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
ESC कम्युनिकेशन कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर फेलिक्स महफूद ने भी इस बात पर जोर दिया कि हाई ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में दवा नियमित रूप से न लेना एक महत्वपूर्ण बाधा है। उन्होंने डॉक्टरों को सलाह दी कि वे मरीजों से बिना झिझक बातचीत करें, ताकि दवा लेने में आ रही समस्याओं की पहचान करके उनका समाधान किया जा सके।
दिल की सेहत के लिए जरूरी है लंबे समय तक सावधानी
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए दवा के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उपयोगी है। संतुलित भोजन, नमक का सीमित सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना रक्तचाप के प्रबंधन में मदद कर सकता है। धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित रखना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
फिर भी, जीवनशैली में सुधार को डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए। जिन मरीजों को बीपी की दवा लेने की सलाह दी गई है, उन्हें अपने चिकित्सक के निर्देशों के अनुसार उपचार जारी रखना चाहिए।
कुल मिलाकर, 91,339 लोगों के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण इस बात को रेखांकित करता है कि हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में नियमितता की अनदेखी नहीं की जा सकती। दवा लगातार लेने से रक्तचाप पर बेहतर नियंत्रण और गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। मरीजों को चाहिए कि वे दवा लेने की आदत बनाए रखें, नियमित जांच कराएं और किसी भी बदलाव से पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
(Photo : AI Generated)




