हरियाणा में कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों पर भाजपा की नजर, पदयात्राओं से चुनावी माहौल बनाने की तैयारी

हरियाणा में कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों पर भाजपा की नजर, पदयात्राओं से चुनावी माहौल बनाने की तैयारी

‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत सभी 10 लोकसभा क्षेत्रों में कार्यक्रमों की रूपरेखा; रोहतक से शुरुआत, 1 नवंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और 5 नवंबर को करनाल में अमित शाह होंगे शामिल

हरियाणा की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ अपने अभियान को नई दिशा देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार पार्टी बड़े स्तर पर जनसभाएं करने के साथ-साथ पदयात्राओं के माध्यम से भी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाएगी। भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत प्रदेश की सभी 10 लोकसभा सीटों को ध्यान में रखकर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। अभियान के केंद्र में कांग्रेस के वे क्षेत्र भी हैं, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके समर्थकों का लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है।

भाजपा की इस रणनीति को आगामी राजनीतिक मुकाबले की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी एक ओर कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर पदयात्राओं के जरिए अपने संगठन की सक्रियता और जमीनी पहुंच दिखाने की कोशिश भी करेगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सीधे लोगों के बीच पहुंचकर अभियान के मुद्दों को रखा जा सकता है और कार्यकर्ताओं को भी एक साझा कार्यक्रम के तहत सक्रिय किया जा सकता है।

रोहतक से अभियान को आगे बढ़ाने की रणनीति

भाजपा की रणनीति में रोहतक का चयन विशेष महत्व रखता है। हरियाणा दिवस यानी 1 नवंबर को रोहतक लोकसभा क्षेत्र में पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शामिल होंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता भी पदयात्रा में भाग लेंगी। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं की मौजूदगी से इस कार्यक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से अहम बनाया जा रहा है।

रोहतक लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा का संसदीय क्षेत्र है। इसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार भी माना जाता है। ऐसे में भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व यहां पदयात्रा में शामिल होकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेगा। पार्टी के लिए यह कार्यक्रम केवल कार्यकर्ताओं को एकत्र करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों को सामने लाने का अवसर भी होगा।

रोहतक में पदयात्रा के आयोजन से पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता पार्टी पदाधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा कर चुकी हैं। जिला कार्यालय में हुई बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, कार्यकर्ताओं की भागीदारी, संगठनात्मक समन्वय और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपने और आपसी तालमेल के साथ आयोजन को पूरा करने पर जोर दिया गया है।

हुड्डा परिवार के राजनीतिक आधार पर भाजपा का फोकस

हरियाणा की राजनीति में रोहतक और आसपास के क्षेत्र का लंबे समय से विशेष स्थान रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा का राजनीतिक प्रभाव और दीपेंद्र सिंह हुड्डा की संसदीय मौजूदगी इस क्षेत्र को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। भाजपा की ओर से यहां राष्ट्रीय अध्यक्ष की भागीदारी वाली पदयात्रा आयोजित करना इस बात का संकेत है कि पार्टी अपने अभियान को उन क्षेत्रों तक भी ले जाना चाहती है, जहां कांग्रेस का प्रभाव रहा है।

पदयात्रा के दौरान भाजपा नेता लोकतंत्र, राजनीतिक जवाबदेही और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को जनता के सामने रखेंगे। पार्टी कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के साथ अपने पक्ष को भी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करेगी। हालांकि, अभियान के दौरान इन मुद्दों पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

भाजपा के लिए रोहतक में कार्यकर्ताओं की भागीदारी भी अहम रहेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम के जरिए पार्टी जिला और लोकसभा क्षेत्र स्तर के संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी। पदयात्रा में स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका के माध्यम से यह भी परखा जाएगा कि संगठन अपने कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर किस तरह संचालित कर रहा है।

5 नवंबर को करनाल में अमित शाह संभालेंगे मोर्चा

रोहतक के बाद भाजपा का अगला प्रमुख कार्यक्रम 5 नवंबर को करनाल में होगा। यहां केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह पदयात्रा में शामिल होंगे। करनाल लोकसभा क्षेत्र केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का संसदीय क्षेत्र है। इस क्षेत्र में अमित शाह की भागीदारी से अभियान को राष्ट्रीय नेतृत्व का समर्थन और राजनीतिक महत्व मिलेगा।

करनाल में पदयात्रा के जरिए भाजपा अपने अभियान के मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को भी गति देने की तैयारी में है। राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ नेता की मौजूदगी से पार्टी कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने और क्षेत्रीय स्तर पर अभियान को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

अमित शाह का 5 नवंबर को हरियाणा में यह एकमात्र कार्यक्रम नहीं होगा। इसी दिन वे अंबाला छावनी में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े शहीदी स्मारक का लोकार्पण भी करेंगे। इसके बाद गांधी मैदान में जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम है। इस तरह करनाल की पदयात्रा और अंबाला के कार्यक्रम के जरिए भाजपा एक ही दिन प्रदेश के दो अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां संचालित करेगी।

सभी 10 लोकसभा क्षेत्रों को अभियान से जोड़ने की तैयारी

भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान को केवल रोहतक और करनाल तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी की योजना प्रदेश की सभी 10 लोकसभा सीटों को इसके दायरे में लाने की है। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों में पदयात्राओं का आयोजन किया जाएगा और वरिष्ठ नेताओं को कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।

1 नवंबर को रोहतक के साथ फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में भी पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इसमें पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शामिल होंगे। इसके अलावा 5 नवंबर को करनाल में अमित शाह की पदयात्रा प्रस्तावित है। पार्टी नेतृत्व ने इन कार्यक्रमों के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

सभी लोकसभा क्षेत्रों में पदयात्राओं का आयोजन करने के पीछे संगठन को लगातार सक्रिय रखने की रणनीति भी मानी जा रही है। बड़े नेताओं के कार्यक्रमों के साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी क्षेत्रवार संपर्क बढ़ाना चाहती है। पदयात्राओं के दौरान स्थानीय मुद्दों को उठाने और लोगों से संवाद करने का अवसर भी मिलेगा।

वोट चोरी और एसआईआर के मुद्दे पर राजनीतिक जवाब की तैयारी

इस अभियान का एक प्रमुख राजनीतिक पहलू मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़ा विवाद है। कांग्रेस लगातार वोट चोरी के आरोप लगाते हुए मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। भाजपा अपने अभियान के माध्यम से इन आरोपों का जवाब देने और इस मुद्दे पर अपना पक्ष जनता के सामने रखने की तैयारी में है।

इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले से जारी है। भाजपा अभियान के नाम और कार्यक्रमों के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तथा राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को उठाने की बात कह रही है। वहीं कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची से जुड़े आरोप और सवाल सामने रखे जा रहे हैं। ऐसे में पदयात्राओं के दौरान इन मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है।

भाजपा के लिए यह अभियान संगठनात्मक शक्ति के प्रदर्शन का भी अवसर है। प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित करने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और नेताओं के बीच समन्वय मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

जनसभाओं के साथ पदयात्राओं पर जोर

राजनीतिक दल आमतौर पर बड़े नेताओं की जनसभाओं के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाते हैं, लेकिन भाजपा इस अभियान में पदयात्राओं को भी प्रमुखता दे रही है। पदयात्रा के जरिए नेता और कार्यकर्ता सीधे लोगों के बीच पहुंच सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर संवाद और संगठनात्मक संपर्क को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है।

रोहतक में नितिन नबीन, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता की भागीदारी तथा करनाल में अमित शाह का कार्यक्रम इसी रणनीति का हिस्सा है। फरीदाबाद में धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी से अभियान को एक साथ कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की तैयारी है।

आने वाले दिनों में इन पदयात्राओं के माध्यम से भाजपा किन मुद्दों को प्रमुखता देती है और कांग्रेस की ओर से उनका क्या जवाब आता है, इस पर प्रदेश की राजनीति में नजर रहेगी। फिलहाल पार्टी का जोर कार्यक्रमों की तैयारी, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और सभी 10 लोकसभा क्षेत्रों तक अभियान को पहुंचाने पर है। रोहतक से होने वाली शुरुआत को इस पूरी रणनीति का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।