हरियाणा में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव, अब कॉन्ट्रैक्ट अवधि वाले कर्मचारियों को भी मिलेगी ग्रेच्युटी

हरियाणा में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव, अब कॉन्ट्रैक्ट अवधि वाले कर्मचारियों को भी मिलेगी ग्रेच्युटी

हरियाणा सरकार ने राज्य में कर्मचारियों, श्रमिकों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार की ओर से ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (हरियाणा) रूल्स-2026’ का ड्राफ्ट जारी किया गया है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ उपलब्ध कराने के साथ-साथ श्रम कानूनों की प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।

ड्राफ्ट नियमों में ग्रेच्युटी, फिक्स्ड टर्म रोजगार, संस्थानों के ऑनलाइन पंजीकरण, महिला कर्मचारियों के रिकॉर्ड, मातृत्व लाभ, भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। यदि प्रस्तावित नियम अंतिम रूप से लागू होते हैं, तो इनका असर हरियाणा में काम करने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर पड़ सकता है।

सरकार ने ड्राफ्ट पर आम नागरिकों, श्रमिक संगठनों, उद्योग जगत और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके लिए 45 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। यानी अंतिम नियम लागू होने से पहले प्रस्तावित प्रावधानों में बदलाव या संशोधन की संभावना भी बनी हुई है।

फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक साल बाद ग्रेच्युटी का प्रस्ताव

ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक निश्चित अवधि यानी फिक्स्ड टर्म रोजगार पर काम करने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पात्रता से जुड़ा है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ऐसे कर्मचारी यदि एक वर्ष की सेवा पूरी कर लेते हैं तो वे ग्रेच्युटी के लाभ के पात्र हो सकते हैं।

फिक्स्ड टर्म कर्मचारी वे होते हैं जिन्हें किसी निश्चित अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। कई कंपनियां किसी विशेष प्रोजेक्ट, सीमित अवधि के काम या निर्धारित कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। ऐसे रोजगार में कर्मचारी की सेवा अवधि पहले से तय होती है।

प्रस्तावित नियमों से इस श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनका रोजगार किसी प्रोजेक्ट या निश्चित अवधि के अनुबंध के कारण लंबे समय तक जारी नहीं रहता।

छह महीने से अधिक अतिरिक्त सेवा पर मिलेगा अतिरिक्त वर्ष का लाभ

ड्राफ्ट में सेवा अवधि की गणना को लेकर भी एक महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यदि कर्मचारी ने छह महीने से अधिक अतिरिक्त सेवा की है, तो उस अवधि को एक अतिरिक्त वर्ष के रूप में गणना में शामिल करने का प्रावधान रखा गया है।

इसका सीधा असर ग्रेच्युटी की पात्रता और गणना पर पड़ सकता है। कई मामलों में कर्मचारी निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बेहद करीब होते हैं, लेकिन कुछ महीनों की कमी के कारण उन्हें लाभ नहीं मिल पाता। प्रस्तावित व्यवस्था ऐसी परिस्थितियों में पात्रता की गणना को अधिक स्पष्ट बना सकती है।

हालांकि, अंतिम नियम लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सेवा अवधि की गणना किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

ग्रेच्युटी के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

हरियाणा सरकार ने ग्रेच्युटी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। नए नियम लागू होने पर कर्मचारी, उनके नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ग्रेच्युटी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

कुछ परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट के जरिए आवेदन करने का विकल्प भी उपलब्ध रहने का प्रस्ताव है। डिजिटल आवेदन प्रक्रिया से कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है और आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक करना भी आसान हो सकता है।

सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को उनके अधिकारों से जुड़े लाभ प्राप्त करने के लिए एक सरल व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

ग्रेच्युटी आवेदन की समयसीमा भी निर्धारित

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, ग्रेच्युटी देय होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आवेदन करने का प्रावधान रखा गया है। इससे कर्मचारियों को समय पर आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

हालांकि, व्यवहार में कई कर्मचारी अपनी ग्रेच्युटी पात्रता या आवेदन प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते। ऐसे में नियोक्ताओं और श्रम विभाग के लिए जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि पात्र कर्मचारी समयसीमा और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहें।

वेतन की गणना को लेकर भी प्रस्तावित बदलाव

ड्राफ्ट नियमों में वेतन की परिभाषा को लेकर भी कई प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इसके तहत मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति, स्टॉक ऑप्शन, क्रेच अलाउंस, इंटरनेट और टेलीफोन रिइंबर्समेंट तथा मील वाउचर जैसे कुछ लाभों को वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

ऐसे प्रावधानों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ग्रेच्युटी जैसे लाभों की गणना में वेतन की परिभाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी कर्मचारी के वेतन पैकेज में कई प्रकार के भत्ते और सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी होता है कि किन भुगतान को वेतन का हिस्सा माना जाएगा और किन्हें अलग रखा जाएगा।

प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है।

पुराने श्रम नियमों को समाप्त करने का प्रस्ताव

सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत नए नियम लागू होने के बाद राज्य में कई पुराने श्रम कानूनों और नियमों को समाप्त या प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव है। इनमें ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ, असंगठित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकारों से जुड़े पुराने नियम शामिल हैं।

इस बदलाव का उद्देश्य अलग-अलग कानूनों और नियमों को एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत लाना है। इससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, संक्रमण के दौरान कंपनियों और श्रमिकों को नए नियमों को समझने और उनके अनुसार प्रक्रियाओं को बदलने की आवश्यकता होगी।

सभी संस्थानों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा

ड्राफ्ट में औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य संबंधित संस्थानों के पंजीकरण को डिजिटल बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अनुसार संस्थानों को श्रम विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आवेदन पूरा होने के सात दिनों के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की बात कही गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर प्रमाणपत्र जारी नहीं होता है, तो कुछ परिस्थितियों में पंजीकरण को स्वतः स्वीकृत माना जा सकता है।

इस व्यवस्था से कंपनियों को पंजीकरण के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही ऑनलाइन रिकॉर्ड के कारण सरकारी विभागों के लिए संस्थानों की निगरानी और अनुपालन की जानकारी जुटाना भी आसान हो सकता है।

24 महीने तक रिपोर्ट नहीं देने पर रजिस्ट्रेशन समाप्त होने का प्रस्ताव

ड्राफ्ट में संस्थानों के अनुपालन से जुड़े नियमों को भी सख्त बनाने की बात कही गई है। प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार यदि कोई संस्थान लगातार 24 महीने तक पोर्टल पर जरूरी अनुपालन रिपोर्ट जमा नहीं करता है, तो उसका पंजीकरण स्वतः समाप्त माना जा सकता है।

इसके अलावा गलत जानकारी देकर पंजीकरण प्राप्त करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान प्रस्तावित है। गंभीर मामलों में संबंधित संस्थान का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजीकृत संस्थान केवल कागजों पर मौजूद न रहें, बल्कि श्रम और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों का नियमित रूप से पालन भी करें।

महिला कर्मचारियों के रिकॉर्ड के लिए विशेष प्रावधान

महिला कर्मचारियों से जुड़े रोजगार रिकॉर्ड को लेकर भी ड्राफ्ट में विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। नियोक्ताओं को निर्धारित फॉर्म में महिला कर्मचारियों से संबंधित आवश्यक जानकारी का रिकॉर्ड रखने की बात कही गई है।

इसमें नियुक्ति, काम की प्रकृति, मातृत्व से संबंधित जानकारी, मातृत्व लाभ और मेडिकल अवकाश जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे रिकॉर्ड का उद्देश्य कर्मचारियों को मिलने वाले वैधानिक लाभों की निगरानी और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

हालांकि, ऐसे संवेदनशील रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना भी नियोक्ताओं की जिम्मेदारी होगी। कर्मचारियों की निजी और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का इस्तेमाल केवल वैध प्रशासनिक और कानूनी उद्देश्यों के लिए किया जाना आवश्यक होगा।

मातृत्व लाभ से जुड़े मामलों में अपील की व्यवस्था

प्रस्तावित नियमों में मातृत्व लाभ से जुड़े मामलों में अपील प्रक्रिया को भी स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर के आदेश से असंतुष्ट पक्ष संबंधित डिप्टी लेबर कमिश्नर के समक्ष अपील कर सकेगा।

इससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को विवाद की स्थिति में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। अपील की स्पष्ट व्यवस्था होने से श्रम विवादों को अधिक व्यवस्थित तरीके से निपटाने में मदद मिल सकती है।

कर्मचारी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार सहायता का प्रस्ताव

ड्राफ्ट में कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अंतिम संस्कार सहायता से संबंधित प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत न्यूनतम 20 हजार रुपये की सहायता राशि जमा कराने का प्रावधान रखा गया है, जिसे भविष्य में बढ़ाया भी जा सकता है।

ऐसी सहायता का उद्देश्य कर्मचारी के परिवार को कठिन समय में तत्काल आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। हालांकि, इसके लिए पात्रता, भुगतान प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े विस्तृत नियम अंतिम अधिसूचना में स्पष्ट किए जा सकते हैं।

भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने की तैयारी

प्रस्तावित नियमों में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए भी प्रावधान शामिल किए गए हैं। नियोक्ताओं को किसी रिक्त पद की जानकारी इंटरव्यू या आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 15 दिन पहले संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

इससे नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवारों को रिक्तियों की जानकारी समय पर मिल सकती है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक महीने के भीतर परिणाम ऑनलाइन साझा करने का भी प्रस्ताव है। इससे उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के परिणाम की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

कर्मचारियों के रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखने होंगे

ड्राफ्ट नियमों के तहत कंपनियों और प्रतिष्ठानों को कर्मचारियों की हाजिरी, वेतन, ओवरटाइम और वेतन से संबंधित कटौती जैसे रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखने होंगे।

इन दस्तावेजों को हिंदी या अंग्रेजी भाषा में सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है। साथ ही संबंधित रिकॉर्ड को कम से कम पांच वर्षों तक संरक्षित रखने की आवश्यकता होगी।

डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था से कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को लाभ हो सकता है। विवाद की स्थिति में पुराने रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध कराए जा सकेंगे और श्रम विभाग के लिए भी जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।

उद्योगों और कंपनियों के लिए अनुपालन की नई चुनौती

नए नियमों से कर्मचारियों को अधिक सामाजिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, लेकिन कंपनियों और उद्योगों के लिए अनुपालन से जुड़ी कुछ नई जिम्मेदारियां भी बढ़ सकती हैं।

नियोक्ताओं को डिजिटल पोर्टल पर समय पर जानकारी अपडेट करनी होगी, कर्मचारियों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे और भर्ती प्रक्रिया से संबंधित निर्धारित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी।

इसके अलावा ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना में नए नियमों को समझना भी जरूरी होगा। विशेष रूप से फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों की पात्रता से जुड़े बदलावों के कारण कंपनियों को अपने मानव संसाधन और वेतन संबंधी सिस्टम में आवश्यक संशोधन करने पड़ सकते हैं।

श्रमिकों के लिए जागरूकता भी होगी जरूरी

किसी भी सामाजिक सुरक्षा कानून का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब कर्मचारियों को अपने अधिकारों और पात्रता की जानकारी हो। प्रस्तावित नियमों के लागू होने के बाद श्रमिकों को यह समझना होगा कि वे किन परिस्थितियों में ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के पात्र हैं।

इसी तरह, कर्मचारियों को अपने रोजगार रिकॉर्ड, वेतन पर्ची और सेवा अवधि से जुड़े दस्तावेज भी सुरक्षित रखने चाहिए। डिजिटल व्यवस्था के बावजूद व्यक्तिगत रिकॉर्ड भविष्य में किसी विवाद या दावे की स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ड्राफ्ट पर 45 दिनों तक दिए जा सकेंगे सुझाव

हरियाणा सरकार ने प्रस्तावित नियमों को अंतिम रूप देने से पहले आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके लिए 45 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है।

इस दौरान कर्मचारी संगठन, ट्रेड यूनियन, उद्योग संघ, कंपनियां और आम नागरिक प्रस्तावित नियमों के अलग-अलग प्रावधानों पर अपनी राय दे सकते हैं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद सरकार नियमों में आवश्यक बदलाव कर सकती है।

इसलिए वर्तमान में जारी ड्राफ्ट को अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से प्रावधान किस स्वरूप में लागू किए जाते हैं और उनकी प्रभावी तिथि क्या होगी।