Haryana रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी 32 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे प्रदेशव्यापी हड़ताल के साथ रोडवेज बसों का चक्का जाम करने जैसे बड़े कदम उठा सकते हैं। इस संबंध में दादरी बस स्टैंड परिसर में आयोजित दो दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनकी मांगों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पिछले लंबे समय से सरकार और विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार ज्ञापन सौंपे गए, बैठकों में मांगें रखी गईं और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन अभी तक अधिकांश मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
सांकेतिक भूख हड़ताल के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो आगामी दिनों में आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति संयुक्त रूप से तैयार की जाएगी ताकि सभी कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रख सकें।
दादरी बस स्टैंड पर दो दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल
दादरी बस स्टैंड परिसर में आयोजित दो दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल में बड़ी संख्या में रोडवेज कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व एसकेएस के प्रधान कृष्ण ऊण ने किया। इस दौरान कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया और सरकार से जल्द समाधान की अपील की।
हड़ताल के समापन अवसर पर हरियाणा रोडवेज सांझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य एवं महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र दिनोद तथा रणबीर गहलौत सहित कई कर्मचारी नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा, लेकिन यदि लगातार अनदेखी होती रही तो कर्मचारी बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए भी तैयार हैं।
सरकार को दिया गया स्पष्ट अल्टीमेटम
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार को पहले भी कई बार समय दिया गया, लेकिन समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। उनका कहना है कि अब कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए और सरकार को जल्द वार्ता कर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। इस दौरान हड़ताल, प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा सकता है।
32 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी
रोडवेज कर्मचारियों का कहना है कि उनकी 32 सूत्रीय मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इनमें विभागीय ढांचे को मजबूत बनाने, कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा, सेवा शर्तों में सुधार और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों का उद्देश्य केवल कर्मचारियों के हित तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाना भी है। उनका मानना है कि यदि विभाग को पर्याप्त संसाधन और मानवबल उपलब्ध कराया जाए तो यात्रियों को भी बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।
इलेक्ट्रिक बसों, नई साधारण बसों की खरीद, कर्मचारियों के नियमितीकरण और निजी परमिट नीति सहित कई मुद्दों पर सरकार से निर्णय की मांग
कर्मचारी संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों में रोडवेज बेड़े को मजबूत बनाने और विभागीय संरचना में सुधार पर विशेष जोर दिया है। उनका कहना है कि परिवहन सेवाओं के विस्तार के लिए पर्याप्त संख्या में सरकारी बसें उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके और विभाग की कार्यक्षमता भी बढ़े।
10 हजार साधारण बसें शामिल करने की मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में रोडवेज बेड़े में 10 हजार नई साधारण बसें शामिल करना भी शामिल है। उनका कहना है कि कई रूटों पर बसों की संख्या कम होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि नए वाहन शामिल किए जाते हैं तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हो सकती है।
कर्मचारी नेताओं का मानना है कि बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए बसों का विस्तार समय की आवश्यकता है। इससे विभाग की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
इलेक्ट्रिक बसों को लेकर कर्मचारियों की आपत्तियां
कर्मचारी संगठनों ने इलेक्ट्रिक बसों से जुड़े कुछ मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। उनका कहना है कि इस विषय पर सरकार को कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा करनी चाहिए तथा भविष्य की परिवहन नीति बनाते समय सभी पक्षों के सुझावों पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले रोडवेज कर्मचारियों के हितों और विभागीय आवश्यकताओं का समुचित मूल्यांकन किया जाए।
कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग
रोडवेज कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण मांग लंबे समय से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की भी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को स्थायी सेवा का लाभ मिलना चाहिए ताकि उन्हें नौकरी की सुरक्षा और अन्य वैधानिक सुविधाएं प्राप्त हो सकें।
उन्होंने कहा कि नियमितीकरण से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और विभाग की कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
निजी बसों के परमिट नीति पर भी उठाए सवाल
कर्मचारी संगठनों ने निजी बसों को परमिट देने की नीति पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी रोडवेज सेवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इस विषय पर उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने और रोडवेज के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
उनका कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए सभी निर्णय व्यापक अध्ययन और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही लिए जाने चाहिए।
8 जून को परिवहन मंत्री के निवास का घेराव करने की घोषणा
हरियाणा रोडवेज सांझा मोर्चा के नेताओं ने बताया कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो 8 जून को परिवहन मंत्री के निवास का घेराव किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार उसी दिन साझा मोर्चा की कार्यकारिणी की बैठक भी आयोजित की जाएगी, जिसमें आगामी आंदोलन की विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी।
संयुक्त मोर्चा करेगा आगे की रणनीति तय
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि भविष्य के सभी कार्यक्रम संयुक्त रूप से तय किए जाएंगे। विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कर आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो प्रदेशव्यापी हड़ताल, प्रदर्शन और बसों के चक्का जाम जैसे कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिया जा सकता है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है, लेकिन यदि लंबे समय तक उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल कर्मचारी संगठन सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित वार्ता पर नजर बनाए हुए हैं।




