जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, बोले- हिमाचल में विकास नहीं, जनता पर शुल्क बढ़ाना बना गवर्नेंस मॉडल

जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला, बोले- हिमाचल में विकास नहीं, जनता पर शुल्क बढ़ाना बना गवर्नेंस मॉडल

होटलों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहमति शुल्क में बढ़ोतरी पर जताया विरोध, कहा- छोटे कारोबारियों और पर्यटन उद्योग पर डाला जा रहा आर्थिक बोझ; दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की रैली को बताया फ्लॉप, मुख्यमंत्री पर भी कसा तंज

शिमला। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में विकास और जनकल्याण के बजाय जनता तथा कारोबारियों पर नए-नए शुल्क लगाने की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार को ‘शुल्क की सरकार’ करार देते हुए कहा कि मौजूदा शासन व्यवस्था में आम लोगों को राहत देने के बजाय उन पर आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है।

जयराम ठाकुर ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से होटलों के संचालन के लिए सहमति शुल्क के ढांचे में की गई बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार का गवर्नेंस मॉडल अब जनता से अलग-अलग माध्यमों से शुल्क वसूलने तक सीमित होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में काम कर रहे छोटे और मध्यम कारोबारियों को भी सरकार की नीतियों के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, होटल उद्योग पहले ही कई तरह की आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में शुल्क बढ़ाने का फैसला कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के हजारों परिवार होटल, होम स्टे, रेस्तरां, टैक्सी, ट्रैवल कारोबार और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में सरकार को इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और कारोबारियों को सुविधाएं देने की नीति अपनानी चाहिए, लेकिन इसके विपरीत नए शुल्क लगाकर उनकी लागत बढ़ाई जा रही है।

टॉयलेट टैक्स के बाद अब कारोबारियों पर नए शुल्क का आरोप

जयराम ठाकुर ने सरकार की पिछली नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि टॉयलेट टैक्स जैसे फैसले के कारण सरकार को पहले ही काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद भी सरकार ने अपनी कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया और अलग-अलग क्षेत्रों में नए शुल्क लगाने का सिलसिला जारी रखा।

उन्होंने कहा कि कभी पर्यटकों की गाड़ियों पर टैक्स लगाने की बात सामने आती है तो कभी स्कूल-कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी कर दी जाती है। इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी का बोझ भी आम परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व जैसे सामान्य कार्यों के लिए तहसीलों में जाने वाले लोगों से भी भारी फीस वसूली जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, सरकार की ओर से इस तरह के फैसले लेने से आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतें महंगी हो रही हैं। मध्यम वर्ग, गरीब परिवारों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे कारोबारियों को इसका सीधा असर झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किस प्रकार के आर्थिक प्रबंधन के तहत जनता पर लगातार नए वित्तीय बोझ डाल रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए खर्चों का प्रबंधन करना चाहिए और गैरजरूरी व्यय पर नियंत्रण लगाना चाहिए। इसके बजाय आम लोगों और कारोबारियों से शुल्क वसूलकर सरकारी खजाना भरने की कोशिश की जा रही है।

वित्तीय विफलताओं का बोझ जनता पर डाल रही सरकार : जयराम

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है, जिनका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने खर्चों में कटौती करने, वित्तीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और आर्थिक प्रबंधन को मजबूत बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की प्राथमिकता जनता को सुविधाएं देना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होना चाहिए। लेकिन हिमाचल में छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों को नए-नए शुल्कों के माध्यम से आर्थिक दबाव में डाला जा रहा है। इससे प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन गतिविधियों पर निर्भर करती है। राज्य के विभिन्न जिलों में होटल, होम स्टे और छोटे पर्यटन व्यवसाय स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। यदि इन कारोबारों पर लगातार शुल्क बढ़ाए जाएंगे तो इसका असर अंततः पर्यटकों पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि छोटे होटल संचालकों के लिए बड़े प्रतिष्ठानों की तरह अतिरिक्त खर्च उठाना आसान नहीं होता। ऐसे में सरकार को शुल्क निर्धारित करते समय कारोबार के आकार, आर्थिक क्षमता और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए। बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के शुल्क बढ़ाने से पर्यटन कारोबार प्रभावित हो सकता है।

भाजपा ने दी आंदोलन की चेतावनी

जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार के इस फैसले का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार होटल संचालन से जुड़े सहमति शुल्क में की गई बढ़ोतरी पर तुरंत पुनर्विचार करे और छोटे तथा मध्यम कारोबारियों को राहत प्रदान करे।

उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाले फैसलों को स्वीकार नहीं करेगी। यदि सरकार ने अपने निर्णय में बदलाव नहीं किया तो पार्टी सड़क से लेकर हर राजनीतिक मंच तक इसका विरोध करेगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन कारोबार को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों के खिलाफ भाजपा कारोबारियों के साथ खड़ी रहेगी। सरकार को यह समझना चाहिए कि पर्यटन क्षेत्र केवल बड़े होटल कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों छोटे व्यवसायी और स्थानीय परिवार जुड़े हुए हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए कारोबारियों को राहत देना जरूरी है। सरकार को शुल्क बढ़ाने के बजाय ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिनसे हिमाचल में पर्यटन निवेश बढ़े और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके।

दिल्ली की विपक्षी रैली को जयराम ने बताया फ्लॉप

हिमाचल सरकार पर निशाना साधने के साथ ही जयराम ठाकुर ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी के आह्वान पर चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित इस रैली को फ्लॉप करार दिया।

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तंज कसते हुए कहा कि वह अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गाड़ियों में भर-भरकर दिल्ली ले गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी पूरी तैयारी बिखर गई। उनके अनुसार, रामलीला मैदान में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई और रैली का आयोजन कांग्रेस की उम्मीदों के अनुरूप सफल नहीं रहा।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री को अधिक से अधिक लोगों को रैली में शामिल करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाए। जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को रैली के मंच से बोलने तक का अवसर नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर हिमाचल के नेतृत्व की राजनीतिक स्थिति को भी दर्शाता है। उनके अनुसार, कांग्रेस हाईकमान प्रदेश के नेताओं को वह महत्व नहीं देता, जिसकी उनसे अपेक्षा की जाती है।

कांग्रेस हाईकमान पर भी साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास देश में गिने-चुने दो-तीन मुख्यमंत्री ही हैं, इसके बावजूद हिमाचल के मुख्यमंत्री को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुक्खू प्रदेश के मंत्रियों और कार्यकर्ताओं को लेकर दिल्ली पहुंचे, लेकिन वहां उनकी राजनीतिक भूमिका सीमित ही रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के भीतर आपसी समन्वय और प्रदेश के नेताओं को महत्व देने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, रैली में भीड़ और मुख्यमंत्री को मंच पर बोलने का अवसर नहीं मिलने संबंधी जयराम ठाकुर के बयान राजनीतिक आरोपों के रूप में सामने आए हैं। भाजपा नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति और केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रदेश नेतृत्व के संबंधों से जोड़कर पेश किया।

सराज में संगठन मजबूत करने के लिए की बैठक

दिल्ली की रैली पर टिप्पणी और प्रदेश सरकार पर हमले के बाद जयराम ठाकुर अपने विधानसभा क्षेत्र सराज में संगठनात्मक गतिविधियों में भी शामिल हुए। दोपहर बाद उन्होंने ग्राम केंद्र शंकर देहरा के अंतर्गत सनोई और कांडीधार बूथ की संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में स्थानीय भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान पार्टी संगठन के विस्तार, बूथ स्तर पर गतिविधियों को मजबूत बनाने और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।

जयराम ठाकुर ने संगठन की मजबूती के लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत उसका जमीनी संगठन होता है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के साथ निरंतर संपर्क से ही पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर सकती है।

बैठक में स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और पार्टी की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

सरकार की नीतियों को लेकर राजनीतिक टकराव तेज होने के आसार

जयराम ठाकुर के ताजा बयानों से स्पष्ट है कि भाजपा आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों और शुल्क वृद्धि को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। खासकर होटल संचालन शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने पर्यटन कारोबारियों की चिंताओं को सामने रखकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है।

एक तरफ कांग्रेस सरकार के सामने प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजस्व बढ़ाने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका बोझ आम जनता और छोटे कारोबारियों पर डाल रही है। ऐसे में आने वाले समय में शुल्क वृद्धि, पर्यटन कारोबार और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

कुल मिलाकर, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक ही दिन में प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों से लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तक को निशाने पर लिया। उन्होंने जहां सुक्खू सरकार को शुल्क बढ़ाने वाली सरकार बताते हुए होटल कारोबारियों के पक्ष में आंदोलन की चेतावनी दी, वहीं दिल्ली की रैली को लेकर मुख्यमंत्री पर राजनीतिक तंज भी कसा। अब देखना होगा कि सरकार होटल संचालन सहमति शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष की मांग पर क्या रुख अपनाती है।