देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब होने के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हवा में घुले प्रदूषक धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा PM2.5 और PM10 कणों की होती है। ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। खासतौर पर PM2.5 के कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रक्त प्रवाह तक भी असर डाल सकते हैं।
ऐसे मौसम में केवल घर के दरवाजे बंद कर लेना या बाहर निकलते समय मुंह ढक लेना पर्याप्त नहीं है। हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी प्रदूषण के संपर्क को बढ़ा सकती हैं। कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां करते रहते हैं, जिनसे उनकी सेहत पर प्रदूषण का प्रभाव और ज्यादा हो सकता है। इसलिए AQI खराब होने पर अपनी दिनचर्या में बदलाव करना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी 5 आम गलतियों के बारे में, जिनसे बचकर आप प्रदूषित हवा के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।
1. घर में एयर प्यूरीफायर लगाकर बाहर की हवा को भूल जाना
प्रदूषण से बचाव के लिए आजकल कई लोग अपने घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने लगे हैं। यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षा देने वाला उपकरण समझना सही नहीं है। HEPA फिल्टर से लैस एयर प्यूरीफायर कमरे के अंदर मौजूद हवा में तैर रहे कई महीन प्रदूषण कणों को कम करने में मदद कर सकता है। इससे घर के अंदर सांस लेने के लिए अपेक्षाकृत साफ वातावरण तैयार किया जा सकता है।
हालांकि, इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। एयर प्यूरीफायर आपके घर के बाहर मौजूद प्रदूषण को खत्म नहीं कर सकता। जैसे ही आप बालकनी में जाते हैं, बाजार निकलते हैं या किसी खुले स्थान पर समय बिताते हैं, आप दोबारा प्रदूषित हवा के संपर्क में आ सकते हैं। इसके अलावा, यदि कमरे का आकार मशीन की क्षमता से ज्यादा है या फिल्टर की नियमित सफाई और बदलाव नहीं किया जाता, तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए एयर प्यूरीफायर को प्रदूषण से बचाव का एक हिस्सा मानें, संपूर्ण समाधान नहीं। घर से बाहर निकलते समय भी जरूरी सावधानियां बरतें और खराब AQI के दौरान खुले स्थानों पर ज्यादा देर तक रुकने से बचें।
2. खराब AQI के बावजूद सुबह की आउटडोर एक्सरसाइज जारी रखना
सुबह टहलना, पार्क में दौड़ना या साइकिल चलाना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन जब वातावरण में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ हो, तब यही अच्छी आदत नुकसान पहुंचा सकती है। बहुत से लोग अपनी फिटनेस रूटीन को लेकर इतने नियमित होते हैं कि खराब हवा के बावजूद सुबह की सैर या दौड़ना बंद नहीं करते।
दरअसल, जब हम दौड़ते हैं या कोई कठिन शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस दौरान हमारी सांस तेज और गहरी हो जाती है। सामान्य स्थिति की तुलना में हम ज्यादा मात्रा में हवा अंदर लेते हैं। यदि उस हवा में प्रदूषण के सूक्ष्म कण मौजूद हैं, तो उनके फेफड़ों तक पहुंचने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसलिए जब AQI बहुत खराब हो, तो बाहर की एक्सरसाइज को कुछ समय के लिए रोकना बेहतर है। इसके बजाय घर के अंदर योग, हल्की स्ट्रेचिंग, वर्कआउट या अन्य सुरक्षित गतिविधियां की जा सकती हैं। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो प्रदूषण का स्तर देखकर ही समय तय करें। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इस मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
3. प्रदूषण से बचने के लिए किसी भी तरह का मास्क पहन लेना
प्रदूषण बढ़ने पर लोग अक्सर अपने चेहरे को ढकने के लिए कपड़े का मास्क, रूमाल या सामान्य सर्जिकल मास्क इस्तेमाल करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि नाक और मुंह ढकने से जहरीले कण शरीर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। लेकिन हर तरह का मास्क वायु प्रदूषण से बचाव के लिए नहीं बनाया जाता।
PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण सामान्य कपड़े के मास्क और ढीले फिट वाले फेस कवर से आसानी से गुजर सकते हैं। सर्जिकल मास्क भी इन सूक्ष्म कणों से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते। ऐसे में केवल चेहरे पर कुछ पहन लेना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
यदि प्रदूषण के कारण बाहर निकलना जरूरी हो, तो अच्छी गुणवत्ता वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर विकल्प है। ध्यान रखें कि मास्क चेहरे पर ठीक से फिट होना चाहिए। नाक के आसपास या गालों के किनारे खाली जगह रहने पर प्रदूषित हवा अंदर जा सकती है। मास्क पहनते समय नाक और मुंह दोनों पूरी तरह ढके होने चाहिए।
इसके साथ ही मास्क को सही तरीके से इस्तेमाल करना भी जरूरी है। यदि वह गीला, गंदा या खराब हो गया है, तो उसे बदल दें। बच्चों के लिए मास्क का चयन करते समय उनकी उम्र और चेहरे के आकार के अनुसार सही फिटिंग का ध्यान रखें।
4. घर की खिड़कियां और दरवाजे गलत समय पर खुले रखना
हमारे घर के अंदर की हवा भी बाहर के प्रदूषण से प्रभावित हो सकती है। कई लोगों की आदत होती है कि वे पूरे दिन खिड़कियां खुली रखते हैं, ताकि कमरों में ताजी हवा आती रहे। सामान्य दिनों में यह आदत अच्छी हो सकती है, लेकिन जब बाहर AQI खराब हो, तब यही लापरवाही घर के अंदर प्रदूषण बढ़ा सकती है।
बाहर मौजूद धूल, धुआं और दूसरे प्रदूषक खुले दरवाजों और खिड़कियों के रास्ते कमरे में प्रवेश कर सकते हैं। खासतौर पर उस समय जब आसपास प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, घर में वेंटिलेशन के नाम पर खिड़कियां खुली रखना नुकसानदायक हो सकता है।
ऐसे दिनों में बाहर की हवा की गुणवत्ता पर नजर रखें। जब प्रदूषण ज्यादा हो, तो खिड़कियां और दरवाजे बंद रखना बेहतर है। यदि किसी समय हवा की गुणवत्ता में सुधार हो और बाहर का AQI अपेक्षाकृत कम हो, तो उस दौरान कुछ समय के लिए वेंटिलेशन किया जा सकता है।
घर के अंदर धूम्रपान, अगरबत्ती, मोमबत्ती और ऐसी गतिविधियों से भी बचना चाहिए, जिनसे धुआं या महीन कण पैदा होते हैं। नियमित सफाई करें और धूल को इकट्ठा न होने दें। इससे घर के अंदर प्रदूषण के अतिरिक्त स्रोतों को कम करने में मदद मिल सकती है।
5. खांसी और सांस की परेशानी को मौसम का सामान्य असर समझना
वायु प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को आंखों में जलन या गले में खराश महसूस होती है, जबकि दूसरे लोगों को लगातार खांसी, सांस फूलने या सीने में भारीपन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम या मौसम बदलने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
लेकिन प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में जलन और सूजन हो सकती है। अस्थमा के मरीजों में इसके कारण लक्षण बढ़ सकते हैं। जिन लोगों को पहले से फेफड़ों या दिल से जुड़ी बीमारी है, उनके लिए खराब हवा ज्यादा जोखिम पैदा कर सकती है।
अगर आपको लगातार खांसी आ रही है, सांस लेते समय घरघराहट सुनाई देती है, सीने में जकड़न महसूस होती है या सामान्य गतिविधियों के दौरान भी सांस फूलने लगती है, तो इसे हल्के में न लें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में तेज दर्द या होंठ नीले पड़ने जैसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
खास बात यह है कि प्रदूषण के कारण होने वाली परेशानी को सिर्फ घरेलू उपायों के भरोसे ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या सांस की कोई बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी दवाएं और जरूरी इनहेलर साथ रखना चाहिए।
AQI खराब होने पर इन बातों का भी रखें ध्यान
प्रदूषण से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ छोटे बदलाव इसके संपर्क को कम कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स नियमित रूप से चेक करें। AQI के स्तर के अनुसार ही बाहर निकलने और शारीरिक गतिविधियों का समय तय करें।
- सुबह और शाम के समय प्रदूषण की स्थिति देखकर ही मॉर्निंग वॉक या आउटडोर गतिविधियों की योजना बनाएं।
- प्रदूषण ज्यादा होने पर बच्चों को लंबे समय तक पार्क या खुले मैदान में खेलने से रोकें।
- घर में धूल जमा न होने दें और सफाई के लिए सूखे कपड़े के बजाय हल्के गीले कपड़े का इस्तेमाल करें।
- घर के अंदर सिगरेट, बीड़ी और अन्य धुएं वाले उत्पादों से दूरी बनाए रखें।
- बाहर निकलना जरूरी हो तो सही फिटिंग वाला N95 मास्क लगाएं।
- अस्थमा, हृदय रोग और सांस संबंधी परेशानियों से पीड़ित लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार विशेष सावधानी बरतें।
सिर्फ सावधानी से कम हो सकता है प्रदूषण का खतरा
वायु प्रदूषण ऐसी समस्या है, जिसका असर केवल कुछ दिनों की खांसी या गले की खराश तक सीमित नहीं रह सकता। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों और हृदय की सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसे केवल सर्दियों में होने वाली अस्थायी परेशानी समझना सही नहीं है।
सबसे जरूरी बात यह है कि प्रदूषण से बचाव के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर न रहें। सिर्फ मास्क पहनना, घर में एयर प्यूरीफायर लगाना या खिड़कियां बंद करना पर्याप्त नहीं है। इन सभी उपायों के साथ अपनी दिनचर्या में जरूरी बदलाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
AQI बढ़ने पर बाहर की गतिविधियां सीमित करें, घर के अंदर की हवा को साफ रखने की कोशिश करें और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें। थोड़ी-सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को प्रदूषण के गंभीर प्रभावों से बचाने में मदद कर सकती है।




