106 साल पुरानी पार्टी को मजबूत करने की बताई जरूरत, कहा- सुखबीर बादल के साथ बैठकर बातचीत से दूर हो सकते हैं मतभेद; पूरन सुरजीत अकाली दल के मिशन को पूरा नहीं कर पाने की भी स्वीकारोक्ति
पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में शिरोमणि अकाली दल को लेकर नई हलचल देखने को मिल सकती है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल में वापसी के संकेत देकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। उन्होंने न केवल अपनी पुरानी पार्टी को मजबूत करने की जरूरत बताई, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन की भी पुरजोर वकालत की है। उनके ताजा बयान को अकाली राजनीति में संभावित बदलाव और पुराने नेताओं के फिर से एक मंच पर आने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
एक सोशल मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में बीबी जागीर कौर ने कहा कि उन्होंने खुद कभी अकाली दल को नहीं छोड़ा। उनके मुताबिक, यदि वह सुखबीर सिंह बादल के साथ बैठकर बातचीत करती हैं तो संभव है कि दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेद दूर हो जाएं। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा समय में उनकी प्राथमिकता अलग राजनीतिक मंच को आगे बढ़ाने के बजाय 106 साल पुरानी अपनी मूल पार्टी को मजबूत करना है।
बीबी जागीर कौर के इस बयान के बाद अकाली दल में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने किसी औपचारिक वापसी या सुखबीर बादल के साथ बैठक की तारीख का ऐलान नहीं किया है, लेकिन बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की संभावना जताकर उन्होंने सियासी रास्ता खुला रखा है।
पूरन सुरजीत अकाली दल का मिशन पूरा नहीं कर पाए
साक्षात्कार के दौरान बीबी जागीर कौर ने पूरन सुरजीत अकाली दल के गठन और उसके उद्देश्य पर भी बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि जिस मिशन को लेकर इस राजनीतिक मंच की शुरुआत की गई थी, उसे पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि इस पार्टी को शुरू करने के पीछे कुछ उद्देश्य थे, लेकिन वे उन्हें हासिल करने में सफल नहीं हो पाए। यहां तक कि पूरन सुरजीत अकाली दल का पंजीकरण भी नहीं कराया जा सका।
उन्होंने कहा कि आज सभी को महसूस हो रहा है कि अकाली दल 106 साल पुरानी पार्टी है और इसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत करने की जरूरत है। उनके अनुसार, यह पार्टी पंजाब की राजनीति और सिख पंथ से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ लंबे समय से जुड़ी रही है। ऐसे में पुराने मतभेदों के कारण पार्टी की ताकत को बिखरने देना उचित नहीं होगा।
बीबी जागीर कौर की इस स्वीकारोक्ति को उनके राजनीतिक रुख में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक अलग राजनीतिक मंच के जरिए अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रही बीबी जागीर कौर ने जिस तरह मूल अकाली दल को मजबूत करने की बात कही है, उससे पार्टी में उनकी वापसी की संभावनाओं को बल मिला है।
सुखबीर बादल से बातचीत के जरिए दूर हो सकते हैं मतभेद
बीबी जागीर कौर ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कभी शिरोमणि अकाली दल को नहीं छोड़ा। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर रहे हैं, जिन्हें बातचीत के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे से दूरी बनाए रखेंगे तो मतभेद खत्म होने की संभावना कम हो जाएगी। इसके बजाय आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुखबीर सिंह बादल के साथ बैठक होने पर कई मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
उनका कहना था कि फिलहाल उद्देश्य अपनी मां पार्टी अकाली दल को मजबूत करना होना चाहिए। यदि सभी नेता अलग-अलग रहेंगे तो पार्टी की राजनीतिक ताकत प्रभावित होगी। इसलिए एक साथ बैठकर आगे का रास्ता निकालना जरूरी है।
बीबी जागीर कौर के इस रुख को अकाली दल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी लंबे समय से अंदरूनी मतभेदों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में पुराने नेताओं का फिर से साथ आना संगठन को मजबूती देने की दिशा में अहम हो सकता है। हालांकि, उनकी वापसी को लेकर अंतिम तस्वीर सुखबीर बादल और पार्टी नेतृत्व के साथ होने वाली संभावित बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगी।
अकाली दल-भाजपा गठबंधन की भी जोरदार वकालत
बीबी जागीर कौर ने बातचीत के दौरान शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने गठबंधन को पंजाब की राजनीति में मजबूती हासिल करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बताया। उनके अनुसार, यदि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो मजबूत सरकार बनाने की संभावना बन सकती है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि बादल केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत पंजाब के लिए अधिक से अधिक धनराशि लाने पर विशेष ध्यान देते थे। इसके लिए वह छह-सात अधिकारियों को अलग-अलग केंद्रीय योजनाओं के तहत फंड हासिल करने की जिम्मेदारी सौंपते थे।
बीबी जागीर कौर के मुताबिक, प्रकाश सिंह बादल की यह कार्यशैली बताती थी कि केंद्र के साथ बेहतर तालमेल होने से राज्य के विकास के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इसी आधार पर अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन की जरूरत पर जोर दिया।
उनके बयान से साफ है कि वह केवल अकाली दल के भीतर एकजुटता की पक्षधर नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को भी पंजाब के हितों से जोड़कर देख रही हैं। उनका मानना है कि गठबंधन की स्थिति में दोनों दल मिलकर अधिक प्रभावी ढंग से सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
2027 से पहले अकाली राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपनी रणनीति और संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में बीबी जागीर कौर का अकाली दल को मजबूत करने और भाजपा के साथ गठबंधन का समर्थन करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अकाली दल के सामने इस समय संगठन को एकजुट रखने, पुराने नेताओं को साथ लाने और राज्य की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करने की चुनौती है। पार्टी के लिए यह भी अहम होगा कि वह अपने पारंपरिक मतदाताओं और समर्थकों के बीच भरोसा दोबारा मजबूत करे। बीबी जागीर कौर जैसे पुराने और प्रभावशाली चेहरे का संभावित रूप से पार्टी के करीब आना इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बीबी जागीर कौर की सुखबीर सिंह बादल के साथ औपचारिक बातचीत कब होगी और क्या उनके बीच सभी पुराने मतभेद खत्म हो पाएंगे। इसी तरह अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर भी उनके बयान को उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक राय के रूप में देखा जाना चाहिए। दोनों दलों के नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही गठबंधन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल बीबी जागीर कौर के बयान ने पंजाब की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ उन्होंने अलग राजनीतिक मंच के मिशन को पूरा नहीं कर पाने की बात स्वीकार की है, वहीं दूसरी ओर अपनी मूल पार्टी को मजबूत करने के लिए साथ बैठने की इच्छा जताई है। यदि यह पहल आगे बढ़ती है तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।




