बाजवा आज ग्रेनेड बयान पर देंगे पुलिस को जवाब, चंडीगढ़ में Punjab कांग्रेस करेगी विरोध प्रदर्शन।

बाजवा आज ग्रेनेड बयान पर देंगे पुलिस को जवाब, चंडीगढ़ में Punjab कांग्रेस करेगी विरोध प्रदर्शन।

प्रताप सिंह बाजवा के 32 बमों वाले बयान पर विवाद, मोहाली साइबर थाने में दर्ज हुआ मामला

पंजाब की राजनीति में प्रताप सिंह बाजवा के एक बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंजाब कांग्रेस विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ मोहाली साइबर थाना में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई उनके उस बयान को लेकर की गई है, जिसमें उन्होंने पंजाब में 32 बम होने की बात कही थी।

मामला दर्ज होने के बाद प्रताप सिंह बाजवा मंगलवार दोपहर 2 बजे मोहाली पुलिस के सामने पेश होंगे। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर पंजाब कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी की ओर से चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। प्रदर्शन में कांग्रेस के विधायक, सांसद, पूर्व विधायक और जिला अध्यक्ष शामिल होंगे।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ दर्ज किया गया मामला राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाजवा से मांगा बयान का स्रोत

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रताप सिंह बाजवा को यह बताना चाहिए कि उन्हें बमों से जुड़ी जानकारी कहां से मिली। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी संवेदनशील जानकारी है तो उसे सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करना चाहिए।

सीएम मान ने कहा कि विपक्षी नेताओं को ऐसी जानकारी साझा करते समय जिम्मेदारी दिखानी चाहिए, क्योंकि इस तरह के बयान आम जनता में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जानकारी सही है तो उसका स्रोत सामने आना चाहिए और अगर गलत है तो लोगों में भ्रम फैलाने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के बयान पर बाजवा ने दिया जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह कह रहे हैं कि बाजवा अब वकील तलाश रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य पंजाब के हालात को लेकर चेतावनी देना था।

बाजवा ने कहा कि उन्होंने सरकार को एक संदेशवाहक के तौर पर जानकारी दी थी ताकि समय रहते सुरक्षा कदम उठाए जा सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय जानकारी देने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि उन्हें दर्ज एफआईआर की कॉपी भी अदालत के माध्यम से प्राप्त करनी पड़ी। बाजवा ने कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि मामले में पारदर्शिता जरूरी है।

कैसे शुरू हुआ 32 बमों का पूरा विवाद, पढ़ें घटनाक्रम

प्रताप सिंह बाजवा के एक टीवी इंटरव्यू के बाद यह विवाद शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया था कि पंजाब में बड़ी संख्या में ग्रेनेड पहुंचे हैं और इनमें से कुछ का इस्तेमाल हो चुका है, जबकि कुछ अभी बाकी हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर हलचल तेज हो गई।

टीवी इंटरव्यू में बाजवा के दावे से बढ़ा विवाद

13 अप्रैल को एक टीवी चैनल पर दिए गए इंटरव्यू में प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि पंजाब में 50 ग्रेनेड पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 18 का इस्तेमाल हो चुका है और 32 ग्रेनेड राज्य में अलग-अलग जगहों पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

इंटरव्यू से पहले इसका एक टीज़र सामने आया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। पुलिस ने उसी दिन शाम को मोहाली में बाजवा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। यह एफआईआर एक महिला पुलिस कर्मचारी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई।

इंटेलिजेंस टीम पहुंची थी बाजवा के घर

मामला सामने आने के बाद पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस टीम प्रताप सिंह बाजवा के चंडीगढ़ स्थित आवास पर पहुंची। अधिकारियों ने उनसे इस जानकारी के स्रोत के बारे में पूछताछ करने की कोशिश की।

रिपोर्ट के अनुसार, AIG काउंटर इंटेलिजेंस रवजोत ग्रेवाल के नेतृत्व में टीम सेक्टर-8 स्थित बाजवा के घर पहुंची। टीम करीब 15 मिनट तक वहां रही। इसके बाद अधिकारियों ने कहा कि बाजवा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल

इस मामले के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बाजवा के पास इतनी महत्वपूर्ण जानकारी थी तो उन्होंने इसे सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा क्यों नहीं किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी जानकारी राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के पास भी होनी चाहिए। उन्होंने बाजवा से पूछा कि उन्हें यह जानकारी किस माध्यम से मिली और इसका स्रोत क्या है।

सीएम मान ने यह भी कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि इस तरह के बयान जनता में डर का माहौल पैदा कर सकते हैं।

AAP नेताओं ने बनाया मुद्दा, कांग्रेस ने किया विरोध

मुख्यमंत्री के बयान के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर प्रताप सिंह बाजवा पर निशाना साधना शुरू कर दिया। वहीं, पंजाब कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बाजवा ने सरकार को चेताने का काम किया था और उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है। पार्टी ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया।

एफआईआर की कॉपी के लिए अदालत पहुंची बाजवा की टीम

पुलिस कार्रवाई के बाद प्रताप सिंह बाजवा को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया गया और निर्धारित समय पर उपस्थित होने के लिए कहा गया।

हालांकि, बाजवा पूछताछ में शामिल नहीं हुए। उनके वकीलों ने पुलिस के सामने पेश होकर समय मांगा। इसके बाद बाजवा की कानूनी टीम ने अदालत का रुख किया और एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की।

बाद में अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें एफआईआर की प्रति मिली। अब इस मामले में बाजवा का पुलिस के सामने पेश होना तय है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जांच पर नजर

प्रताप सिंह बाजवा के बयान के बाद पंजाब में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एक ओर सरकार सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और प्रमाण की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई बता रही है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। मामले में जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि बाजवा के दावे का आधार क्या था और उनके पास यह जानकारी किस माध्यम से पहुंची।

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