हरियाणा में 32 लाख परिवारों को फायदा:12वीं क्लास तक फीस में छूट, लकी ड्रा से एडमिशन

हरियाणा में 32 लाख परिवारों को फायदा:12वीं क्लास तक फीस में छूट, लकी ड्रा से एडमिशन

हरियाणा सरकार ने चिराग योजना का दायरा बढ़ाया, अब 8 लाख रुपये तक आय वाले परिवारों को मिलेगा लाभ

हरियाणा सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने वाली चिराग योजना में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने योजना के तहत पात्र परिवारों की वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के बड़ी संख्या में परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग के अनुसार, आय सीमा बढ़ने से करीब 32 लाख लोगों को योजना का लाभ मिल सकता है।

प्राथमिक शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने अधिकारियों को योजना के नए नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पात्र बच्चों को समय पर निजी स्कूलों में प्रवेश मिल सके।

चिराग योजना के माध्यम से सरकार दूसरी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों की फीस का भुगतान करती है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत सरकार फीस की राशि सीधे संबंधित निजी स्कूलों को देती है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होता है।

पहले इस योजना का लाभ केवल उन परिवारों को मिलता था, जिनकी वार्षिक आय 1.8 लाख रुपये तक थी। अब आय सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये किए जाने से अधिक संख्या में विद्यार्थी इसके दायरे में आ सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से अधिक बच्चों को अच्छे शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिलेगा।

क्या है हरियाणा की चिराग योजना और कैसे मिलता है लाभ

हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर देने के लिए चिराग योजना शुरू की थी। इस योजना से पहले ऐसे दाखिले नियम-134A के तहत किए जाते थे। बाद में सरकार ने नियम-134A को समाप्त कर उसकी जगह चिराग योजना लागू की।

इस योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाता है। सरकार निजी स्कूलों को विद्यार्थियों की निर्धारित फीस की प्रतिपूर्ति करती है। इससे उन बच्चों को भी बेहतर शिक्षा व्यवस्था में पढ़ने का अवसर मिलता है, जिनके परिवार निजी स्कूलों की फीस वहन करने में सक्षम नहीं होते।

कक्षा के अनुसार सरकार करती है फीस का भुगतान

चिराग योजना के तहत सरकार विद्यार्थियों की कक्षा के आधार पर निजी स्कूलों को फीस का भुगतान करती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार:

  • दूसरी कक्षा से पांचवीं कक्षा तक प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 700 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं।
  • छठी कक्षा से आठवीं कक्षा तक प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 900 रुपये प्रति माह फीस निर्धारित है।
  • नौवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 1100 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाता है।

फीस की यह राशि सीधे स्कूलों को भेजी जाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई लगातार जारी रखने में मदद मिलती है और अभिभावकों को फीस की चिंता कम होती है।

आवेदन प्रक्रिया में अभिभावक और विद्यार्थी दोनों कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन

चिराग योजना में शामिल होने के लिए विद्यार्थी या उनके अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। जिन निजी स्कूलों में योजना के तहत उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, वहां प्रवेश प्रक्रिया लकी ड्रॉ के माध्यम से पूरी की जाती है।

ड्रा प्रक्रिया अभिभावकों की मौजूदगी में आयोजित की जाती है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके। चयनित विद्यार्थियों के नाम स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित किए जाते हैं।

स्कूलों को तय समय सीमा में पूरी करनी होगी प्रवेश प्रक्रिया

सरकार ने चिराग योजना के तहत निजी स्कूलों के लिए भी समय सीमा निर्धारित की है। स्कूलों को आवेदन, चयन और प्रवेश प्रक्रिया को निर्धारित तारीखों के अनुसार पूरा करना होगा।

योजना के तहत शामिल होने वाले स्कूलों को विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। इसके बाद सरकार द्वारा तय फीस की राशि स्कूलों को उपलब्ध कराई जाएगी।

चिराग योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी शर्तें

योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों और उनके परिवारों को कुछ आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। केवल वही विद्यार्थी पात्र होंगे, जिन्होंने पिछली कक्षा की वार्षिक परीक्षा सरकारी स्कूल से पास की हो।

इसके अलावा विद्यार्थी के पास पिछले सरकारी स्कूल से जारी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (SLC) होना जरूरी है। परिवार पहचान पत्र (PPP) भी योजना के लिए अनिवार्य दस्तावेजों में शामिल है।

वहीं, जिन निजी स्कूलों को योजना के तहत फीस की प्रतिपूर्ति चाहिए, उन्हें शिक्षा विभाग की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केवल वही स्कूल योजना में शामिल विद्यार्थियों की फीस का दावा कर सकेंगे, जिन्होंने आवश्यक फॉर्म और दस्तावेज जमा किए होंगे।

सीट खाली रहने पर वेटिंग लिस्ट से मिलेगा प्रवेश

यदि पहली प्रवेश प्रक्रिया के बाद किसी स्कूल में सीट खाली रह जाती है, तो वेटिंग लिस्ट के विद्यार्थियों को मौका दिया जाएगा। खाली सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार पूरी की जाएगी।

वेटिंग लिस्ट के तहत चयनित विद्यार्थियों का दाखिला पूरा करने के बाद स्कूलों को सभी विद्यार्थियों की जानकारी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। इससे विभाग के पास योजना से जुड़े सभी विद्यार्थियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने की पहल

चिराग योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक कारणों से निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाते। आय सीमा बढ़ाने के बाद अब अधिक परिवार इस योजना से जुड़ सकेंगे।

शिक्षा क्षेत्र में सरकार की ऐसी योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना और उनकी पढ़ाई में आर्थिक बाधाओं को कम करना है। चिराग योजना के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में शिक्षा जारी रखने का अवसर मिल रहा है।

नई आय सीमा लागू होने के बाद शिक्षा विभाग ने अधिकारियों और स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब पात्र परिवार आवेदन प्रक्रिया पूरी कर योजना का लाभ लेने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।

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