हरियाणा सरकार ने प्रदेश को देश के बड़े औद्योगिक और निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी अगली रणनीति पर काम तेज कर दिया है। नई औद्योगिक नीतियां लागू करने के बाद अब सरकार का फोकस संभावित निवेशकों तक सीधे पहुंचने और बड़े औद्योगिक समूहों को हरियाणा में निवेश के लिए आकर्षित करने पर है। इसी कड़ी में अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से पहले देश के प्रमुख कारोबारी केंद्रों में रोड शो, निवेशक सम्मेलन और व्यक्तिगत बैठकों का सिलसिला शुरू किया जाएगा।
सरकार की योजना केवल निवेशकों को नीतियों और प्रोत्साहनों की जानकारी देने तक सीमित नहीं है। इसके बजाय निवेशकों के सामने हरियाणा में उपलब्ध जमीन, औद्योगिक आधारभूत ढांचा, तैयार परियोजनाओं, कनेक्टिविटी और समयबद्ध मंजूरियों की पूरी तस्वीर पेश करने की तैयारी है। सरकार चाहती है कि संभावित निवेशकों को यह भरोसा मिले कि निवेश प्रस्ताव को मंजूरी से लेकर परियोजना शुरू होने तक सरकारी विभागों के स्तर पर प्रक्रिया सरल और निर्धारित समय में पूरी की जाएगी।
इस पूरी निवेश रणनीति की निगरानी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्तर पर की जा रही है। मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल भी अभियान की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने से लेकर नई नीतियों के प्रावधानों को धरातल पर लागू करने तक की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हरियाणा सरकार ने हाल ही में ‘मेक इन हरियाणा’ औद्योगिक नीति और ‘हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति-2026’ लागू की हैं। सरकार का मानना है कि इन दोनों नीतियों के जरिए राज्य में औद्योगिक निवेश को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सकता है। अब इन्हीं नीतियों को निवेशकों के सामने प्रमुख आकर्षण के रूप में पेश करने की तैयारी है।
‘मेक इन हरियाणा’ नीति के तहत सरकार ने करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ लगभग 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना है। दूसरी ओर, एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति के जरिए करीब 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 5 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
दोनों नीतियों के लक्ष्यों को मिलाकर राज्य सरकार करीब 10.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और लगभग 15 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने की व्यापक योजना पर काम कर रही है। निवेशक बैठकों और रोड शो में सरकार इन्हीं लक्ष्यों के साथ हरियाणा की औद्योगिक क्षमता को सामने रखेगी।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन नीतियों को केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहने देना है। इसी वजह से विभागीय स्तर पर नीतियों के तहत उपलब्ध आर्थिक प्रोत्साहनों और अन्य सुविधाओं की विस्तृत योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर की निगरानी में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि निवेशकों को अलग-अलग मंजूरियों के लिए कई विभागों में भटकना न पड़े।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग भी नई नीतियों के तहत प्रोत्साहन योजनाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति में 37 आर्थिक और 23 सुविधा संबंधी बदलाव किए गए हैं। इन प्रावधानों को लागू करने के लिए अलग-अलग योजनाओं और प्रक्रियाओं को तैयार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक उद्योगपतियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता से जुड़ी प्रक्रिया को 20 अगस्त तक मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में संबंधित ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की तैयारी है।
सरकार का उद्देश्य निवेशकों के लिए आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और सरल बनाना है। इसके साथ ही आर्थिक प्रोत्साहनों का लाभ लेने की प्रक्रिया को भी कम जटिल करने की कोशिश की जा रही है। सरकार चाहती है कि उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
निवेश जुटाने के अभियान की शुरुआत मुंबई से होने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 23 से 25 अगस्त तक मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख लोगों और संभावित निवेशकों के साथ मुलाकात करेंगे। इस दौरान हरियाणा की नई औद्योगिक नीतियों, निवेश के अवसरों और सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को विस्तार से सामने रखा जाएगा।
23 अगस्त की शाम मुंबई में रोड शो आयोजित किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री उद्योगपतियों और कारोबारियों को हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं से अवगत कराएंगे। इसके बाद करीब 200 उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ डिनर बैठक प्रस्तावित है। इस दौरान निवेशकों के साथ अनौपचारिक संवाद के जरिए राज्य की निवेश क्षमता और उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
24 अगस्त को सुबह निवेशकों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग रखी गई है। इसमें लगभग 25 प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद दोपहर में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्लानरी सेशन आयोजित होगा। इसमें लगभग 250 उद्योगपतियों और कारोबारियों के भाग लेने की उम्मीद है। इस सत्र में राज्य की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे और संभावित परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।
इसी दिन शाम को मुख्यमंत्री उद्योग जगत के चुनिंदा प्रमुख लोगों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी करेंगे। इन वन-टू-वन बैठकों में लगभग 10 बड़े उद्योगपतियों के शामिल होने की संभावना है। इन मुलाकातों के जरिए सरकार संभावित बड़े निवेश प्रस्तावों पर सीधे चर्चा करने की कोशिश करेगी।
25 अगस्त को हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के साथ अलग-अलग बिजनेस मीटिंग करेंगे। लगभग 25 से 30 प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी समूहों के साथ होने वाली इन बैठकों में निवेश के संभावित क्षेत्रों, सरकारी सहायता और परियोजनाओं की आवश्यकताओं पर विस्तृत बातचीत की जाएगी। इसका उद्देश्य मुंबई रोड शो के बाद निवेशकों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना और संभावित प्रस्तावों को ठोस रूप देना होगा।
मुंबई के बाद सरकार की नजर देश के दो अन्य प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों बेंगलुरु और हैदराबाद पर है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में इन दोनों शहरों में भी रोड शो आयोजित करने की योजना है। बेंगलुरु और हैदराबाद का महत्व आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप, फार्मा, एयरोस्पेस और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बड़ी कंपनियों की मौजूदगी के कारण बढ़ जाता है।
सरकार चाहती है कि हरियाणा की औद्योगिक अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित न रहे। ऑटोमोबाइल और पारंपरिक विनिर्माण के साथ-साथ आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, फार्मास्यूटिकल्स, स्टार्टअप और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों को भी प्रदेश में बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए संभावित निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप राज्य में उपलब्ध सुविधाओं और नीतिगत प्रोत्साहनों को प्रस्तुत किया जाएगा।
घरेलू निवेश के साथ-साथ सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। इसके लिए कुछ देशों की पहचान की जा रही है, जहां हरियाणा की औद्योगिक क्षमता और नई नीतियों को लेकर निवेशकों की रुचि पैदा की जा सकती है। संभावना है कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भविष्य में चुनिंदा देशों का दौरा कर वहां के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करे।
विदेशी निवेश को लेकर उद्योग विभाग संभावित क्षेत्रों का अध्ययन करेगा। डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में विभाग यह आकलन करेगा कि किन क्षेत्रों की विदेशी कंपनियों को हरियाणा में निवेश के लिए आकर्षित किया जा सकता है और उनके लिए कौन से प्रोत्साहन प्रभावी साबित होंगे। इसके साथ विदेशी कंपनियों की जरूरत के अनुरूप जमीन, कनेक्टिविटी, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और मंजूरी व्यवस्था की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने निवेश रणनीति में स्टार्टअप और एमएसएमई को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। हरियाणा की स्टार्टअप नीति में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी को मौजूदा 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जाना है। इसके लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता में वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
सरकार का कहना है कि राज्य में निवेश का लाभ केवल बड़े औद्योगिक घरानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बड़े निवेश के साथ स्थानीय एमएसएमई, स्टार्टअप और छोटे उद्यमियों को भी नए कारोबारी अवसर मिलने चाहिए। इसी उद्देश्य से एमएसएमई और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नई नीति में कई प्रोत्साहन शामिल किए गए हैं।
हरियाणा सरकार के लिए अप्रैल 2027 में होने वाला ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ निवेश अभियान का बड़ा पड़ाव होगा। इससे पहले देश के विभिन्न औद्योगिक केंद्रों में होने वाली बैठकों के जरिए संभावित निवेशकों की पहचान, निवेश प्रस्तावों पर बातचीत और राज्य की नई नीतियों का प्रचार किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट शुरू होने से पहले ही निवेशकों के साथ पर्याप्त संवाद स्थापित हो और सम्मेलन में ठोस निवेश प्रस्ताव सामने आएं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार का जोर अब घोषणाओं से आगे बढ़कर निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने पर है। इसके लिए नीतियों के प्रावधानों को लागू करने, ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने, आर्थिक प्रोत्साहनों की प्रक्रिया तय करने और निवेशकों के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि सरकार अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है तो हरियाणा में औद्योगिक निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर भी बड़े पैमाने पर पैदा हो सकते हैं। फिलहाल मुंबई से शुरू होने वाला रोड शो अभियान इस व्यापक रणनीति की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। इसके बाद बेंगलुरु, हैदराबाद और संभावित विदेशी दौरे यह तय करेंगे कि हरियाणा अपनी नई औद्योगिक नीतियों के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को किस हद तक आकर्षित कर पाता है।




