उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2026 के दौरान पूछे गए एक विवादित प्रश्न को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक बहुविकल्पीय प्रश्न में दिए गए विकल्पों को लेकर अभ्यर्थियों, विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे गंभीरता से लेते हुए भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भविष्य में किसी भी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसा कोई प्रश्न या विकल्प शामिल नहीं होना चाहिए, जिससे किसी व्यक्ति, जाति, समुदाय, पंथ या धार्मिक आस्था की भावनाएं आहत हों। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों से एक बहुविकल्पीय प्रश्न पूछा गया, जिसमें वाक्यांश था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला”।
इस प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें एक विकल्प “पंडित” भी शामिल था। इसी विकल्प को लेकर विवाद शुरू हुआ। कई अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने इसे अनुचित बताते हुए आपत्ति जताई और कहा कि किसी समुदाय या सामाजिक पहचान से जुड़े शब्द का इस प्रकार उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी प्रश्नपत्र का यह हिस्सा तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद मामला व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
अभ्यर्थियों और संगठनों ने जताई आपत्ति
विवादित प्रश्न सामने आने के बाद प्रतियोगी छात्रों के कई संगठनों ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में भाषा और प्रश्नों का चयन पूरी सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, क्योंकि लाखों अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं और किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकती है।
कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी इस मामले में आपत्ति दर्ज कराते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनाया सख्त रुख
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को संबंधित अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों के अध्यक्षों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि—
- किसी भी व्यक्ति, जाति, समुदाय या धर्म से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी प्रश्नपत्र का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
- प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं।
- संवेदनशील विषयों से जुड़े प्रश्नों की अतिरिक्त स्तर पर समीक्षा की जाए।
- प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी बनाया जाए।
सरकार का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बार-बार गलती करने वालों पर लगेगा प्रतिबंध
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति या संस्था बार-बार इस प्रकार की लापरवाही करती है, तो उसे “Habitual Offender” (आदतन उल्लंघनकर्ता) मानते हुए भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने के कार्य से प्रतिबंधित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों के साथ होने वाले एमओयू (MoU) में भी इस प्रकार के प्रावधान शामिल किए जाएं, ताकि उनकी जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय हो सके।
सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी जताई नाराजगी
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की असावधानी स्वीकार नहीं की जा सकती।
उनके बयान के बाद भर्ती बोर्ड द्वारा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई।
नई समीक्षा समिति बनाने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, विवाद के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड भविष्य में प्रश्नपत्रों के पूर्व ऑडिट (Pre-Audit) और गुणवत्ता परीक्षण के लिए एक अलग समीक्षा समिति गठित करने पर विचार कर रहा है।
यदि ऐसा होता है तो प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले भाषा, तथ्यात्मक शुद्धता और संवेदनशीलता के आधार पर अतिरिक्त स्तर पर जांचे जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था भविष्य में विवादों को कम करने में मदद कर सकती है।
भाजपा नेताओं ने भी उठाया मुद्दा
मामले के सामने आने के बाद भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने भी इस विषय पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने मांग की कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोगों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाए।
इसके अलावा कुछ अन्य जनप्रतिनिधियों और विधायकों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
भर्ती बोर्ड ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष एस. बी. शिरोडकर ने मामले की जांच के आदेश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं किए जाते। बोर्ड के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने का कार्य बाहरी विशेषज्ञ संस्थाओं को सौंपा जाता है और पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बोर्ड के अधिकांश अधिकारियों के पास भी उपलब्ध नहीं होता, इसलिए पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित विकल्प किस स्तर पर शामिल किया गया।
भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र निर्माण क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र केवल ज्ञान का परीक्षण नहीं करते, बल्कि उनकी भाषा, निष्पक्षता और संवेदनशीलता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार—
- प्रश्न तथ्यात्मक रूप से सही होने चाहिए।
- किसी भी समुदाय या सामाजिक समूह के प्रति पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।
- भाषा स्पष्ट और सम्मानजनक होनी चाहिए।
- सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने वाले प्रश्न तैयार किए जाने चाहिए।
- परीक्षा एजेंसियों के पास बहु-स्तरीय गुणवत्ता जांच प्रणाली होनी चाहिए।
इसी कारण अधिकांश राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की कई चरणों में समीक्षा की जाती है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल विवादित प्रश्न की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई और क्या किसी एजेंसी या विशेषज्ञ की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राज्य सरकार के निर्देशों के बाद यह संभावना भी जताई जा रही है कि भविष्य में उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की समीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, ताकि संवेदनशील विषयों से जुड़े किसी भी विवाद की पुनरावृत्ति न हो और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनी रहे।




