पंजाब के लुधियाना जिले में आयोजित प्रसिद्ध किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक 2026 का आखिरी दिन बेहद खास और उत्साहपूर्ण रहा। ग्रामीण खेलों की पहचान माने जाने वाले इस आयोजन में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी शामिल हुए और उन्होंने खिलाड़ियों, आयोजकों तथा ग्रामीण समुदाय को संबोधित किया। लंबे समय बाद इस खेल मेले में बैलगाड़ी दौड़ की वापसी ने लोगों में खास उत्साह पैदा कर दिया।
किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक को पंजाब की खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां हर साल अलग-अलग ग्रामीण खेलों में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। इस आयोजन में खेलों के साथ-साथ पंजाब की परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक भी देखने को मिलती है। साल 2026 का आयोजन इसलिए भी यादगार बन गया क्योंकि करीब 12 साल के लंबे अंतराल के बाद बैलगाड़ी दौड़ का आयोजन दोबारा किया गया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ग्रामीण खेलों को बताया पंजाब की पहचान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक का नाम बचपन से सुनते आए हैं। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह छोटे थे, तब शाम की खबरों में किला रायपुर खेल मेले की चर्चा हुआ करती थी। आज उसी स्थान पर पहुंचकर उन्हें खुशी महसूस हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से ग्रामीण लोगों और खेल प्रेमियों की मांग थी कि बैलगाड़ी दौड़ जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताओं को दोबारा शुरू किया जाए। सरकार बनने के बाद इस दिशा में कदम उठाए गए और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस खेल को फिर से आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद वह इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे, क्योंकि पंजाब की ग्रामीण खेल परंपरा और खिलाड़ियों का सम्मान उनके लिए महत्वपूर्ण है।
बैलगाड़ी दौड़ की वापसी से ग्रामीणों में उत्साह
किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक में बैलगाड़ी दौड़ हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही है। यह प्रतियोगिता पंजाब के ग्रामीण जीवन और पशुपालन संस्कृति से जुड़ी हुई है। कई ग्रामीण परिवार अपने बैलों की देखभाल वर्षों से करते हैं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी बैलों की देखभाल करने वाले लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई लोग अपने बैलों को बच्चों की तरह पालते हैं और उनकी सेवा करते हैं। उन्होंने बैलों की जोड़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि पंजाब में पशुओं के प्रति सम्मान की पुरानी परंपरा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह आयोजन राजनीति से ऊपर है और खेल के मैदान सभी लोगों के लिए साझा होते हैं। यहां सभी वर्गों और राजनीतिक विचारों के लोग एक साथ आते हैं।
गांवों में एकता बनाए रखने की अपील
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राजनीतिक पसंद रखने का अधिकार है, लेकिन गांव की एकता सबसे जरूरी है।
भगवंत मान ने कहा कि कई जगहों पर राजनीतिक मतभेदों के कारण अलग-अलग खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होने लगी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि खेलों को राजनीति से दूर रखें और गांवों में मिल-जुलकर माहौल बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि खेल लोगों को जोड़ने का काम करते हैं और ग्रामीण खेल मेले पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं।
हलवारा एयरपोर्ट और विकास कार्यों पर मुख्यमंत्री का बयान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब के विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हलवारा एयरपोर्ट का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्तीय व्यवस्था में सुधार करते हुए कई योजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध करवाए हैं। गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में आम आदमी क्लिनिक के माध्यम से लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोगों को बड़े स्वास्थ्य सहायता प्रावधानों का लाभ भी मिलेगा, ताकि आर्थिक स्थिति के कारण किसी व्यक्ति को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
खिलाड़ियों को सुविधाएं देने पर सरकार का जोर
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि खिलाड़ियों को केवल पुरस्कार देने से नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, मैदान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने से खेल संस्कृति मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ सही मंच और संसाधन उपलब्ध कराने की है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल ढांचे को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने खुद को खेल प्रेमी बताते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि पंजाब के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करें।
आखिरी दिन कई खेलों के फाइनल मुकाबले हुए
किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक 2026 के अंतिम दिन कई खेल प्रतियोगिताओं के फाइनल मुकाबले आयोजित किए गए। इनमें एथलेटिक्स की 200 मीटर दौड़, 800 मीटर दौड़, हाई जंप और साइकिल रेस प्रमुख रहे।
इसके अलावा कबड्डी और हॉकी के मुकाबलों ने भी दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। नेशनल स्टाइल कबड्डी में लड़कियों के अंडर-17 वर्ग और सर्कल कबड्डी के फाइनल मुकाबले आकर्षण का केंद्र रहे।
कार्यक्रम में निहंग सिंहों द्वारा घोड़ों पर किए गए करतब, बाजीगर शो और ट्राइसाइकिल रेस जैसे पारंपरिक और मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
पंजाब सरकार ने बदले नियम, दोबारा शुरू हुई बैलगाड़ी दौड़
इस बार किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक का आयोजन पंजाब सरकार की ओर से किया गया। बैलगाड़ी दौड़ को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार ने पंजाब पशु क्रूरता निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2025 में बदलाव किए।
कानूनी बदलाव के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में इस पारंपरिक खेल को फिर से आयोजित करने का रास्ता साफ हुआ। ग्रामीण समुदाय ने इसे पंजाब की पुरानी खेल विरासत को वापस लाने वाला कदम बताया।
किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक 2026 ने एक बार फिर साबित किया कि पंजाब में खेल केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और लोगों को जोड़ने का माध्यम भी हैं। इस आयोजन में आधुनिक खेलों के साथ-साथ पारंपरिक गतिविधियों ने ग्रामीण पंजाब की पहचान को मजबूत किया।




