Haryana: सांसद नवीन जिंदल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लिखा पत्र, अंबाला हिसार हाइवे पर दो टोल प्लाजा हटाने की मांग।

Haryana: सांसद नवीन जिंदल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लिखा पत्र, अंबाला हिसार हाइवे पर दो टोल प्लाजा हटाने की मांग।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा क्षेत्र से होकर गुजरने वाले अंबाला-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित थाना टोल प्लाजा एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को अब राजनीतिक स्तर पर भी मजबूती मिली है। कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर गांव थाना के निकट बने टोल प्लाजा को हटाने की मांग की है।

सांसद का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा की दूरी से संबंधित केंद्र सरकार की नीति के अनुसार 60 किलोमीटर के दायरे में एक से अधिक टोल प्लाजा नहीं होना चाहिए। जबकि अंबाला-हिसार मार्ग पर थाना टोल प्लाजा और आगे स्थित सैनी माजरा टोल प्लाजा के बीच की दूरी निर्धारित मानकों से कम बताई जा रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों और नियमित रूप से इस मार्ग का उपयोग करने वाले वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

यह मुद्दा केवल टोल शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े नियम, यात्रियों की सुविधा, परिवहन लागत और क्षेत्रीय विकास जैसे कई पहलुओं को भी प्रभावित करता है। इसी कारण यह विषय क्षेत्र में लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

60 किलोमीटर के दायरे में एक ही टोल प्लाजा रखने की नीति का दिया गया हवाला

सांसद नवीन जिंदल ने अपने पत्र में मार्च 2022 के दौरान संसद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए उस बयान का उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया था कि यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर 60 किलोमीटर के दायरे में दो टोल प्लाजा हैं तो नियमों के अनुसार उनकी समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता होने पर उन्हें हटाने या स्थानांतरित करने पर विचार किया जाएगा।

सांसद ने पत्र में बताया कि अंबाला-हिसार हाईवे पर गांव थाना के निकट स्थित टोल प्लाजा और इस्माईलाबाद के आगे गांव सैनी माजरा के पास स्थित दूसरे टोल प्लाजा के बीच की दूरी लगभग 45 किलोमीटर से भी कम है। इस कारण प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को दो स्थानों पर टोल शुल्क देना पड़ता है।

उन्होंने आग्रह किया है कि केंद्र सरकार इस मामले की तकनीकी और प्रशासनिक समीक्षा कराए तथा यदि यह व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है तो संबंधित टोल प्लाजा को हटाने अथवा आवश्यक बदलाव करने पर विचार किया जाए।

वाहन चालकों पर बढ़ रहा है अतिरिक्त आर्थिक बोझ

स्थानीय लोगों का कहना है कि कैथल, पिहोवा, इस्माईलाबाद और आसपास के क्षेत्रों से अंबाला की ओर जाने वाले वाहन चालकों को यात्रा के दौरान दो अलग-अलग टोल प्लाजा पर शुल्क देना पड़ता है। इससे नियमित यात्रा करने वाले लोगों का मासिक खर्च काफी बढ़ जाता है।

व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और छोटे व्यवसाय से जुड़े नागरिकों का कहना है कि जो लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं, उनके लिए दोहरे टोल शुल्क का भुगतान आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। कई लोगों का मानना है कि यदि निर्धारित दूरी के भीतर दो टोल प्लाजा मौजूद हैं तो इस व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए।

कैथल और पिहोवा क्षेत्र के लोगों ने उठाई राहत की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कैथल जिले से अंबाला, कुरुक्षेत्र और आसपास के शहरों की ओर आने-जाने वाले हजारों लोग प्रतिदिन इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में बार-बार टोल शुल्क चुकाने से परिवहन खर्च बढ़ जाता है।

लोगों का मानना है कि यदि एक टोल प्लाजा हटाया जाता है या नियमों के अनुरूप पुनर्गठन किया जाता है तो आम यात्रियों, व्यापारिक गतिविधियों तथा माल परिवहन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल व्यवस्था के निर्धारित मानक क्या हैं

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इनका उद्देश्य सड़क निर्माण की लागत की भरपाई करने के साथ-साथ यात्रियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़ने देना भी होता है।

विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य रूप से दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी बनाए रखने का प्रावधान रखा जाता है। यदि किसी क्षेत्र में भौगोलिक, तकनीकी या परियोजना संबंधी विशेष कारण हों तो अलग व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित प्राधिकरण द्वारा विस्तृत समीक्षा की जाती है।

सांसद ने मंत्रालय से मामले की समीक्षा करने का किया अनुरोध

पत्र के माध्यम से सांसद नवीन जिंदल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि दोनों टोल प्लाजा के बीच की दूरी निर्धारित मानकों से कम है तो यात्रियों को राहत देने के लिए उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क अवसंरचना के विकास के साथ-साथ नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन व्यवस्था का लाभ मिल सके।

स्थानीय ग्रामीणों ने सांसद की पहल का किया समर्थन

पिहोवा और कैथल क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों तथा सामाजिक प्रतिनिधियों ने सांसद की इस पहल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लोग इस विषय को उठा रहे थे और अब इस मुद्दे को केंद्र सरकार तक पहुंचाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो हजारों नियमित यात्रियों को आर्थिक राहत मिल सकती है। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि मंत्रालय इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगा।

व्यापार और परिवहन गतिविधियों पर भी पड़ता है प्रभाव

इस मार्ग का उपयोग केवल निजी वाहन चालक ही नहीं बल्कि छोटे व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, कृषि उत्पादों की ढुलाई करने वाले वाहन तथा औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े वाहन भी करते हैं। लगातार टोल शुल्क देने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका प्रभाव व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टोल व्यवस्था संतुलित हो तो इससे यातायात सुगम होता है और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है। इसी कारण समय-समय पर टोल प्लाजा की स्थिति और दूरी की समीक्षा करना आवश्यक माना जाता है।

यात्रियों की सुविधा और नियमों के संतुलन पर रहेगा आगे का फैसला

अब इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संबंधित सड़क परिवहन प्राधिकरण की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। यदि मंत्रालय को प्राप्त पत्र के आधार पर तकनीकी जांच कराई जाती है तो टोल प्लाजा की दूरी, यातायात भार, परियोजना की शर्तों और नियमों के अनुरूप सभी पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है।

फिलहाल क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि मंत्रालय इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई होती है तो इससे हजारों वाहन चालकों को राहत मिलने की संभावना है और अंबाला-हिसार हाईवे पर यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

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