हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टोल और एंट्री टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सरकार ने मार्च में जारी की गई टोल दरों की समीक्षा के बाद नई संशोधित दरें लागू करने का फैसला लिया है। यह बदलाव विभिन्न राज्यों, खासतौर पर पंजाब और हरियाणा की ओर से जताई गई आपत्तियों और विरोध के बाद किया गया है।
सरकार ने पहले घोषित टोल दरों में संशोधन करते हुए कई वाहन श्रेणियों को राहत दी है। नई नीति का उद्देश्य टोल व्यवस्था को अधिक तर्कसंगत बनाना और यात्रियों व वाहन मालिकों पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को कम करना है। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है।
नई व्यवस्था में खासतौर पर यात्री वाहनों, हिमाचल में पंजीकृत वाहनों और टोल बैरियर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए राहत का प्रावधान किया गया है।
पहले जारी टोल दरों को लेकर हुआ था विरोध
मार्च महीने में हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए टोल और एंट्री टैक्स की नई दरें घोषित की थीं। इन दरों में कई वाहन श्रेणियों के लिए पहले की तुलना में काफी बढ़ोतरी की गई थी।
नई प्रस्तावित दरों में यात्री वाहनों, हल्के वाणिज्यिक वाहनों और बड़े वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए गए थे। इनमें 12+1 सीट क्षमता तक वाले यात्री वाहनों के लिए 130 रुपये प्रतिदिन का टोल तय किया गया था।
इसके अलावा हल्के वाणिज्यिक यात्री वाहनों के लिए 200 रुपये प्रतिदिन और बड़े आकार के मल्टी-एक्सल वाहनों के लिए 900 रुपये तक की दर निर्धारित की गई थी।
इन बढ़ी हुई दरों को लेकर वाहन संचालकों और पड़ोसी राज्यों के लोगों में नाराजगी देखने को मिली थी। पंजाब और हरियाणा की ओर से भी इस नीति को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
यात्री वाहनों का टोल 130 रुपये से घटाकर 100 रुपये किया गया
विरोध और समीक्षा के बाद हिमाचल सरकार ने टोल दरों में संशोधन किया है। अब 12 सीट तक की क्षमता वाले यात्री वाहनों के लिए टोल शुल्क को घटाकर 100 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
पहले इन वाहनों से 130 रुपये प्रतिदिन शुल्क लिया जाना था। नई दर लागू होने के बाद ऐसे वाहन मालिकों को प्रतिदिन 30 रुपये की राहत मिलेगी।
यह संशोधित दर केवल हिमाचल में पंजीकृत वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गैर-हिमाचल पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होगी, जिनकी क्षमता 12 सीट तक है।
गैर-हिमाचल वाहनों को भी मिलेगा संशोधित दरों का लाभ
राज्य सरकार ने नई नीति में यह स्पष्ट किया है कि टोल दरों में किए गए बदलाव का लाभ बाहर से आने वाले वाहनों को भी मिलेगा।
इससे पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से हिमाचल आने वाले यात्रियों और पर्यटक वाहनों को राहत मिलेगी। इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों और व्यावसायिक यात्राओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पर्यटक दूसरे राज्यों से आते हैं। ऐसे में टोल दरों में कमी से पर्यटन क्षेत्र को भी सकारात्मक प्रभाव मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल पंजीकृत वाहनों के लिए बढ़ाया गया छूट का दायरा
संशोधित टोल नीति में हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत हल्के मोटर वाहनों को मिलने वाली छूट का दायरा भी बढ़ाया गया है।
अब मोटर वाहन अधिनियम के तहत आने वाले निजी और वाणिज्यिक दोनों प्रकार के वाहनों को इस छूट का लाभ मिलेगा। इसमें टैक्सी जैसे व्यावसायिक वाहन भी शामिल होंगे।
पहले छूट का दायरा सीमित था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अधिक वाहन मालिकों को इसका फायदा मिल सकेगा।
टोल बैरियर के पास रहने वाले लोगों को मिलेगी मुफ्त सुविधा
राज्य सरकार ने टोल बैरियर के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों को भी राहत देने का फैसला किया है।
नई नीति के अनुसार, टोल बैरियर से पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग रियायती टोकन प्राप्त करने के पात्र होंगे। खास बात यह है कि पात्र लोगों को यह टोकन निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए स्थानीय निवासियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करानी होगी।
इस कदम से उन लोगों को राहत मिलेगी जिन्हें रोजाना टोल बैरियर से गुजरना पड़ता है और जिनका आवागमन स्थानीय स्तर पर अधिक होता है।
पंजाब और हरियाणा ने जताया था विरोध
हिमाचल सरकार द्वारा मार्च में घोषित टोल दरों का पंजाब और हरियाणा की ओर से विरोध किया गया था।
पंजाब में लोगों ने इन बढ़ी हुई दरों को लेकर नाराजगी जताई थी। यहां तक कि कुछ संगठनों और लोगों की ओर से 31 मार्च की रात 12 बजे से हिमाचल के एंट्री पॉइंट बंद करने की चेतावनी भी दी गई थी।
इसके अलावा हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बाद बीजेपी विधायकों ने भी इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध और राजनीतिक दबाव के बाद सरकार ने मामले की समीक्षा की और नई दरें जारी कीं।
सरकार ने क्यों किया टोल नीति में बदलाव
राज्य सरकार का उद्देश्य टोल व्यवस्था को संतुलित बनाना है ताकि राजस्व और जनता की सुविधा दोनों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
टोल शुल्क में अत्यधिक बढ़ोतरी से आम यात्रियों, व्यापारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता था। इसी को देखते हुए सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए दरों में बदलाव किया है।
नई नीति में स्थानीय लोगों, पर्यटकों और व्यावसायिक वाहन संचालकों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।
किसानों के लिए भी सरकार ने किए कई बड़े फैसले
टोल नीति में बदलाव के अलावा हिमाचल सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भी वृद्धि की है।
सरकार ने गेहूं, मक्का और अन्य फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार लंबे समय से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। नई एमएसपी दरों से किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
हल्दी और अदरक के लिए तय किया गया नया एमएसपी
सरकार ने प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों में हल्दी और अदरक के लिए भी नई एमएसपी दरें निर्धारित की हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार, हल्दी का एमएसपी 150 रुपये प्रति किलो तय किया गया है। वहीं अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलो की दर निर्धारित की गई है।
इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को इससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। इससे राज्य में पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सकता है।
दूध खरीद के लिए भी नई दरें निर्धारित
किसानों और पशुपालकों को राहत देने के लिए सरकार ने दूध खरीद की दरों में भी बदलाव किया है।
राज्य सरकार अब गाय का दूध 61 रुपये प्रति किलो और भैंस का दूध 71 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदेगी।
इस फैसले से पशुपालन से जुड़े किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। दूध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और बेहतर खरीद मूल्य से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
नई नीतियों से यात्रियों और किसानों को राहत की उम्मीद
हिमाचल सरकार द्वारा टोल दरों में संशोधन और कृषि उत्पादों के एमएसपी में बढ़ोतरी को अलग-अलग क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जहां टोल दरों में कमी से यात्रियों, वाहन मालिकों और पर्यटन क्षेत्र को राहत मिलेगी, वहीं किसानों और पशुपालकों के लिए नई एमएसपी दरें आर्थिक सहायता प्रदान कर सकती हैं।


