Punjab Cabinet Decisions: मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को मंजूरी, 50 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए सरकार उठाएगी पूरा खर्च
पंजाब सरकार की कैबिनेट बैठक में राज्य के सामाजिक कल्याण, शिक्षा और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना के माध्यम से राज्य के 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों को विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कराने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक धार्मिक यात्रा का अवसर उपलब्ध कराना है। यात्रा के दौरान परिवहन, ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए ‘स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम’ को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।
इन दोनों योजनाओं को राज्य सरकार की जनकल्याण और शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। एक ओर जहां वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक यात्राओं का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को अनुभवी अधिकारियों से प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगी मुफ्त धार्मिक यात्रा की सुविधा
कैबिनेट बैठक में स्वीकृत मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत राज्य के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का संचालन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी तैयार की जा रही हैं।
योजना का उद्देश्य केवल यात्रा कराना नहीं है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक धार्मिक अनुभव प्रदान करना भी है। सरकार ने इसके लिए अलग बजट का भी प्रावधान किया है।
50 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिक उठा सकेंगे योजना का लाभ
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का लाभ 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिकों को मिलेगा। योजना के तहत पात्रता संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन करने वाले नागरिकों का चयन किया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना आर्थिक चिंता के यात्रा कर सकें।
यात्रा का पूरा खर्च सरकार करेगी वहन
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के अंतर्गत यात्रा से संबंधित सभी प्रमुख खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। इसमें वातानुकूलित परिवहन, आवास, भोजन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी।
सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए यात्रा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एसी यात्रा, आवास और भोजन की होगी व्यवस्था
योजना के तहत यात्रियों के लिए वातानुकूलित यात्रा की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा उनके ठहरने के लिए आरामदायक आवास तथा भोजन-पान की भी उचित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
यात्रा के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी संबंधित विभागों द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
श्रद्धालुओं को दिया जाएगा स्मृति-चिन्ह
सरकार ने योजना के तहत तीर्थ यात्रा पूरी करने वाले श्रद्धालुओं को स्मृति-चिन्ह स्वरूप उपहार देने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यात्रा को यादगार बनाना और प्रतिभागियों के अनुभव को विशेष बनाना है।
यात्रा पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।
धार्मिक गतिविधियों का भी रहेगा आयोजन
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सत्संग, कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों को आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताने का अवसर मिलेगा।
इन कार्यक्रमों का आयोजन संबंधित धार्मिक स्थलों और यात्रा कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा।
योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस राशि का उपयोग यात्रा प्रबंधन, परिवहन, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि योजना को व्यवस्थित रूप से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा पंजीकरण
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार योजना के लिए पात्र नागरिकों का पंजीकरण अप्रैल के अंतिम सप्ताह में शुरू किया जाएगा। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र यात्रियों का चयन किया जाएगा।
योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और अन्य दिशा-निर्देश संबंधित विभाग द्वारा अलग से जारी किए जाएंगे।
मई माह से शुरू हो सकती है तीर्थ यात्रा
सरकार की योजना के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद मई महीने से तीर्थ यात्राओं का संचालन शुरू किया जाएगा। यात्राओं का कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ प्राप्त कर सकें।
यात्रा कार्यक्रम में शामिल धार्मिक स्थलों और यात्रा तिथियों की जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी।
हर धर्म के प्रति सम्मान की भावना पर सरकार का जोर
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब की सांस्कृतिक पहचान सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग विभिन्न धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हैं और तीर्थ यात्रा को सौभाग्य का विषय मानते हैं।
सरकार का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों को समान अवसर उपलब्ध कराना है ताकि वे धार्मिक यात्राओं का लाभ उठा सकें।
स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव ‘स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम’ को भी मंजूरी दी गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रेरित करना और उनके व्यक्तित्व विकास में सहायता करना है।
सरकार का मानना है कि अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें भविष्य के लिए बेहतर दिशा मिलेगी।
आईएएस और आईपीएस अधिकारी स्कूलों को लेंगे गोद
स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम के तहत भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों को गोद लेंगे। प्रत्येक अधिकारी निर्धारित अवधि तक संबंधित विद्यालय के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेगा।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा, करियर, व्यक्तित्व विकास और जीवन कौशल से संबंधित प्रेरणा प्रदान करना है।
पहले चरण में 80 स्कूल ऑफ एमिनेंस होंगे शामिल
सरकार ने जानकारी दी है कि इस कार्यक्रम को प्रारंभिक चरण में राज्य के 80 स्कूल ऑफ एमिनेंस में लागू किया जाएगा। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा और उसके अनुभवों के आधार पर आगे विस्तार किया जा सकता है।
इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को समय-समय पर अधिकारियों के साथ संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
पांच वर्षों तक एक ही विद्यालय से जुड़े रहेंगे अधिकारी
योजना के अनुसार प्रत्येक अधिकारी को पांच वर्षों की अवधि के लिए एक विद्यालय आवंटित किया जाएगा। अधिकारी की तैनाती राज्य के किसी भी जिले में होने के बावजूद वह अपने निर्धारित विद्यालय से जुड़ा रहेगा और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही विद्यालय से जुड़े रहने पर विद्यार्थियों और अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होगा तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।


