हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नई बिजली दरें लागू होने के बाद घरेलू, व्यावसायिक और कृषि क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है। राज्य में बिजली दरों में संशोधन के कारण बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर असर पड़ने की संभावना है। अनुमान के अनुसार प्रदेश के लगभग 81 लाख परिवार किसी न किसी रूप में नई बिजली दरों से प्रभावित होंगे।
हालांकि बिजली दरों में वृद्धि के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि कृषि क्षेत्र के लिए दी जा रही बिजली सब्सिडी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से ट्यूबवेल कनेक्शन का उपयोग करने वाले किसानों को पहले की तरह रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि कृषि उत्पादन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसलिए सब्सिडी व्यवस्था को पहले की तरह जारी रखा गया है।
नई बिजली दरें लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक, व्यावसायिक और कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं की श्रेणियों में भी संशोधित शुल्क प्रभावी हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने, ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय स्थिति सुधारने और भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए समय-समय पर टैरिफ में संशोधन आवश्यक होता है।
किसानों को मिलेगी राहत, ट्यूबवेल कनेक्शन पर बिजली सब्सिडी पहले की तरह जारी
बिजली दरों में बढ़ोतरी के बावजूद कृषि क्षेत्र के लिए राहत की व्यवस्था जारी रखी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्यूबवेल कनेक्शन वाले किसानों को बिजली सब्सिडी पहले की तरह मिलती रहेगी। इसका उद्देश्य खेती की लागत को नियंत्रित रखना और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं आने देना है।
राज्य सरकार का कहना है कि सिंचाई के लिए बिजली किसानों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल है। यदि बिजली दरों का पूरा भार किसानों पर डाल दिया जाए तो खेती की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसी कारण सरकार सब्सिडी के माध्यम से किसानों को राहत प्रदान कर रही है।
ट्यूबवेल बिजली की नई दर क्या होगी?
संशोधित टैरिफ के अनुसार कृषि ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए बिजली की निर्धारित दर पहले 6 रुपये 48 पैसे प्रति यूनिट थी, जिसे बढ़ाकर 7 रुपये 35 पैसे प्रति यूनिट कर दिया गया है। यह संशोधित दर बिजली वितरण कंपनियों के लिए लागू होगी।
हालांकि किसानों को इस पूरी राशि का भुगतान नहीं करना होगा। सरकार ने सब्सिडी जारी रखते हुए किसानों के लिए भुगतान की दर पहले की तरह बेहद कम रखी है।
किसानों को केवल 10 पैसे प्रति यूनिट देना होगा
राज्य सरकार की वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पात्र किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन पर केवल 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। बाकी राशि सरकार स्वयं वहन करेगी।
इसका अर्थ यह है कि संशोधित बिजली दर लागू होने के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और उन्हें पहले की तरह रियायती दर पर बिजली मिलती रहेगी।
सरकार देगी 7.25 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी
नई व्यवस्था के अनुसार प्रति यूनिट कुल निर्धारित दर और किसानों से वसूले जाने वाले शुल्क के बीच का अंतर राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में बिजली वितरण निगमों को उपलब्ध कराएगी।
सरकारी व्यवस्था के अनुसार प्रति यूनिट लगभग 7 रुपये 25 पैसे की राशि सरकार बिजली निगमों को प्रदान करेगी ताकि किसानों को रियायती दर पर बिजली मिलती रहे।
कृषि क्षेत्र को मिलेगा हजारों करोड़ रुपये का लाभ
सरकार के अनुमान के अनुसार बिजली सब्सिडी योजना के माध्यम से किसानों को वर्षभर में लगभग 6,718 करोड़ रुपये की आर्थिक राहत मिलेगी। यह राशि राज्य सरकार द्वारा बिजली वितरण कंपनियों को सब्सिडी के रूप में दी जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना और किसानों की उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना है।
81 लाख परिवारों पर पड़ सकता है असर
राज्य में बिजली दरों में संशोधन का प्रभाव बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि प्रदेश के लगभग 81 लाख परिवार नई बिजली दरों के दायरे में आएंगे।
घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के मासिक बिल उनकी बिजली खपत, श्रेणी तथा निर्धारित टैरिफ के अनुसार तय होंगे। जिन परिवारों की बिजली खपत अधिक है, उनके मासिक बिल में अपेक्षाकृत अधिक अंतर देखने को मिल सकता है।
घरेलू और अन्य श्रेणियों में लागू हुए संशोधित टैरिफ
नई बिजली दरों के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, छोटे उद्योगों तथा अन्य श्रेणियों के लिए भी संशोधित टैरिफ प्रभावी किए गए हैं।
बिजली उपभोक्ताओं को उनकी श्रेणी और मासिक खपत के अनुसार निर्धारित दरों पर बिल जारी किए जाएंगे।
कृषि उत्पादन पर बोझ कम रखने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली एक महत्वपूर्ण लागत होती है। यदि बिजली शुल्क में बढ़ोतरी का पूरा असर किसानों पर पड़ता है तो खेती की लागत में वृद्धि हो सकती है।
सरकार द्वारा सब्सिडी जारी रखने का उद्देश्य कृषि गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना तथा किसानों को अतिरिक्त वित्तीय दबाव से बचाना है।
बिजली सब्सिडी व्यवस्था कैसे करती है काम?
बिजली सब्सिडी प्रणाली के तहत सरकार निर्धारित श्रेणियों के उपभोक्ताओं की ओर से बिजली वितरण कंपनियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। इससे उपभोक्ताओं को कम दर पर बिजली उपलब्ध हो पाती है जबकि बिजली कंपनियों को निर्धारित राजस्व प्राप्त होता है।
कृषि क्षेत्र में यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है ताकि सिंचाई और खेती से जुड़े कार्य प्रभावित न हों।
बिजली वितरण निगमों को मिलेगा सरकारी भुगतान
सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी सीधे बिजली वितरण निगमों को प्रदान की जाती है। इससे किसानों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के बावजूद बिजली कंपनियों के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव कम होता है।
राज्य सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों और बिजली निगमों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
बिजली बचत और ऊर्जा दक्षता पर भी दिया जा रहा जोर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली दरों में बदलाव के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण भी महत्वपूर्ण विषय है। बिजली की बचत करने वाले उपकरणों का उपयोग, अनावश्यक बिजली खपत से बचाव और ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने से उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को नियंत्रित रख सकते हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों और कृषि क्षेत्र में ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग बिजली की कुल मांग को भी संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
नई व्यवस्था के तहत कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग प्रभाव
नई बिजली दरों के लागू होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का प्रभाव दिखाई दे सकता है, जबकि कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने सब्सिडी व्यवस्था को यथावत रखा है। ट्यूबवेल कनेक्शन वाले किसानों को पहले की तरह केवल 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी तथा शेष राशि सरकार वहन करेगी। दूसरी ओर सामान्य घरेलू और अन्य श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए संशोधित बिजली दरें लागू हो चुकी हैं, जिनका प्रभाव उनकी बिजली खपत और निर्धारित टैरिफ के अनुसार दिखाई देगा।




