Mohali में शीतकालीन अवकाश के बाद खुले स्कूल:स्टूडेंट्स की उपस्थिति रही बेहद कम, घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का दिखा असर

Mohali में शीतकालीन अवकाश के बाद खुले स्कूल:स्टूडेंट्स की उपस्थिति रही बेहद कम, घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का दिखा असर

पंजाब में शीतकालीन अवकाश के बाद खुले स्कूल, कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के चलते पहले दिन रही कम उपस्थिति

पंजाब में लंबे शीतकालीन अवकाश के बाद बुधवार से सरकारी और निजी स्कूल दोबारा खुल गए। हालांकि, स्कूल खुलने के पहले ही दिन कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और बेहद कम दृश्यता का असर साफ दिखाई दिया। राज्य के कई जिलों में सुबह के समय मौसम इतना खराब था कि बड़ी संख्या में अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं समझा। इसका परिणाम यह रहा कि अधिकांश स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही।

राज्य सरकार ने सर्द मौसम को देखते हुए 24 दिसंबर से स्कूलों में शीतकालीन अवकाश घोषित किया था। निर्धारित अवकाश समाप्त होने के बाद बुधवार से शिक्षण कार्य फिर से शुरू हुआ, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने स्कूलों की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया। कई शिक्षकों ने भी स्वीकार किया कि पहले दिन अधिकांश कक्षाओं में आधे से भी कम छात्र पहुंचे।

पंजाब के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के अनुसार कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई, जिससे सड़क परिवहन भी प्रभावित हुआ। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता देखी गई और कई परिवारों ने मौसम में सुधार होने तक बच्चों को घर पर ही रखने का फैसला किया।

स्कूल प्रशासन ने भी माना कि पहले दिन कम उपस्थिति की संभावना पहले से थी, क्योंकि लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे के कारण अधिकांश परिवार सतर्कता बरत रहे थे। कई स्कूलों ने विद्यार्थियों को समय पर पहुंचने के लिए कहा था, लेकिन मौसम की स्थिति सामान्य न होने के कारण अपेक्षित संख्या में छात्र नहीं पहुंच सके।

घने कोहरे और ठंड का स्कूल संचालन पर पड़ा व्यापक असर

बुधवार सुबह पंजाब के अनेक जिलों में घना कोहरा छाया रहा। कुछ इलाकों में सुबह लगभग सात बजे दृश्यता पांच मीटर के आसपास दर्ज की गई। इतनी कम दृश्यता के कारण वाहन चालकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्कूल बसों, निजी वाहनों और दोपहिया वाहनों से बच्चों को स्कूल छोड़ने वाले अभिभावकों के लिए यात्रा चुनौतीपूर्ण रही।

मौसम की खराब स्थिति के कारण कई प्रमुख सड़कों पर यातायात धीमी गति से चलता रहा। स्कूल बस संचालकों ने भी अतिरिक्त सावधानी बरती और कई स्थानों पर बसें निर्धारित समय से देर से पहुंचीं। ऐसे हालात में छोटे बच्चों के अभिभावकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें घर पर ही रखना बेहतर समझा।

विशेषज्ञों का मानना है कि घने कोहरे के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में छोटे बच्चों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक होता है। यही कारण रहा कि पहले दिन कई स्कूलों में उपस्थिति केवल 30 से 40 प्रतिशत के बीच रही।

अधिकांश स्कूलों में सीमित रही विद्यार्थियों की उपस्थिति

राज्य के विभिन्न जिलों से मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। प्राथमिक कक्षाओं में सबसे कम उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कुछ विद्यार्थी स्कूल पहुंचे।

स्कूल प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने पर विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। पहले दिन शिक्षकों ने नियमित पढ़ाई शुरू तो की, लेकिन कम उपस्थिति के कारण कई स्थानों पर केवल पुनरावृत्ति और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां ही संचालित की गईं।

कुछ निजी स्कूलों ने अनुपस्थित विद्यार्थियों के लिए कक्षा में पढ़ाए गए विषयों की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से साझा करने की भी व्यवस्था की, ताकि पढ़ाई का नुकसान कम से कम हो सके।

सुबह की शिफ्ट वाले स्कूलों पर सबसे अधिक असर

पंजाब के अधिकांश स्कूल सुबह लगभग 7:30 बजे से दोपहर तक संचालित होते हैं। यही समय घने कोहरे और अत्यधिक ठंड का भी होता है। सुबह जल्दी निकलने वाले विद्यार्थियों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा।

कुछ स्कूल दो शिफ्टों में संचालित होते हैं, जहां दूसरी शिफ्ट दोपहर बाद शुरू होती है। इन स्कूलों में दोपहर के समय मौसम अपेक्षाकृत बेहतर रहने के कारण उपस्थिति थोड़ी अधिक रही, लेकिन पहली शिफ्ट में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या काफी कम रही।

अभिभावकों का कहना है कि सुबह के समय कम दृश्यता और ठंडी हवाओं के कारण छोटे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा महसूस हुआ।

शिक्षकों ने बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को लेकर जताई चिंता

स्कूलों के दोबारा खुलने के साथ ही शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता आगामी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सामने आई है। लगभग डेढ़ महीने बाद बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने की संभावना है और इस समय विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाओं का विशेष महत्व माना जाता है।

शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के अंतिम चरण में नियमित अभ्यास, मॉडल पेपर, पुनरावृत्ति और विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन आवश्यक होता है। यदि मौसम के कारण लगातार कम उपस्थिति बनी रहती है तो विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।

कई विद्यालयों में शिक्षकों ने अनुपस्थित छात्रों को अतिरिक्त नोट्स उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने की संभावना भी व्यक्त की है।

अभिभावकों की प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी अन्य पहलू से अधिक महत्वपूर्ण है। घने कोहरे के दौरान सड़क पर वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।

कई अभिभावकों का मानना है कि यदि मौसम में सुधार होने तक कुछ और दिनों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों में लचीलापन रखा जाए तो विद्यार्थियों और परिवारों दोनों को राहत मिल सकती है।

कुछ अभिभावकों ने सुझाव दिया कि मौसम सामान्य होने तक स्कूलों के समय में बदलाव या देर से कक्षाएं शुरू करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

विद्यार्थियों ने भी मौसम को लेकर जताई चिंता

कई विद्यार्थियों ने बताया कि सुबह अत्यधिक ठंड और कोहरे के कारण स्कूल पहुंचना कठिन रहा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कुछ विद्यार्थियों का कहना है कि वे पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण नियमित रूप से स्कूल पहुंचना आसान नहीं है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने भी मौसम सामान्य होने की उम्मीद जताई है ताकि वे बिना किसी व्यवधान के अपनी तैयारी पूरी कर सकें।

मौसम का परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा प्रभाव

घने कोहरे का असर केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक और निजी परिवहन भी प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर वाहन धीमी गति से चलते दिखाई दिए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लगा।

स्कूल बस संचालकों ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित गति सीमा से कम रफ्तार पर वाहन चलाए। इससे कुछ स्थानों पर बसों के पहुंचने में देरी भी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि कम दृश्यता के दौरान सावधानीपूर्वक वाहन चलाना सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

मौसम सामान्य होने पर नियमित शैक्षणिक गतिविधियों की उम्मीद

स्कूल प्रशासन का मानना है कि जैसे-जैसे मौसम में सुधार होगा, विद्यार्थियों की उपस्थिति भी सामान्य होने लगेगी। फिलहाल विद्यालयों में नियमित कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं और शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अनुपस्थित विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान कम से कम हो।

शैक्षणिक संस्थानों का प्रयास है कि आगामी बोर्ड परीक्षाओं और वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराया जाए। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अभ्यास सत्र, पुनरावृत्ति कक्षाएं और विषयवार मार्गदर्शन भी आयोजित किया जा सकता है।

पंजाब में शीतकालीन अवकाश के बाद स्कूलों के दोबारा खुलने के साथ शिक्षा व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटने लगी है, हालांकि मौसम की चुनौती अभी भी बनी हुई है। आने वाले दिनों में तापमान और दृश्यता में सुधार होने पर विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ने तथा नियमित शैक्षणिक गतिविधियां पूरी गति से संचालित होने की उम्मीद की जा रही है।

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