भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस ; पारदर्शी शासन की पहचान बनी Mann सरकार

भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस ; पारदर्शी शासन की पहचान बनी Mann सरकार

पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जीरो-टॉलरेंस नीति दोहराई

पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त नीति को एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इसी क्रम में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विभागीय कार्रवाई से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की गई है तथा आगे भी इसी तरह निष्पक्ष कार्रवाई जारी रहेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का विश्वास मजबूत हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का पद उसके खिलाफ कार्रवाई में बाधा नहीं बनेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में समयबद्ध जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी नीति के तहत विभागीय जांच और विजिलेंस जांच दोनों प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया।

2022 में मिली शिकायतों के बाद शुरू हुई विभागीय और विजिलेंस जांच

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार वर्ष 2022 के मध्य में खजाना एवं लेखा शाखा (मुख्यालय) तथा विभिन्न जिला खजाना कार्यालयों में कार्यरत चार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी थी।

उन्होंने बताया कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए इसे पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को भी भेजा गया, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

सरकार का कहना है कि विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की संभावना न रहे।

विस्तृत जांच के बाद हुई विभागीय कार्रवाई

वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद दिसंबर 2025 में संबंधित मामलों पर अंतिम निर्णय लिया गया। जांच में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के पद पर तैनात एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

इसके अलावा शेष तीन कर्मचारियों के खिलाफ भी सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। सरकार का कहना है कि विभागीय कार्रवाई पूरी तरह जांच रिपोर्ट और लागू सेवा नियमों के आधार पर की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में समयबद्ध निर्णय लेना आवश्यक होता है, जिससे सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही बनी रहे।

विजिलेंस ब्यूरो ने दर्ज की एफआईआर

विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ विजिलेंस ब्यूरो ने भी अपनी जांच जारी रखी। वित्त मंत्री के अनुसार अमृतसर रेंज स्थित विजिलेंस ब्यूरो ने बर्खास्त किए गए अधिकारी के खिलाफ एफआईआर नंबर 1/2026 दर्ज की है।

उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी को 11 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 12 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गुरदासपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने जांच के लिए एक दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।

सरकार का कहना है कि आगे की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैंक खातों की जांच में सामने आए अन्य संदिग्ध लेन-देन

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जांच केवल चार कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही। विभागीय और विजिलेंस जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की गई।

इस प्रक्रिया में 22 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी सामने आए। सरकार ने इन मामलों को भी गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि वित्तीय लेन-देन की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई गई स्वतंत्र जांच

सरकार ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन मामलों की जांच एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का निर्णय लिया। वित्त मंत्री ने कहा कि स्वतंत्र जांच से तथ्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित किया गया।

जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग ने रिपोर्ट का अध्ययन किया और उसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। सरकार का कहना है कि सभी मामलों में सेवा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई केवल उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित नियमों के आधार पर ही की जाए।

22 अधिकारियों के खिलाफ शुरू हुई विभागीय कार्रवाई

वित्त मंत्री ने बताया कि स्वतंत्र जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। इन सभी मामलों में आरोपों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता को नजरअंदाज नहीं करेगी। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि विभागीय अनुशासन बनाए रखने और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन पर सरकार का जोर

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकारी विभागों में डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने, वित्तीय निगरानी मजबूत करने और शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पारदर्शी प्रशासन केवल विभागीय कार्रवाई से नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं के निर्माण से संभव है, जिनसे भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हों और सरकारी सेवाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे।

सरकार का मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था और नियमित ऑडिट से वित्तीय अनुशासन को बेहतर बनाया जा सकता है।

जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में प्रयास

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है जिसमें नागरिकों का भरोसा कायम रहे। इसके लिए भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक माना गया है।

उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

सरकार का कहना है कि भविष्य में भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिक नीतियों में शामिल है।

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