भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी तेज गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम और निवेशकों की कमजोर धारणा का असर घरेलू बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयरों की बिकवाली की, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर दबाव बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक व्यापार से जुड़े फैसलों का असर भारतीय बाजारों पर भी लगातार देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेक्टर लाल निशान में दिखाई दिए।

प्री-ओपन सेशन से ही बाजार पर दिखा दबाव
सोमवार सुबह प्री-ओपन मार्केट में ही गिरावट के संकेत मिलने शुरू हो गए थे। शुरुआती आंकड़ों में बीएसई सेंसेक्स लगभग 4000 अंक तक नीचे फिसल गया था, जबकि एनएसई निफ्टी में भी करीब 1100 अंकों तक की कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि नियमित कारोबार शुरू होने के बाद बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन प्रमुख सूचकांक फिर भी भारी नुकसान के साथ कारोबार करते रहे।
समाचार लिखे जाने तक बीएसई सेंसेक्स करीब 2800 अंक की गिरावट के साथ लगभग 72,500 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी भी लगभग 900 अंकों से अधिक टूटकर 22,000 के आसपास बना हुआ था। यह गिरावट निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता को दर्शाती है।
पिछले कारोबारी सत्र में भी रही थी कमजोरी
सोमवार की बड़ी गिरावट से पहले भी भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा था। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स लगभग 930 अंक टूटकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी 300 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार पर दबाव बने रहने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी बाजार में लगातार दो या उससे अधिक कारोबारी दिनों तक बिकवाली बनी रहती है तो निवेशकों का विश्वास प्रभावित होता है और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
अमेरिकी टैरिफ का वैश्विक बाजारों पर असर
हाल के दिनों में अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर टैरिफ से जुड़े फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल को प्रभावित किया है। वैश्विक निवेशक इन फैसलों के आर्थिक प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। इसी कारण एशियाई बाजारों से लेकर यूरोप और अमेरिका तक कई प्रमुख शेयर बाजारों में दबाव देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ता है, जिनमें भारत भी शामिल है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिल सकती है।
एशियाई बाजारों में भी दिखी भारी गिरावट
केवल भारतीय बाजार ही नहीं बल्कि कई एशियाई शेयर बाजार भी दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों ने वैश्विक व्यापारिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के चलते जोखिम वाले निवेशों में कटौती की।
जब प्रमुख वैश्विक बाजारों में एक साथ गिरावट आती है तो उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। यही कारण रहा कि सोमवार को अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा रुझान
जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में सोना, सरकारी बॉन्ड और अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ जाती है।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है। निवेशकों का मानना है कि अस्थिर बाजार परिस्थितियों में सोना अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है। इसी वजह से इसकी मांग में वृद्धि दर्ज की गई।
मेटल, आईटी और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार के कारोबार में विभिन्न सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। विशेष रूप से मेटल सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी, ऑटो और मीडिया सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा।
सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि केवल कुछ कंपनियां ही नहीं बल्कि पूरे उद्योग समूह पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार नहीं होता है तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी इन सेक्टरों पर दबाव बना रह सकता है।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी कमजोरी
बाजार में व्यापक बिकवाली का असर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। कई बड़े बैंक और वित्तीय संस्थानों के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि इस सेक्टर में कमजोरी बनी रहती है तो प्रमुख सूचकांकों पर भी दबाव बना रह सकता है।
टॉप गेनर्स में कुछ छोटे शेयर रहे शामिल
भारी गिरावट के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। बीएसई में कारोबार के दौरान Suryalaxmi, 08MPD, Lastmile, Umes Ltd और Modthread जैसे शेयर बढ़त दर्ज करते दिखाई दिए।
हालांकि इन शेयरों की बढ़त के बावजूद व्यापक बाजार का रुख नकारात्मक बना रहा। अधिकांश बड़े और मिडकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

टॉप लूजर्स में कई प्रमुख कंपनियां शामिल
बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंजों पर कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान Trent सहित कई कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।
इसके अलावा Siemens, Precot, Edelweiss और अन्य कई कंपनियों के शेयर भी कमजोर कारोबार करते दिखाई दिए। बड़े शेयरों में बिकवाली होने से प्रमुख सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव बना।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है वैश्विक संकेत
भारतीय शेयर बाजार केवल घरेलू आर्थिक गतिविधियों से ही प्रभावित नहीं होता बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम भी इसकी दिशा तय करते हैं। अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करती है।
यदि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव बढ़ता है, ब्याज दरों में बदलाव होता है या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो उसका प्रभाव भारतीय बाजारों में भी दिखाई देता है। इसलिए निवेशक घरेलू समाचारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाओं पर भी लगातार नजर रखते हैं।
आने वाले कारोबारी सत्रों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े फैसले बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार की संभावना बन सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जारी रहने की स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशक आने वाले कारोबारी सत्रों और आर्थिक संकेतकों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।




