कुशीनगर में सार्वजनिक भूमि पर बनी मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई फिलहाल रुकी, एडीएम कोर्ट में अपील लंबित होने से नहीं चलेगा बुलडोजर
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सार्वजनिक भूमि पर बने एक धार्मिक ढांचे को लेकर चल रहा मामला एक बार फिर चर्चा में है। तमकुही राज तहसील क्षेत्र के गड़हिया चिंतामन गांव में स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन द्वारा पहले बेदखली का नोटिस जारी किया गया था और सार्वजनिक भूमि को खाली करने की अंतिम तिथि 8 अप्रैल निर्धारित की गई थी। हालांकि, संबंधित पक्ष द्वारा एडीएम कोर्ट में दायर अपील लंबित होने के कारण फिलहाल प्रशासन ने किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि आगे की कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश के अनुरूप ही की जाएगी।
यह मामला सार्वजनिक भूमि पर कथित अतिक्रमण, राजस्व अभिलेखों और न्यायालय में लंबित कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इसी कारण प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के दायरे में रहकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सार्वजनिक भूमि पर निर्माण को लेकर उठा विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुशीनगर के तमकुही राज तहसील क्षेत्र के गड़हिया चिंतामन गांव में स्थित एक भूमि को राजस्व अभिलेखों में सार्वजनिक उपयोग की भूमि बताया गया है। आरोप है कि लगभग 20 वर्ष पहले इस भूमि पर मस्जिद का निर्माण कराया गया था।
इसी निर्माण को लेकर गांव के एक व्यक्ति ने प्रशासन के समक्ष कई बार शिकायत प्रस्तुत की। शिकायतकर्ता का कहना था कि सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर निर्माण होने से आम लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए।
प्रशासन से शिकायत के बाद न्यायालय का लिया गया सहारा
बताया गया कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने तहसीलदार न्यायालय का रुख किया। उन्होंने न्यायालय में वाद दायर कर सार्वजनिक भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने और संबंधित भूमि को मुक्त कराने की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया गया। इसके बाद न्यायालय की ओर से आगे की प्रक्रिया निर्धारित की गई।
27 जनवरी 2025 को जारी हुआ था बेदखली आदेश
राजस्व न्यायालय से प्राप्त आदेश के आधार पर 27 जनवरी 2025 को बेदखली संबंधी आदेश जारी किया गया। इसके तहत संबंधित स्थल पर नोटिस चस्पा किया गया और निर्धारित समय के भीतर सार्वजनिक भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन ने नोटिस में 8 अप्रैल तक भूमि खाली करने की समय-सीमा तय की थी। इस अवधि के भीतर संबंधित पक्ष को आवश्यक कानूनी विकल्प अपनाने का अवसर भी उपलब्ध था।
एडीएम कोर्ट में अपील लंबित होने से रुकी कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा अगला फैसला
बेदखली आदेश जारी होने के बाद संबंधित पक्ष ने उच्च राजस्व प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर की। जानकारी के अनुसार यह अपील वर्तमान में एडीएम कोर्ट में विचाराधीन है। इसी कारण प्रशासन ने फिलहाल ध्वस्तीकरण या अन्य किसी प्रकार की कार्रवाई रोक दी है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जब तक अपील पर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नोटिस के बाद मस्जिद से हटाया गया सामान
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा भवन के अंदर रखा गया कुछ सामान बाहर निकाल लिया गया। बताया गया कि पंखे, इन्वर्टर और अन्य उपयोगी सामग्री सुरक्षित स्थान पर रख दिए गए हैं।
हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल नोटिस जारी होने या सामान हटाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। आगे का निर्णय न्यायालय के आदेश के आधार पर ही लिया जाएगा।
प्रशासन ने कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही
अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में सभी प्रक्रियाएं राजस्व कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पूरी की जाती हैं। किसी भी निर्माण को हटाने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस देना, जवाब प्रस्तुत करने का अवसर देना तथा अपील का अधिकार उपलब्ध कराना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
इसी क्रम में वर्तमान मामले में भी संबंधित पक्ष ने अपील दायर की है, जिसके कारण प्रशासन अंतिम आदेश आने तक प्रतीक्षा करेगा।
सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में क्या होती है प्रक्रिया
राजस्व कानून के अनुसार यदि किसी सार्वजनिक भूमि, सड़क, नाली, चारागाह या अन्य सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित अधिकारी पहले राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करते हैं। इसके बाद मौके का निरीक्षण कराया जाता है और आवश्यक होने पर संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया जाता है।
यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो बेदखली की प्रक्रिया शुरू की जाती है। हालांकि संबंधित पक्ष को आदेश के विरुद्ध अपील करने का अधिकार भी प्राप्त होता है। जब तक अपील पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, कई मामलों में प्रशासन न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करता है।
न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा अगला कदम
वर्तमान मामले में भी प्रशासन का कहना है कि एडीएम कोर्ट में लंबित अपील पर जो भी निर्णय आएगा, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि न्यायालय बेदखली आदेश को बरकरार रखता है तो प्रशासन आगे की प्रक्रिया तय करेगा, जबकि आदेश में किसी प्रकार का संशोधन या स्थगन होने की स्थिति में उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी कार्रवाई के दौरान न्यायालय के निर्देशों तथा विधिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की नजर अब न्यायालय के फैसले पर
गड़हिया चिंतामन गांव का यह मामला अब पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर हो गया है। स्थानीय स्तर पर लोग एडीएम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि उसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित भूमि और उस पर बने निर्माण के संबंध में आगे क्या प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के अंतिम आदेश से पहले किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी और सभी प्रक्रियाएं कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत ही आगे बढ़ेंगी।



