कुरुक्षेत्र को खेल शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी, नवीन जिन्दल ने केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव

कुरुक्षेत्र को खेल शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी, नवीन जिन्दल ने केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव

खेल मंत्री मनसुख मंडाविया से की पहल की मांग, खेल विज्ञान, बायोमैकेनिक्स, प्रशिक्षण और पैरा-स्पोर्ट्स में अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

हरियाणा में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और वैज्ञानिक अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कुरुक्षेत्र के लोकसभा सांसद नवीन जिन्दल ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इस पहल का उद्देश्य हरियाणा सहित पूरे उत्तर भारत के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल अनुसंधान से जुड़े लोगों को उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सांसद नवीन जिन्दल ने 9 अक्टूबर 2026 को भेजे पत्र में कहा है कि हरियाणा ने कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, निशानेबाजी और कबड्डी जैसे खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। प्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। ऐसे में कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थान का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होने से खेल प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए एक बेहतर व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

प्रस्ताव के अनुसार, केंद्र में केवल खिलाड़ियों के प्रशिक्षण तक सीमित गतिविधियां नहीं होंगी, बल्कि खेल विज्ञान, खेल तकनीक, खेल मनोविज्ञान, फिजियोथेरेपी, बायोमैकेनिक्स और खिलाड़ियों के पुनर्वास जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही पैरा-स्पोर्ट्स और पारंपरिक भारतीय खेल विधाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने तथा विकसित करने के लिए अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की योजना का सुझाव दिया गया है।

सांसद ने केंद्रीय खेल मंत्रालय से इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी देने और संबंधित अधिकारियों तथा राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय को कुरुक्षेत्र की उपयुक्तता का आकलन करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और आगे की प्रक्रिया पूरी होती है, तो कुरुक्षेत्र में खेल शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र का प्रस्ताव

नवीन जिन्दल ने अपने पत्र में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अधिनियम, 2018 का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव के लिए कानूनी आधार भी प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, अधिनियम की धारा 5(1)(v) के तहत मणिपुर में स्थापित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय को देश के विभिन्न हिस्सों में क्षेत्रीय केंद्र, अध्ययन केंद्र और अनुसंधान इकाइयां स्थापित करने का अधिकार प्राप्त है। इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति का प्रावधान भी मौजूद है।

इसी व्यवस्था के आधार पर सांसद ने कुरुक्षेत्र में विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की संभावना पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि खेल शिक्षा और अनुसंधान से संबंधित संस्थागत सुविधाओं का विस्तार होने से हरियाणा की खेल प्रतिभाओं को अपने राज्य में ही उच्चस्तरीय शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग मिल सकेगा।

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होने की स्थिति में खिलाड़ियों को खेल प्रशिक्षण के साथ-साथ खेलों से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने के अवसर भी मिल सकते हैं। आधुनिक खेलों में प्रदर्शन सुधारने के लिए शारीरिक क्षमता, तकनीक, पोषण, मानसिक तैयारी और चोटों से बचाव जैसे पहलुओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में खेल विज्ञान पर आधारित शिक्षा और अनुसंधान खिलाड़ियों की तैयारी को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकते हैं।

हालांकि, यह फिलहाल सांसद की ओर से दिया गया प्रस्ताव है। क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना, उसके स्वरूप, सुविधाओं और संचालन से संबंधित अंतिम निर्णय केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थानों की प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।

कुरुक्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी बनेगी आधार

सांसद नवीन जिन्दल ने कुरुक्षेत्र को क्षेत्रीय केंद्र के लिए उपयुक्त स्थान बताते हुए यहां मौजूद प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का भी उल्लेख किया है। कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय जैसे संस्थान स्थित हैं। इन संस्थानों की मौजूदगी से खेल विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बन सकती हैं।

प्रस्ताव में खेल तकनीक, बायोमैकेनिक्स, खेल मनोविज्ञान और फिजियोथेरेपी जैसे विषयों में अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इन क्षेत्रों में तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञता का उपयोग खिलाड़ियों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने, प्रशिक्षण पद्धतियों में सुधार लाने तथा खेलों से संबंधित समस्याओं के समाधान खोजने में किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर, बायोमैकेनिक्स के माध्यम से खिलाड़ियों की गतिविधियों और तकनीकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। खेल मनोविज्ञान खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी और दबाव से निपटने की क्षमता को समझने में मदद कर सकता है। वहीं, फिजियोथेरेपी और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं खेल के दौरान चोटिल होने वाले खिलाड़ियों की देखभाल और मैदान पर वापसी की प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती हैं।

यदि प्रस्तावित केंद्र में इन क्षेत्रों के लिए आवश्यक शैक्षणिक और तकनीकी सुविधाएं विकसित की जाती हैं, तो खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, शोधकर्ताओं और खेल से जुड़े अन्य विशेषज्ञों को भी लाभ मिल सकता है।

खेल विज्ञान से लेकर पैरा-स्पोर्ट्स तक पर रहेगा ध्यान

नवीन जिन्दल के प्रस्ताव में क्षेत्रीय केंद्र के संभावित कार्यक्षेत्र को व्यापक रखने की बात कही गई है। इसके तहत खेल विज्ञान और पुनर्वास, प्रशिक्षकों की शिक्षा, खेल तकनीक, बायोमैकेनिक्स, पैरा-स्पोर्ट्स तथा पारंपरिक भारतीय खेल विधाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रमुखता देने का सुझाव दिया गया है।

खेल विज्ञान के अंतर्गत खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता, प्रशिक्षण की प्रभावशीलता और खेल प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा सकता है। प्रशिक्षकों की शिक्षा के माध्यम से आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। वहीं, खेल तकनीक के क्षेत्र में आधुनिक उपकरणों और विश्लेषणात्मक प्रणालियों के उपयोग की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

प्रस्ताव में पैरा-स्पोर्ट्स को भी शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में खिलाड़ियों की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण, सहायक तकनीक और पुनर्वास संबंधी अनुसंधान उपयोगी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त पारंपरिक भारतीय खेल विधाओं को वैज्ञानिक आधार पर समझने और उनकी प्रशिक्षण पद्धतियों को विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।

यदि इन सभी क्षेत्रों को केंद्र की गतिविधियों में शामिल किया जाता है, तो खेल शिक्षा का दायरा केवल मैदान पर प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से खेलों से जुड़े तकनीकी, शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधी पहलुओं को भी आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

उत्तर भारत के खिलाड़ियों को मिल सकती है सुविधा

सांसद नवीन जिन्दल ने कुरुक्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और रेल तथा सड़क मार्ग से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी को भी प्रस्ताव के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनके अनुसार, कुरुक्षेत्र उत्तर भारत की खेल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयुक्त स्थान साबित हो सकता है।

किसी बड़े खेल संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करती है कि खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए वहां पहुंचना कितना सुविधाजनक है। कुरुक्षेत्र की परिवहन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव में इसे उत्तर भारत के लिए संभावित केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होने की स्थिति में हरियाणा के अलावा आसपास के राज्यों के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को भी लाभ मिलने की संभावना हो सकती है। उन्हें खेल शिक्षा, तकनीकी सहयोग और अनुसंधान संबंधी सुविधाओं के लिए दूर स्थित संस्थानों पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, केंद्र का वास्तविक दायरा और किन क्षेत्रों के खिलाड़ियों को सुविधाएं मिलेंगी, यह संस्थान की स्वीकृत योजना और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगा।

हरियाणा में कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, निशानेबाजी और कबड्डी जैसे खेलों की मजबूत परंपरा रही है। ऐसे में खेल प्रशिक्षण के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान की सुविधाएं विकसित होने से इन खेलों में खिलाड़ियों की तैयारी को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

खेल मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी की मांग

नवीन जिन्दल ने केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से आग्रह किया है कि कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विश्वविद्यालय को कुरुक्षेत्र का आकलन करने के निर्देश देने की मांग की है।

इस आकलन के दौरान प्रस्तावित केंद्र के लिए स्थान की उपयुक्तता, उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों और खेल अनुसंधान की संभावनाओं जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद ही केंद्र की स्थापना को लेकर आगे की प्रक्रिया और आवश्यक निर्णयों का रास्ता स्पष्ट होगा।

सांसद ने इस प्रस्ताव की प्रतियां खेल सचिव हरि रंजन राव, केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खड़से, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश के खेल मंत्री तथा राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय, इम्फाल के कुलपति को भी सूचनार्थ और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी हैं। इससे संबंधित मंत्रालय, राज्य सरकार और विश्वविद्यालय के स्तर पर प्रस्ताव पर विचार किए जाने का मार्ग खुलता है।

विकसित भारत और विकसित हरियाणा की अवधारणा से जोड़ी पहल

नवीन जिन्दल ने अपने प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और ‘विकसित हरियाणा’ की अवधारणा से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान की सुविधाओं का विस्तार होने से प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं।

खेल क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिभा और मेहनत के साथ आधुनिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और उचित पुनर्वास सुविधाओं की भी अहम भूमिका होती है। ऐसे में किसी राष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थान का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की पहल से इन सभी पहलुओं को एक साथ विकसित करने की संभावनाएं बन सकती हैं।

कुल मिलाकर, कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव हरियाणा में खेल शिक्षा और अनुसंधान के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार, खेल मंत्रालय और राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की ओर से होने वाली कार्रवाई अहम होगी। सैद्धांतिक मंजूरी और स्थान के आकलन की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होगा कि कुरुक्षेत्र में इस केंद्र की स्थापना किस रूप में और किन सुविधाओं के साथ की जा सकती है।