2027 की वैश्विक निवेशक बैठक में शामिल होने का आमंत्रण, आइकिया की 3500 करोड़ रुपये की परियोजना और औद्योगिक-तकनीकी साझेदारी पर चर्चा
हरियाणा को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए प्रमुख निवेश केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीडन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल वार्ता की। इस बैठक में शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल और राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्वीडिश कंपनियों को हरियाणा में निवेश करने, नए औद्योगिक प्रतिष्ठान स्थापित करने और तकनीकी सहयोग के माध्यम से दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आमंत्रण दिया।
बैठक के दौरान हरियाणा में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों, निवेश की संभावनाओं और भारत-स्वीडन के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों को वर्ष 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट’ में शामिल होने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार नए निवेशकों का स्वागत करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
वार्ता में आइकिया की 3500 करोड़ रुपये की परियोजना और कार्ल गुस्ताफ संयंत्र से जुड़े अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता को साथ लाकर ‘मेड विद स्वीडन’ साझेदारी को नई दिशा देने की संभावना पर जोर दिया। उनका कहना था कि दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं और तकनीकी अनुभव का बेहतर उपयोग कर निवेश, उत्पादन और नवाचार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
स्वीडिश उद्योगों के लिए हरियाणा में निवेश के अवसर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीडिश उद्योगपतियों को हरियाणा की औद्योगिक क्षमताओं और निवेश के लिए उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की स्थापना, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हरियाणा को निवेश और उत्पादन के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में देखें।
हरियाणा की भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक आधार, कुशल मानव संसाधन और बड़े बाजारों तक पहुंच को निवेश के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य उत्तर भारत के बड़े बाजारों तक पहुंच का अहम प्रवेश द्वार है। यहां निवेश करने वाली कंपनियों को क्षेत्रीय बाजारों से जुड़ने और अपनी औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने के अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे हरियाणा में उपलब्ध अवसरों का आकलन करें और राज्य के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करें। उन्होंने कहा कि सरकार नए उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश से संबंधित प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर काम कर रही है।
बैठक में सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद को निवेश आकर्षित करने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया। ऐसे संवाद से कंपनियों को राज्य की नीतियों, उपलब्ध सुविधाओं और संभावित औद्योगिक क्षेत्रों के बारे में जानकारी मिल सकती है। वहीं, सरकार को भी निवेशकों की जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है।
2027 की वैश्विक निवेशक बैठक में आने का न्योता
मुख्यमंत्री ने स्वीडिश उद्योग प्रतिनिधियों को वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। इस बैठक का उद्देश्य हरियाणा में निवेश की संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना और विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों को राज्य में कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से कहा कि वे निवेश के अवसरों का लाभ उठाते हुए हरियाणा के साथ मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित करें। राज्य सरकार नए उद्योगों के साथ-साथ मौजूदा निवेश संबंधों को भी विस्तार देने की इच्छुक है। इसके लिए तकनीकी सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और निवेश से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बातचीत की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय निवेशक बैठकें राज्यों को विदेशी कंपनियों के सामने अपनी औद्योगिक क्षमता प्रस्तुत करने का अवसर देती हैं। इनके माध्यम से निवेशकों को स्थानीय बाजार, औद्योगिक ढांचे, कुशल श्रमबल और सरकारी सुविधाओं की जानकारी मिलती है। हरियाणा सरकार भी इस मंच के जरिये अधिक कंपनियों को राज्य की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।
स्वीडिश कंपनियों को दिए गए निमंत्रण से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार यूरोपीय उद्योगों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, बैठक में चर्चा किए गए अवसरों के वास्तविक निवेश में बदलने के लिए कंपनियों के निर्णय, परियोजनाओं की व्यवहार्यता और आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।
आइकिया की 3500 करोड़ रुपये की परियोजना पर चर्चा
राउंड टेबल वार्ता में आइकिया की 3500 करोड़ रुपये की परियोजना से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हुई। यह विषय हरियाणा में बड़े निवेश और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। बैठक में कार्ल गुस्ताफ संयंत्र से जुड़े अवसरों पर भी विचार किया गया।
इन परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और स्वीडिश कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को सामने रखा। हरियाणा सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां राज्य में अपने कारोबार का विस्तार करें और नए क्षेत्रों में निवेश के विकल्प तलाशें।
औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़ी चर्चाओं में निवेश के साथ तकनीकी विशेषज्ञता, उत्पादन क्षमता और स्थानीय उद्योगों के साथ सहयोग जैसे पहलुओं की भी अहम भूमिका हो सकती है। इस तरह की साझेदारी से कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी तकनीक का उपयोग व्यापक स्तर पर करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, बैठक में इन परियोजनाओं को लेकर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि किसी नए निवेश या विस्तार को अंतिम मंजूरी मिल गई है। प्रस्तावों और अवसरों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए संबंधित कंपनियों और सरकार के बीच आगे की बातचीत तथा आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड विद स्वीडन’ को जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और स्वीडन की तकनीकी विशेषज्ञता को जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं को एक साथ लाकर ‘मेड विद स्वीडन’ साझेदारी को नई दिशा दी जा सकती है।
इस विचार के तहत भारत में उत्पादन और औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं को स्वीडन की तकनीक, विशेषज्ञता और नवाचार से जोड़ने पर बल दिया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग से नए औद्योगिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं और निवेश संबंधों को मजबूत बनाया जा सकता है।
तकनीकी साझेदारी का महत्व केवल निवेश राशि तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से आधुनिक उत्पादन प्रणालियों, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। हरियाणा में पहले से मौजूद औद्योगिक आधार इस प्रकार की साझेदारी को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कंपनियों से आग्रह किया कि वे हरियाणा को अपने दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी सहयोग की योजनाओं में शामिल करें। सरकार की ओर से उद्योगों की स्थापना और निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
भारत-स्वीडन की रणनीतिक साझेदारी से खुलेंगे नए रास्ते
मुख्यमंत्री ने मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा का उल्लेख करते हुए भारत और स्वीडन के बीच रणनीतिक साझेदारी तथा साझा पंचवर्षीय कार्ययोजना की चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत और स्वीडन ने अगले पांच वर्षों में व्यापार, निवेश और आर्थिक आदान-प्रदान को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने इस लक्ष्य को दोनों देशों के बीच औद्योगिक संबंधों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आर्थिक प्राथमिकताओं और तकनीकी क्षमताओं में सहयोग की संभावनाएं हैं। ऐसे में हरियाणा जैसे औद्योगिक रूप से सक्रिय राज्य को स्वीडिश कंपनियों के साथ साझेदारी से लाभ मिल सकता है। राज्य सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन रहे आर्थिक अवसरों का उपयोग प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए किया जाए।
रणनीतिक साझेदारी और साझा कार्ययोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों को हरियाणा में निवेश की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और दीर्घकालिक कारोबारी संबंधों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी जताई।
सिंगल विंडो व्यवस्था से निवेश प्रक्रिया आसान बनाने का दावा
मुख्यमंत्री ने हरियाणा के औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन के साथ निवेश से जुड़ी प्रशासनिक सुविधाओं को भी राज्य की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि ‘इन्वेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो सिस्टम’ को मजबूत किया गया है, ताकि निवेशकों के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं सरल और तेज हो सकें।
सिंगल विंडो व्यवस्था का उद्देश्य निवेश से संबंधित अलग-अलग अनुमतियों और औपचारिकताओं के लिए एक व्यवस्थित माध्यम उपलब्ध कराना है। इससे कंपनियों को आवश्यक प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने में सुविधा मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में औद्योगिक निवेश के लिए उपयुक्त आधार मौजूद है। राज्य की बाजारों तक पहुंच, कुशल मानव संसाधन और औद्योगिक गतिविधियों की मौजूदगी कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकती है। सरकार इन क्षमताओं के आधार पर नए निवेशकों को आकर्षित करना चाहती है।
उन्होंने स्वीडिश कंपनियों से राज्य में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आग्रह किया। सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने पर दिया गया जोर इस बात को दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों के लिए प्रशासनिक सुविधा को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपुल गोयल ने भी निवेश संबंध मजबूत करने पर दिया जोर
राउंड टेबल वार्ता में शामिल शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने भी हरियाणा और स्वीडिश कंपनियों के बीच औद्योगिक संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मौजूदा निवेश संबंधों को मजबूत करने के साथ नए उद्योगों और तकनीकी सहयोग के अवसर हरियाणा में लाने का प्रयास कर रही है।
विपुल गोयल के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संवाद को आगे बढ़ाकर प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाए। इसके लिए मौजूदा कारोबारी संबंधों को मजबूत करने और नई साझेदारियों की संभावनाओं पर काम करने की जरूरत है।
बैठक में राज्य सरकार के अधिकारियों की भागीदारी भी रही। इससे निवेश से जुड़े मुद्दों पर सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
हरियाणा को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत बनाने की कोशिश
स्वीडन में हुई यह राउंड टेबल वार्ता हरियाणा सरकार के अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने के प्रयासों का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों के सामने राज्य की औद्योगिक क्षमता, कुशल मानव संसाधन, बाजारों तक पहुंच और निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयासों को प्रमुखता से रखा।
आइकिया की परियोजना और कार्ल गुस्ताफ संयंत्र से जुड़े अवसरों पर चर्चा के साथ तकनीकी सहयोग और औद्योगिक साझेदारी को भी महत्व दिया गया। इसके अतिरिक्त 2027 की वैश्विक निवेशक बैठक में शामिल होने का निमंत्रण देकर स्वीडिश कंपनियों के साथ संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की स्वीडन यात्रा के दौरान हुई यह वार्ता हरियाणा में विदेशी निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है। अब इस संवाद का वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि स्वीडिश कंपनियां हरियाणा में निवेश के प्रस्तावों को किस तरह आगे बढ़ाती हैं और संभावित परियोजनाएं किस चरण तक पहुंचती हैं।




