खनौरी बॉर्डर पर फिर किसानों का डेरा, दिल्ली कूच से पहले रोका गया 51 सदस्यीय जत्था; केंद्र से वार्ता पर अड़े प्रदर्शनकारी

खनौरी बॉर्डर पर फिर किसानों का डेरा, दिल्ली कूच से पहले रोका गया 51 सदस्यीय जत्था; केंद्र से वार्ता पर अड़े प्रदर्शनकारी

भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर पैदल मार्च कर रहे किसानों का 51 सदस्यीय जत्था हरियाणा-पंजाब सीमा पर खनौरी बॉर्डर पहुंचने के बाद आगे नहीं बढ़ सका। हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर को पूरी तरह बंद कर दिया है और किसानों को पैदल भी राज्य की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद किसानों ने बॉर्डर से पीछे सड़क पर ही अपना डेरा जमा लिया और रात वहीं बिताई।

किसानों ने सड़क पर बिस्तर लगाकर रात गुजारी। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया है। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक तय नहीं होती या उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक वे खनौरी बॉर्डर से हटने वाले नहीं हैं।

किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा प्रशासन ने खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बॉर्डर पर कंक्रीट बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद किया गया है। किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल से जुड़े उपकरण भी मौके पर तैयार रखे गए हैं।

फिलहाल किसान बॉर्डर से करीब 200 मीटर पीछे सड़क पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने वहीं अस्थायी तौर पर अपना ठिकाना बना लिया है। किसान नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते। उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।

रविवार को दिल्ली जाने की अनुमति और बॉर्डर पर स्थिति को लेकर किसान प्रतिनिधियों तथा हरियाणा प्रशासन के बीच बैठक भी हुई। बातचीत के दौरान प्रशासन की ओर से किसानों को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करवाने का प्रस्ताव दिया गया। प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जा सकती है।

हालांकि किसान प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उनका तर्क था कि जिन मुद्दों को लेकर वे दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं, वे हरियाणा सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े नहीं हैं। किसानों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर ही लिया जा सकता है। इसलिए वे मुख्यमंत्री से मुलाकात के बजाय केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बातचीत चाहते हैं।

किसान संगठनों ने प्रशासन के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के साथ बैठक तय कर दी जाती है तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है। अन्यथा वे खनौरी बॉर्डर पर ही अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि पिछली बार किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियों के काफिले को रास्ते में रोका गया था। इस बार आंदोलनकारी केवल 51 किसानों का पैदल जत्था लेकर दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों ने इस बार भी शांतिपूर्ण तरीके को ही चुना है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें हरियाणा की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही।

डल्लेवाल के अनुसार, किसानों का मकसद किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है। वे केवल अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने और संबंधित मंत्रियों के साथ बातचीत करने के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसानों की बात सुनने के लिए तैयार है तो उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के बजाय वार्ता का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

किसानों के आंदोलन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। किसान संगठनों को आशंका है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का कृषि क्षेत्र और भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा किसान कई अन्य लंबे समय से लंबित कृषि मुद्दों को भी केंद्र सरकार के सामने रखना चाहते हैं।

आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका दावा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और कृषि नीतियों का सीधा प्रभाव किसानों की आय, फसलों के बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से वे केंद्र सरकार के साथ सीधे संवाद की मांग कर रहे हैं।

खनौरी बॉर्डर पर किसानों के पहुंचने के बाद प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए गए हैं। बॉर्डर पर लगाए गए कंक्रीट अवरोधों के कारण वाहनों के साथ-साथ पैदल आवाजाही भी रोक दी गई है। प्रशासन की ओर से किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया है।

वहीं किसान नेताओं ने भी अपने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। किसान किसी प्रकार की हिंसा या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं करना चाहते, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में हैं।

सोमवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की खनौरी बॉर्डर पर महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। किसान नेता यह तय करेंगे कि दिल्ली कूच की कोशिश किस तरह आगे बढ़ाई जाए और केंद्र सरकार पर बातचीत के लिए दबाव बनाने के लिए अगले कदम क्या हों।

इसके साथ ही हरियाणा प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच एक और दौर की बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो गतिरोध खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। हालांकि फिलहाल किसान केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बैठक की अपनी मांग पर कायम हैं।

खनौरी बॉर्डर पर मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी किसी प्रकार के टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है। भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ वाटर कैनन और आंसू गैस के उपकरण तैयार रखे गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां किसानों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

किसानों की ओर से भी साफ कर दिया गया है कि वे बिना बातचीत के पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से वार्ता का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे।

किसान संगठनों का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब कृषि मुद्दों को लेकर केंद्र और किसान संगठनों के बीच संवाद की मांग फिर तेज हो रही है। किसान नेताओं का कहना है कि पिछले अनुभवों के बावजूद वे इस बार सीमित संख्या में किसानों के शांतिपूर्ण पैदल जत्थे के जरिए अपनी बात दिल्ली तक पहुंचाना चाहते हैं।

51 किसानों के इस जत्थे को रोकने के बाद अब पूरा घटनाक्रम खनौरी बॉर्डर पर केंद्रित हो गया है। एक ओर किसान केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हरियाणा प्रशासन ने सीमा को बंद कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

फिलहाल स्थिति शांत है, लेकिन दोनों पक्षों के रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। किसान दिल्ली जाने की अनुमति या केंद्र सरकार के साथ बैठक की तारीख तय होने तक बॉर्डर पर डटे रहने की बात कह रहे हैं। दूसरी तरफ प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी तरह की टकराव वाली स्थिति पैदा न हो।

अब सोमवार को होने वाली किसान संगठनों की बैठक और प्रशासन के साथ संभावित बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। इसी के आधार पर तय होगा कि 51 सदस्यीय जत्था दिल्ली की ओर आगे बढ़ने की कोशिश करेगा या फिर खनौरी बॉर्डर पर ही आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा।