दो हमले, कई सवाल और सुरक्षा पर संदेह; हरसिमरत बादल ने NIA जांच के लिए अमित शाह को लिखा पत्र

दो हमले, कई सवाल और सुरक्षा पर संदेह; हरसिमरत बादल ने NIA जांच के लिए अमित शाह को लिखा पत्र

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के बाद उनकी पत्नी और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मामले की जांच को लेकर केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। हरसिमरत कौर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सुखबीर बादल पर हुए दोनों हमलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए केवल स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी की जांच से ही पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सकता है।

हरसिमरत कौर ने पंजाब पुलिस की जांच व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्य में पुलिस व्यवस्था राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम कर रही है या नहीं, इसे लेकर उनका भरोसा बेहद कम है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया कि दोनों घटनाओं को अलग-अलग मामलों के तौर पर देखने के बजाय इनके बीच संभावित संबंधों की भी जांच कराई जाए।

अमित शाह को भेजे पत्र में हरसिमरत कौर ने कहा कि सुखबीर बादल पर 13 अगस्त को नांदेड़ के एक गुरुद्वारे में हमला हुआ, जिसमें हमलावर ने तलवार से वार करने की कोशिश की। इस घटना में सुखबीर बादल के दाहिने हाथ में चोट आई। उन्होंने कहा कि अगर मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मी ने अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावर को रोकने की कोशिश नहीं की होती, तो घटना का परिणाम बेहद गंभीर हो सकता था।

हरसिमरत कौर ने इस घटना को केवल एक आकस्मिक हमला मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उनके पति की जान को खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने पत्र में दिसंबर 2024 की उस घटना का भी उल्लेख किया, जब अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर में सुखबीर बादल पर गोली चलाकर उनकी हत्या का प्रयास किया गया था।

उनके मुताबिक, 4 दिसंबर 2024 को सुखबीर बादल श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से सुनाई गई धार्मिक सेवा के तहत श्री हरमंदिर साहिब परिसर में सेवा कर रहे थे। इसी दौरान उन पर गोली चलाने की कोशिश हुई थी। उस समय भी सुरक्षा कर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों की सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया था।

हरसिमरत कौर ने अपने पत्र में दोनों घटनाओं के बीच समानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि क्या दोनों हमले किसी एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे या फिर इनके पीछे अलग-अलग कारण और लोग थे।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की कि NIA को दोनों घटनाओं की व्यापक जांच का जिम्मा सौंपा जाए। उनके अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी हमलों के पीछे मौजूद व्यक्तियों और संगठनों की पहचान करने के साथ-साथ संभावित चरमपंथी या विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर सकती है।

हरसिमरत कौर ने यह भी सवाल उठाया कि क्या दोनों हमलों से पहले पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी और क्या किसी स्तर पर सुरक्षा में चूक हुई। उन्होंने इस पहलू की भी जांच की मांग की कि कहीं पुलिस या सुरक्षा तंत्र की ओर से किसी प्रकार की विफलता अथवा जानबूझकर लापरवाही तो नहीं हुई।

उनका कहना है कि दूसरे हमले की घटना ने पहले हमले की जांच और उससे निपटने के तरीके को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हरसिमरत कौर के मुताबिक, अगर पहले हमले के बाद सभी संभावित पहलुओं की गंभीरता से जांच की गई होती और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर किया गया होता, तो दूसरी घटना को लेकर स्थिति अलग हो सकती थी।

नांदेड़ की घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थल पर किसी राजनीतिक नेता पर हमला होना अपने आप में बेहद गंभीर विषय है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं केवल किसी व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि इनके व्यापक सामाजिक और धार्मिक प्रभाव भी हो सकते हैं।

हरसिमरत कौर ने पत्र में गुरुद्वारों को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर लगातार होने वाली हिंसक घटनाओं के पीछे यदि कोई संगठित साजिश है तो उसका पता लगाया जाना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी घटनाओं का उद्देश्य पवित्र धार्मिक स्थलों की छवि को नुकसान पहुंचाना तथा सिख समुदाय और पंजाब को बदनाम करना भी हो सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस पहलू की भी जांच की जाए कि क्या इन घटनाओं के पीछे किसी बाहरी संगठन, चरमपंथी समूह या विदेश से संचालित नेटवर्क की भूमिका है। उनका कहना है कि ऐसी संभावनाओं को बिना जांच के खारिज नहीं किया जा सकता।

हरसिमरत कौर ने यह भी कहा कि मामले की जांच किसी ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो सके। इसी कारण उन्होंने NIA जांच की मांग को उचित बताया। उनके मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी के पास ऐसे मामलों की जांच के लिए आवश्यक अधिकार और संसाधन उपलब्ध हैं और वह अलग-अलग राज्यों तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को भी जोड़कर जांच आगे बढ़ा सकती है।

सुखबीर बादल पर नांदेड़ में हुए हमले के बाद अकाली दल की ओर से भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। पार्टी के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुखबीर बादल उसके प्रमुख हैं और उन पर पहले भी जानलेवा हमला हो चुका है।

दिसंबर 2024 में अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब में हुए हमले ने पंजाब की राजनीति में काफी हलचल पैदा की थी। उस घटना के बाद सुखबीर बादल की सुरक्षा और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। अब नांदेड़ की घटना के बाद हरसिमरत कौर ने दोनों घटनाओं को एक साथ रखकर केंद्रीय जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि दो अलग-अलग स्थानों पर और अलग-अलग समय में हुए हमलों के बावजूद दोनों मामलों में कुछ ऐसे पहलू हैं, जिनकी विस्तृत पड़ताल आवश्यक है। उन्होंने गृह मंत्री से आग्रह किया कि जांच का दायरा केवल हमलावर की गिरफ्तारी या घटना के तत्काल कारणों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि यह भी पता लगाया जाए कि हमले की योजना किस स्तर पर बनी, इसके पीछे किसका उद्देश्य था और क्या किसी बड़े नेटवर्क ने इसमें भूमिका निभाई।

हरसिमरत कौर ने पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि दोनों घटनाओं से पहले और दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं रही। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि क्या संबंधित एजेंसियों के पास किसी संभावित खतरे से जुड़ी कोई जानकारी थी और यदि थी तो उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

उनके पत्र का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने नांदेड़ की घटना को केवल महाराष्ट्र तक सीमित मामला नहीं माना है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार का अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क इन घटनाओं से जुड़ा है, तो उसकी जांच राज्य पुलिस के स्तर पर सीमित रहने के बजाय केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।

हरसिमरत कौर ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक चिंता जताई। उनका कहना है कि गुरुद्वारे सिख समुदाय की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं और वहां हिंसक घटनाएं होने से समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इसलिए ऐसे मामलों की जांच सिर्फ कानून-व्यवस्था के सामान्य मामले के तौर पर नहीं बल्कि व्यापक साजिश की संभावनाओं को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि NIA जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि दोनों हमलों के बीच कोई कड़ी है या नहीं, इनके पीछे किसी संगठित समूह की भूमिका है या नहीं और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं।

फिलहाल हरसिमरत कौर की मांग के बाद मामला एक बार फिर राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से चर्चा में आ गया है। एक ओर सुखबीर बादल पर नांदेड़ में हुए हमले को लेकर जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर अकाली दल की ओर से इसे दिसंबर 2024 की अमृतसर घटना से जोड़कर देखने की मांग की जा रही है।

हरसिमरत कौर का कहना है कि दोनों घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही उन सभी सवालों का जवाब दे सकती है, जो लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करते हुए NIA को जांच सौंपने की मांग की है, ताकि हमलों के पीछे की वास्तविक वजह, संभावित साजिश, आरोपियों के नेटवर्क और सुरक्षा में हुई किसी भी चूक की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार हरसिमरत कौर की मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों घटनाओं की जांच को केंद्रीय एजेंसी के दायरे में लाया जाता है।