चंडीगढ़ नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बुधवार को हुई बैठक बारिश के बाद शहर में बिगड़े जलनिकासी प्रबंध को लेकर उठे सवालों के बीच हंगामे में बदल गई। बैठक में पार्षदों ने अधिकारियों से जलभराव की समस्या को लेकर तीखे सवाल किए और करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की स्थिति नहीं सुधरने पर जवाबदेही तय करने की मांग की। विवाद इतना बढ़ गया कि कमेटी के सामने रखे गए करीब दस प्रस्तावों में से किसी पर भी चर्चा नहीं हो सकी और आखिरकार बैठक स्थगित करनी पड़ी।
बैठक की शुरुआत जीरो आवर से हुई। इसी दौरान पार्षदों ने पिछले दिनों हुई बारिश के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में पैदा हुई समस्याओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। पार्षदों का कहना था कि कुछ घंटों की बारिश ने नगर निगम की तैयारियों और ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई इलाकों में पानी सड़कों पर जमा रहा, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क धंसने और सीवरेज लाइन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। लोगों को आवाजाही में परेशानी के साथ-साथ घरों और बेसमेंट में पानी भरने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पार्षदों ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि आखिर शहर में बार-बार जलभराव की स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है। उनका कहना था कि नगर निगम की ओर से नालियों और रोड गलियों की सफाई के नाम पर हर साल बड़ी राशि खर्च की जाती है। इसके अलावा जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों और संसाधनों का भी दावा किया जाता है। इसके बावजूद बारिश होते ही हालात खराब हो जाते हैं। पार्षदों ने पूछा कि अगर व्यवस्था पहले से तैयार थी तो दो घंटे की बारिश में शहर के कई हिस्सों में पानी क्यों भर गया।
बैठक में अधिकारियों से यह भी पूछा गया कि रोड गलियों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम पर खर्च होने वाली राशि का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। पार्षदों का तर्क था कि यदि नालियों और जलनिकासी मार्गों की नियमित सफाई हो रही है तो बारिश के दौरान पानी की निकासी बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बारिश से पहले नगर निगम ने किन इलाकों को संवेदनशील मानते हुए तैयारी की थी और वहां क्या-क्या काम किए गए।
मेयर सौरभ जोशी ने भी इस पूरे मामले पर अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब शहर के नागरिक जलभराव जैसी समस्याओं से परेशान हों, कई जगह बेसमेंट में पानी घुस रहा हो और सड़कें तक धंसने की शिकायतें सामने आ रही हों, तब केवल बैठकों और कागजी तैयारियों से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों से जलभराव के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस योजना और उसकी मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
मेयर और पार्षदों की नाराजगी का एक प्रमुख कारण यह भी रहा कि जलभराव की समस्या नई नहीं है। बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होना हर साल सामने आने वाली समस्या है। पार्षदों ने सवाल उठाया कि बार-बार सामने आने वाली इस परेशानी के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सका। उनका कहना था कि हर बारिश के बाद प्रशासन को जलभराव वाले स्थानों की पहचान करनी पड़ती है, जबकि इन स्थानों पर पहले से स्थायी सुधार किए जाने चाहिए।
बैठक में विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों को लेकर भी असंतोष सामने आया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि वित्त एवं अनुबंध कमेटी में ऐसे प्रस्ताव नहीं रखे गए, जिन पर शहर के विकास और वार्डों की जरूरतों से जुड़े काम आगे बढ़ सकें। पार्षद हरजीत सिंह ने विकास कार्यों के प्रस्ताव बैठक में शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने लालडोरा क्षेत्र से बाहर पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग का मुद्दा भी उठाया।
हरजीत सिंह विरोध दर्ज कराते हुए बैठक से बाहर चले गए। उनके बाहर जाने के बाद दूसरे पार्षदों ने भी बैठक से दूरी बनानी शुरू कर दी। एक-एक कर पार्षदों के बाहर निकलने से कमेटी की बैठक में कामकाज आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। लगातार बढ़ते विवाद को देखते हुए मेयर सौरभ जोशी ने बैठक को स्थगित करने का फैसला किया। इस तरह कमेटी के एजेंडे में शामिल करीब दस प्रस्तावों पर कोई निर्णय नहीं हो सका।
बैठक के दौरान पार्षद कंवरजीत राणा ने अपने वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुद्दा भी अधिकारियों के सामने उठाया। अधिकारियों की ओर से कहा गया कि नगर निगम के पास सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में कोई स्पष्ट नीति नहीं है। इस जवाब पर राणा ने सवाल उठाया कि अगर ऐसी कोई नीति नहीं है तो धनास में सीसीटीवी कैमरे किस आधार पर लगाए गए। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले में स्पष्टता मांगी और पहले दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई का भी ब्योरा मांगा।
राणा ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि इस संबंध में सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश के बाद क्या कार्रवाई की गई। इस मुद्दे को लेकर बैठक में उनकी अधिकारियों के साथ तीखी बहस हुई। उनका कहना था कि यदि नगर निगम अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा और निगरानी से जुड़े उपकरण लगाने का काम कर रहा है तो उसके लिए स्पष्ट नियम और समान प्रक्रिया होनी चाहिए। किसी एक क्षेत्र में सुविधा उपलब्ध कराने और दूसरे क्षेत्र में नीति का हवाला देने पर पार्षदों ने सवाल खड़े किए।
वहीं, बुधवार की बैठक में हुए घटनाक्रम का असर गुरुवार को होने वाली नगर निगम सदन की आम बैठक पर भी दिखाई दे सकता है। सदन की बैठक में पिछले दिनों तैयार किए गए टेबल एजेंडे को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। इसी मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों की ओर से आपत्ति जताई जा चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि गुरुवार की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है।
नगर निगम अधिकारियों की ओर से पार्षदों को संदेश भेजकर कहा गया है कि यदि वे टेबल एजेंडे से जुड़े विषयों पर सदन में चर्चा करना चाहते हैं तो संबंधित एजेंडा अपने साथ लेकर आएं। इस पर पार्षदों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि करीब 227 करोड़ रुपये से जुड़े एजेंडे को ही जिस तरीके से तैयार किया गया है, उसमें खामियां हैं। ऐसे में पुराने एजेंडे की प्रतियां पार्षदों से मंगवाने के बजाय अधिकारियों को पहले उसमें आवश्यक सुधार करना चाहिए और इसके बाद संशोधित एजेंडा सदन के सामने रखना चाहिए।
विपक्षी पार्षदों का आरोप है कि अगर एजेंडे में ही प्रक्रिया संबंधी खामियां हैं तो उस पर चर्चा कराने से पहले उन्हें ठीक किया जाना जरूरी है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पहले से ही टेबल एजेंडे को लेकर विरोध दर्ज करा रही हैं। दोनों दलों की ओर से इसे सही प्रक्रिया के अनुरूप तैयार किए जाने की मांग की जा रही है।
बुधवार को वित्त एवं अनुबंध कमेटी की बैठक में जिस तरह जलभराव, विकास कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए, उससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक तरफ शहर में बारिश के बाद जलनिकासी को लेकर लोगों की परेशानियां सामने हैं, वहीं दूसरी तरफ विकास कार्यों और करोड़ों रुपये के एजेंडे को लेकर सदन के भीतर राजनीतिक टकराव बढ़ रहा है।
अब सभी की नजर गुरुवार को होने वाली नगर निगम की आम बैठक पर है। जलभराव और ड्रेनेज व्यवस्था के अलावा 227 करोड़ रुपये के टेबल एजेंडे को लेकर भी पार्षदों के बीच मतभेद सामने आने की संभावना है। बुधवार को कमेटी की बैठक बिना किसी प्रस्ताव पर चर्चा के स्थगित होने के बाद गुरुवार की बैठक में हंगामा बढ़ने के आसार और मजबूत हो गए हैं।



