पंजाब में खेलों का महासंग्राम फिर तैयार, 5 सितंबर से शुरू होगा ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ का चौथा सीजन

पंजाब में खेलों का महासंग्राम फिर तैयार, 5 सितंबर से शुरू होगा ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ का चौथा सीजन

पंजाब में खेलों को नई गति देने और युवाओं को सकारात्मक दिशा से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे संस्करण का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि इस बार राज्य के 10 लाख से अधिक खिलाड़ी इस खेल महोत्सव का हिस्सा बनेंगे। प्रतियोगिताओं की शुरुआत 5 सितंबर को बठिंडा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में उद्घाटन समारोह के साथ होगी, जबकि 29 नवंबर को पटियाला में समापन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि 2026 का संस्करण अब तक आयोजित हुए तीनों सीजन के मुकाबले सबसे व्यापक होगा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पंजाब की युवा शक्ति को नशे से दूर रखने और उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने में खेल अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों को नशे के खिलाफ अपनी मुहिम का महत्वपूर्ण हथियार मानती है। इस बार 10 लाख से अधिक खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे गांवों से लेकर शहरों तक खेल गतिविधियों को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस साल खेलों के लिए रिकॉर्ड बजट रखा गया है। उन्होंने बताया कि खेल क्षेत्र के लिए करीब 1,794 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। हजारों खेल मैदानों और जिम के विकास के साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और स्पोर्ट्स मेडिसिन जैसी सुविधाओं से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

भगवंत मान ने कहा कि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ केवल प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने का बड़ा मंच बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इन खेलों के जरिए ऐसे खिलाड़ियों की पहचान की जाए, जिन्हें आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की खासियत यह है कि इसमें उम्र की कोई सीमित सोच नहीं है और अलग-अलग पीढ़ियों को एक साथ मैदान में उतरने का अवसर मिलता है।

इस बार 14 वर्ष से लेकर 70 वर्ष से अधिक आयु तक के खिलाड़ियों के लिए नौ आयु वर्ग बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले संस्करणों में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों के लोगों ने एक साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। कई स्थानों पर दादा, पिता और बेटे को एक ही खेल मैदान में प्रतिस्पर्धा करते देखा गया। सरकार का प्रयास है कि इस परंपरा को और व्यापक बनाया जाए, ताकि खेल परिवार और समाज को जोड़ने का माध्यम बनें।

चौथे सीजन में कुल 38 खेल विधाओं में मुकाबले करवाए जाएंगे। इनमें चार पैरा खेल भी शामिल हैं। पैरा एथलेटिक्स, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा बैडमिंटन और व्हीलचेयर बास्केटबॉल को राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा पहली बार लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शन खेल के तौर पर शामिल किया गया है।

खिलाड़ियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को भी पहले के मुकाबले आसान बनाया गया है। सरकार के अनुसार पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क है और खेल विभाग के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। पहली बार कोड आधारित पंजीकरण व्यवस्था भी शुरू की गई है, जिससे खिलाड़ी अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी पंजीकरण कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण कराने और प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अपील की है।

प्रतियोगिताओं का आयोजन पंजाब के सभी 23 जिलों और 153 ब्लॉकों को कवर करते हुए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर किया जाएगा। राज्य स्तरीय मुकाबले 16 जिलों में होंगे। ब्लॉक स्तर पर सात खेलों, जिला स्तर पर 28 खेलों और राज्य स्तर पर 38 खेल विधाओं में मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। पैरा खेलों की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं अलग से 25 से 28 नवंबर तक लुधियाना में करवाई जाएंगी।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन 10 अक्टूबर से 23 नवंबर के बीच तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 10 से 15 अक्टूबर तक 13 खेल विधाओं के मुकाबले होंगे। दूसरा चरण 17 से 23 अक्टूबर तक चलेगा और इसमें भी 13 खेल शामिल होंगे। तीसरे चरण में 17 से 23 नवंबर तक 12 खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। इसके बाद 25 से 28 नवंबर तक लुधियाना में चार पैरा खेलों के मुकाबले होंगे। 29 नवंबर को पटियाला में आयोजन का समापन किया जाएगा।

खेलों को लेकर प्रदेश में माहौल बनाने के लिए मशाल मार्च भी शुरू किया गया है। यह टॉर्च रिले 12 अगस्त को शुरू हुई थी और उद्घाटन समारोह से पहले पंजाब के सभी जिलों से होकर गुजरेगी। सरकार का उद्देश्य इस मार्च के जरिए गांवों और शहरों में लोगों को खेल महोत्सव से जोड़ना और खिलाड़ियों में उत्साह पैदा करना है।

प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार राशि भी निर्धारित की गई है। राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 10 हजार रुपये, रजत पदक विजेता को 7 हजार रुपये और कांस्य पदक विजेता को 5 हजार रुपये दिए जाएंगे। 40 वर्ष तक की आयु वाले पदक विजेताओं को ग्रेडेशन प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। इससे वे सरकारी नौकरियों में खेल कोटे के तहत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने पिछले तीन संस्करणों के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि इन खेलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। पहले सीजन में करीब 3.50 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इसमें 9,688 खिलाड़ियों ने पदक जीते और 6.88 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि बांटी गई। दूसरे संस्करण में चार लाख से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी रही और 12,500 खिलाड़ियों ने पदक जीते। इस दौरान 8.87 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई। तीसरे सीजन में भागीदारी बढ़कर 4.35 लाख खिलाड़ियों तक पहुंच गई, जबकि 14,500 खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए और 9.76 करोड़ रुपये पुरस्कार के रूप में दिए गए। तीनों संस्करणों में कुल 25.51 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में बाढ़ की स्थिति के कारण खेलों का आयोजन नहीं हो सका था। अब चौथे संस्करण को पहले से ज्यादा बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि पंजाब की पहचान लंबे समय से खेल और खिलाड़ियों से जुड़ी रही है और सरकार इस गौरवशाली परंपरा को फिर मजबूत करना चाहती है।

भगवंत मान ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में नई खेल नीति लागू की थी। इसके बाद खेलों के लिए बजट बढ़ाने के साथ खिलाड़ियों को पुरस्कार, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए वित्तीय सहायता देने पर ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, पंजाब में पहली बार खेलों के लिए इतने बड़े स्तर पर बजट उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2022 के बाद राज्य के 40,415 खिलाड़ियों को कुल 135 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जा चुकी है।

खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए भी सरकार आर्थिक सहयोग दे रही है। ओलंपिक की तैयारी करने वाले खिलाड़ियों को 15 लाख रुपये और एशियाई खेलों तथा राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए 8 लाख रुपये तक की सहायता देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 85 खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले 11 खिलाड़ियों को पीसीएस और डीएसपी जैसे पदों पर नियुक्ति भी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में खेलों का मजबूत आधार तैयार करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जा रहा है। राज्यभर में करीब 3,100 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। इन मैदानों का इस्तेमाल ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के ब्लॉक और जिला स्तर के मुकाबलों में भी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि प्रतियोगिताएं केवल बड़े स्टेडियमों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों में उपलब्ध नई खेल सुविधाओं का भी अधिकतम उपयोग हो।

पंजाब के खेल प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने एशियाई खेलों में पंजाब के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, एशियाई खेल 2023 में पंजाब के खिलाड़ियों ने 20 पदक हासिल किए, जिनमें आठ स्वर्ण, छह रजत और छह कांस्य पदक शामिल थे। यह प्रदर्शन पंजाब के लिए लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने वाला रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय खेलों में पंजाब की भूमिका आज भी मजबूत है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान पालप्रीत सिंह बराड़ जैसे खिलाड़ी पंजाब से आते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों की उपलब्धियां राज्य के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

पंजाब में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी कर रहा है। इसके मुकाबले अक्टूबर और नवंबर में जालंधर तथा मोहाली में आयोजित किए जाएंगे। इससे राज्य के खेल प्रेमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और मुकाबलों को अपने घर में देखने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंजाब के कई खिलाड़ी इस समय अंतरराष्ट्रीय हॉकी मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पंजाब के आठ खिलाड़ी भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा हैं और विदेश में हो रहे विश्व हॉकी कप में देश की ओर से खेल रहे हैं। उन्होंने इसे राज्य की खेल प्रतिभा का प्रमाण बताया।

सरकार का कहना है कि ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ का चौथा संस्करण सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खेल संस्कृति को मजबूत करने, युवाओं को नियमित खेल गतिविधियों से जोड़ने और नई प्रतिभाओं को पहचानने की कोशिश की जाएगी। ब्लॉक और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, युवाओं, खेल हस्तियों और पूर्व ओलंपियनों को जोड़ने की योजना भी है, ताकि प्रतियोगिताएं लोगों की व्यापक भागीदारी का माध्यम बन सकें।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें सही अवसर और बेहतर मंच देने की है। सरकार का लक्ष्य है कि खेल सुविधाओं का विस्तार करने के साथ-साथ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और प्रतियोगिताओं के पर्याप्त अवसर मिलें। ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे संस्करण के जरिए इसी दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार 10 लाख से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी पंजाब में खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगी।