पहली बार मेजबानी कर रहा पंजाब, छह देशों की टीमें दिखाएंगी दमखम; जालंधर में होंगे लीग मुकाबले, मोहाली में सेमीफाइनल और फाइनल, 2030 हॉकी विश्व कप की मेजबानी पर भी नजर
जालंधर। पंजाब ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती देते हुए पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी शुरू कर दी है। जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन किया। इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के आयोजन को पंजाब की समृद्ध खेल विरासत और भारतीय हॉकी में राज्य के योगदान के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब विश्व हॉकी के मंच पर अपना खोया हुआ गौरव दोबारा हासिल करने के लिए तैयार है।
इस प्रतियोगिता में छह देशों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की टीमों का स्वागत किया तथा उनके कप्तानों को सम्मानित किया। इस मौके पर हॉकी से जुड़े पूर्व खिलाड़ियों, ओलंपियनों, हॉकी इंडिया और अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ के प्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी रही।
टूर्नामेंट के सभी लीग मुकाबले जालंधर में खेले जाएंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों का आयोजन मोहाली में होगा। इस आयोजन के जरिए पंजाब को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही राज्य सरकार वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी की तैयारियों को भी आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन केवल खेलों से जुड़ा कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राज्य की उस गौरवशाली परंपरा का उत्सव है, जिसने भारतीय हॉकी को अनेक महान खिलाड़ी दिए हैं।
हॉकी पंजाब की पहचान, अब गौरव लौटाने का लक्ष्य
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हॉकी का रिश्ता बेहद पुराना और मजबूत है। राज्य के खिलाड़ियों ने अपने जुनून, अनुशासन, मेहनत और समर्पण से भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। पंजाब की खेल विरासत देश की राष्ट्रीय पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी के इतिहास को पंजाब के खिलाड़ियों के योगदान के बिना समझना मुश्किल है। पंजाब अपनी उपजाऊ भूमि, मेहनती किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका के लिए जाना जाता है। इसी धरती ने ऐसे ओलंपियन, विश्व चैंपियन और खेल नायक भी पैदा किए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगे का सम्मान बढ़ाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी पंजाब की संस्कृति और जीवनशैली में रची-बसी है। राज्य की कई पीढ़ियों ने इस खेल को अपनाया और अपनी प्रतिभा से देश को गौरवान्वित किया है। अब सरकार की कोशिश है कि इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में तैयार किया जाए।
उनके अनुसार, एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को बड़े स्तर की प्रतियोगिता देखने, अंतरराष्ट्रीय टीमों के खेल को समझने और अपने कौशल को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
1928 से 2024 तक पंजाब के खिलाड़ियों का योगदान
मुख्यमंत्री ने भारतीय हॉकी में पंजाब की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक तक राज्य ने देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं। इनमें से 48 खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के खिलाड़ियों ने 10 अवसरों पर भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी भी की है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, ये आंकड़े भारतीय हॉकी में पंजाब की निरंतर भागीदारी और नेतृत्व को दर्शाते हैं। राज्य के खिलाड़ियों ने अलग-अलग दौर में देश की टीम को मजबूती दी और विश्व स्तर पर भारतीय हॉकी की पहचान बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने महान हॉकी खिलाड़ियों बलबीर सिंह सीनियर, ऊधम सिंह, पृथिपाल सिंह, अजीत पाल सिंह, सुरजीत सिंह और परगट सिंह को याद करते हुए कहा कि इन दिग्गजों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस ओलंपिक के फाइनल में बलबीर सिंह सीनियर ने पांच गोल करके असाधारण उपलब्धि हासिल की थी। यह प्रदर्शन भारतीय हॉकी के इतिहास के यादगार अध्यायों में शामिल है।
इसी तरह ऊधम सिंह के चार ओलंपिक में हिस्सा लेने और पदक जीतने के रिकॉर्ड को भी उन्होंने प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि समर्पण और मेहनत के बल पर भारतीय खिलाड़ी विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
टोक्यो और पेरिस ओलंपिक ने जगाई नई उम्मीद
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने वर्ष 2021 के टोक्यो ओलंपिक और वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में लगातार कांस्य पदक जीतकर देश में हॉकी के प्रति नया उत्साह पैदा किया। उनके अनुसार, लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतना भारतीय हॉकी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम को लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने का अवसर 52 वर्ष के अंतराल के बाद मिला था। इन उपलब्धियों ने भारतीय हॉकी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूत वापसी का संकेत दिया है।
मुख्यमंत्री ने दोनों ओलंपिक टीमों में पंजाब के खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य आज भी भारतीय हॉकी की ताकत बना हुआ है। उन्होंने बताया कि हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली मौजूदा भारतीय हॉकी टीम में पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं।
मान ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य इस प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, खेल सुविधाएं और अवसर उपलब्ध करवाना है। यदि खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से उचित मार्गदर्शन और आधुनिक प्रशिक्षण मिलता है, तो वे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
विश्व कप जीत में भी पंजाब की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने भारतीय हॉकी की विश्व कप उपलब्धियों में पंजाब के खिलाड़ियों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने वर्ष 1975 में कप्तान अजीत पाल सिंह के नेतृत्व में भारतीय पुरुष हॉकी टीम की विश्व कप जीत का उल्लेख किया।
इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2001 में गगन अजीत सिंह और वर्ष 2016 में हरजीत सिंह की कप्तानी में भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम की विश्व कप जीत को याद किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन उपलब्धियों में पंजाब के खिलाड़ियों की भूमिका राज्य की मजबूत हॉकी परंपरा को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि युवा खिलाड़ियों को सही समय पर अवसर, उचित प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए जरूरी सुविधाएं मिलें। सरकार खेल ढांचे को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि खेलों में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए अनुशासन, नियमित अभ्यास, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं भी जरूरी हैं। राज्य सरकार इन पहलुओं को ध्यान में रखकर खेलों को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है।
जालंधर और आसपास के गांवों ने दिए कई ओलंपियन
भारतीय हॉकी में जालंधर के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जालंधर और इसके आसपास के गांवों ने कई पीढ़ियों तक ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए हैं। संसारपुर, खुसरोपुर और मिट्ठापुर जैसे गांव हॉकी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
उन्होंने कहा कि इन गांवों से 20 से अधिक ओलंपियन निकले हैं। यहां हॉकी केवल मनोरंजन या प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ने वाली परंपरा है। गांवों के मैदानों से निकलकर खिलाड़ियों ने देश और दुनिया के बड़े खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जालंधर की हॉकी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। ऐसे आयोजन स्थानीय खिलाड़ियों को प्रेरित करने के साथ-साथ इस क्षेत्र की खेल संस्कृति को मजबूत कर सकते हैं।
ओलंपियन सुरजीत सिंह के नाम पर बने स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन भी इस विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। यहां अलग-अलग देशों की टीमों के मुकाबले देखने से स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की हॉकी का अनुभव मिलेगा और उन्हें अपनी तकनीक तथा खेल रणनीति को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिल सकती है।
खेल ढांचे को मजबूत करने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य की खेल प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने और चैंपियनों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए खेल ढांचे को मजबूत कर रही है। इसके तहत जमीनी स्तर पर खेलों में भागीदारी को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जिनसे वे अपनी क्षमता को पहचान सकें और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकें। इसके लिए खेल संस्थानों, प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण सुविधाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी को इसी दिशा में एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय टीमों की मौजूदगी से पंजाब में हॉकी को लेकर उत्साह बढ़ने और युवा खिलाड़ियों की खेल के प्रति रुचि मजबूत होने की उम्मीद है।
सरकार की दीर्घकालीन योजना में वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी की तैयारी भी शामिल है। इसके लिए खेल सुविधाओं, आयोजन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर काम करना महत्वपूर्ण होगा। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के आयोजन से राज्य को बड़े टूर्नामेंट आयोजित करने का अनुभव प्राप्त होगा।
जालंधर से मोहाली तक हॉकी का उत्सव
प्रतियोगिता का आयोजन दो प्रमुख शहरों में किया जा रहा है। जालंधर में लीग चरण के मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में आयोजित होंगे। इससे दोनों शहरों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और हॉकी प्रेमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।
छह देशों की भागीदारी इस प्रतियोगिता को प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगी। विभिन्न टीमों की खेल शैली, रणनीति और प्रदर्शन से दर्शकों को एशियाई हॉकी के अलग-अलग पहलुओं को देखने का अवसर मिलेगा।
पंजाब के लिए इस आयोजन का महत्व केवल मैचों तक सीमित नहीं है। यह राज्य की ऐतिहासिक खेल पहचान को सामने लाने, युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करने और भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी की क्षमता विकसित करने का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विश्वास जताया कि पंजाब अपनी गौरवशाली हॉकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व हॉकी में फिर मजबूत स्थान हासिल करेगा। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी से शुरू हुआ यह प्रयास अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने और वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी की दिशा में आगे बढ़ने के लक्ष्य से जुड़ गया है।




