जालंधर में रेल फाटकों से मिलेगी राहत: 113 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े ओवरब्रिज परियोजनाओं की शुरुआत आज

जालंधर में रेल फाटकों से मिलेगी राहत: 113 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े ओवरब्रिज परियोजनाओं की शुरुआत आज

जालंधर: शहर की लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक और रेलवे फाटक जाम की समस्या को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जालंधर शहर और छावनी क्षेत्र को जोड़ने वाले दो प्रमुख रेलवे फाटकों पर आधुनिक रेल ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण परियोजनाओं का शुभारंभ होने जा रहा है। केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मंगलवार को इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, जिन पर कुल 112.93 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

इन परियोजनाओं के शुरू होने के बाद शहर के हजारों दैनिक यात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्षों से रेलवे फाटक बंद रहने के कारण लगने वाले लंबे जाम और समय की बर्बादी से परेशान लोगों के लिए यह परियोजना एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सुधार मानी जा रही है।

दो व्यस्त रेलवे फाटकों पर बनेगा आधुनिक ढांचा

रेल मंत्रालय और उत्तर रेलवे के सहयोग से जिन दो स्थानों पर ओवरब्रिज बनाए जाने हैं, उनमें गुरु नानकपुरा रेलवे फाटक बी-67 और गढ़ा रेलवे फाटक एस-4 शामिल हैं। दोनों फाटक शहर के सबसे व्यस्त यातायात मार्गों में गिने जाते हैं और प्रतिदिन हजारों वाहन इनसे होकर गुजरते हैं।

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू दोपहर बाद दोनों परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। कार्यक्रम में उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि और विभिन्न जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

रेलवे वहन करेगा पूरा निर्माण खर्च

दोनों परियोजनाओं पर कुल 112.93 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इसमें गुरु नानकपुरा रेलवे फाटक पर बनने वाले ओवरब्रिज के लिए लगभग 48.95 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जबकि गढ़ा फाटक परियोजना पर लगभग 63.98 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

विशेष बात यह है कि इन परियोजनाओं के निर्माण पर आने वाला पूरा खर्च रेलवे की ओर से वहन किया जाएगा। इससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।

शहर के सबसे व्यस्त रेलवे फाटकों में शामिल है गुरु नानकपुरा

गुरु नानकपुरा रेलवे फाटक जालंधर शहर के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले रेल क्रॉसिंगों में से एक माना जाता है। यह रेलवे फाटक शहर और कैंट क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का काम करता है।

अमृतसर-नई दिल्ली रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से प्रतिदिन लगभग 110 रेलगाड़ियां गुजरती हैं। प्रत्येक बार फाटक बंद होने पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

व्यापारिक गतिविधियों, स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले विद्यार्थियों और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों के लिए यह फाटक रोजमर्रा की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में ओवरब्रिज बनने के बाद यहां यातायात की स्थिति में बड़ा सुधार आने की संभावना है।

निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि परियोजना के शुरू होने के साथ ही प्रशासन के सामने ट्रैफिक प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। निर्माण कार्य के दौरान कई चरणों में यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर भेजना पड़ेगा।

शिलान्यास कार्यक्रम के चलते गुरु नानकपुरा फाटक को निर्धारित समय तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इसके कारण विभिन्न मार्गों से आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना होगा।

ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले निर्धारित डायवर्जन मार्गों की जानकारी प्राप्त कर लें ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।

वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ेगा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण अवधि के दौरान आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ सकता है। वर्तमान में बड़ी संख्या में वाहन गुरु नानकपुरा फाटक का उपयोग करते हैं। यदि यह मार्ग आंशिक या पूर्ण रूप से प्रभावित होता है तो ट्रैफिक का भार अन्य सड़कों पर स्थानांतरित होगा।

संभावित वैकल्पिक मार्गों में रामामंडी और बशीरपुरा क्षेत्र के रास्ते शामिल हैं। हालांकि बशीरपुरा क्षेत्र की सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, जिसके कारण वहां यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

यही कारण है कि प्रशासन और परियोजना से जुड़े अधिकारी ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर अलग से रणनीति तैयार कर रहे हैं।

पीएपी सर्विस लेन परियोजना की भूमिका होगी महत्वपूर्ण

गुरु नानकपुरा ओवरब्रिज परियोजना के दौरान सबसे अधिक महत्व पीएपी क्षेत्र में विकसित की जा रही सर्विस लेन को दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस परियोजना का कार्य समय पर पूरा हो जाता है तो ट्रैफिक दबाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

निर्माण एजेंसी ने दावा किया है कि सर्विस लेन से जुड़े प्रमुख कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। कई हिस्सों में बाउंड्री संरचना और ड्रेनेज सिस्टम का कार्य पूरा किया जा चुका है जबकि शेष निर्माण भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि यह सुविधा समय पर शुरू हो जाती है तो निर्माण अवधि के दौरान लोगों को राहत मिल सकती है।

शहर को मिलेगा दूसरा बोस्ट्रिंग ब्रिज

गुरु नानकपुरा रेलवे ओवरब्रिज की एक और खासियत इसकी डिजाइन है। यह परियोजना आधुनिक स्टील बोस्ट्रिंग ब्रिज तकनीक पर आधारित होगी। यह संरचना इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से उन्नत मानी जाती है और सीमित स्थान में मजबूत तथा आकर्षक पुल निर्माण के लिए उपयोग की जाती है।

जालंधर में इससे पहले लद्देवाली क्षेत्र में इस प्रकार का पुल बनाया जा चुका है। उस परियोजना को लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। अब गुरु नानकपुरा में बनने वाला पुल शहर का दूसरा बोस्ट्रिंग ब्रिज होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की संरचनाएं न केवल टिकाऊ होती हैं बल्कि शहरी क्षेत्रों में बेहतर यातायात प्रबंधन में भी मदद करती हैं।

निर्माण से पहले सामने आएंगी कई तकनीकी चुनौतियां

ओवरब्रिज निर्माण किसी सामान्य सड़क परियोजना की तरह नहीं होता। इसके लिए रेलवे लाइन के आसपास मौजूद विभिन्न उपयोगिताओं को स्थानांतरित करना पड़ता है। गुरु नानकपुरा परियोजना में भी ऐसी कई तकनीकी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

सीवरेज लाइनें, पेयजल पाइपलाइनें, बिजली के खंभे, संचार नेटवर्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना होगा। यही प्रक्रिया पहले लद्देवाली ओवरब्रिज परियोजना में भी अपनाई गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि परियोजना समय पर पूरी हो सके।

व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। माल ढुलाई, छोटे व्यवसायों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को अक्सर समय की हानि उठानी पड़ती है।

ओवरब्रिज बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। शहर और कैंट क्षेत्र के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

लंबे समय से थी लोगों की मांग

स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों द्वारा इन दोनों रेलवे फाटकों पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। रेलवे फाटक बंद होने के कारण लगने वाले जाम, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही में होने वाली देरी और दुर्घटनाओं की आशंकाओं को देखते हुए यह परियोजना आवश्यक मानी जा रही थी।

अब शिलान्यास के साथ परियोजना ने औपचारिक रूप से जमीन पर आकार लेना शुरू कर दिया है। लोगों को उम्मीद है कि निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा होगा और उन्हें वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिलेगी।

भविष्य के यातायात ढांचे को मजबूत करेगा प्रोजेक्ट

शहर में लगातार बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौजूदा समस्याओं का समाधान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी बुनियादी ढांचे का विस्तार करना आवश्यक है।

गुरु नानकपुरा और गढ़ा रेलवे फाटक पर बनने वाले नए ओवरब्रिज इसी सोच का हिस्सा हैं। इनके निर्माण के बाद न केवल वर्तमान ट्रैफिक दबाव कम होगा बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।

करीब 113 करोड़ रुपये की लागत वाली ये दोनों परियोजनाएं जालंधर के परिवहन ढांचे को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं। इनके पूरा होने के बाद शहर के लोगों को रेलवे फाटकों पर लगने वाले लंबे इंतजार से मुक्ति मिलने के साथ-साथ तेज, सुरक्षित और निर्बाध यातायात सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।