हरियाणा ने बीते एक दशक में खेलों के क्षेत्र में जिस तेजी से अपनी पहचान मजबूत की है, वह अब राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में देखा जाने लगा है। देश की कुल आबादी में महज करीब दो प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह राज्य आज ओलिंपिक, पैरालिंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वाधिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के कारण देशभर में अलग पहचान बना चुका है। राज्य सरकार का दावा है कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, अत्याधुनिक खेल सुविधाएं, आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियों का लाभ देने वाली नीतियों ने हरियाणा को देश का ‘स्पोर्ट्स पावरहाउस’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित स्पोर्ट्स, फिटनेस एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्सपो को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा की खेल नीति का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का पूरा अवसर मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने 17,182 खिलाड़ियों के बैंक खातों में सीधे लगभग 730 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित की है। यह राशि खिलाड़ियों को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दी गई है। उनका कहना था कि खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा देने से नई पीढ़ी का खेलों के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सबसे अधिक नकद पुरस्कार दिया जाता है। ओलिंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को छह करोड़ रुपये तक का नकद पुरस्कार देने की व्यवस्था है। इसके अलावा रजत और कांस्य पदक विजेताओं को भी आकर्षक पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है, जिससे खिलाड़ियों को अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने में आर्थिक मजबूती मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल पुरस्कार देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानती, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में 260 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी श्रेणी की सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इससे खिलाड़ियों को खेल जीवन के बाद भी स्थायी रोजगार और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की खेल सफलता केवल खिलाड़ियों की मेहनत से नहीं, बल्कि मजबूत खेल ढांचे से तय होती है। इसी सोच के साथ हरियाणा सरकार ने पिछले 12 वर्षों में खेल अवसंरचना के विकास पर करीब 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में आधुनिक स्टेडियम, इंडोर हॉल, सिंथेटिक ट्रैक, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य खेल सुविधाओं का विस्तार किया गया है ताकि खिलाड़ियों को अपने जिले में ही गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में इस समय 2,000 खेल नर्सरियां और 25 खेल अकादमियां संचालित की जा रही हैं। इन संस्थानों में छोटी उम्र से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दिया जाता है। खिलाड़ियों को पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन 500 रुपये का डाइट भत्ता भी दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक कारणों से किसी प्रतिभा का विकास प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि सरकार ने उभरते खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्ति योजना भी लागू की है। इसके तहत 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को प्रतिमाह 1,500 रुपये, जबकि 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को 2,000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में आर्थिक सहयोग देना है ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर भी पूरा ध्यान दे सकें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचकूला में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर भारत का पहला अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र में खिलाड़ियों को आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी, बायोमैकेनिक्स, फिटनेस विश्लेषण और चोट के बाद पुनर्वास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए अब केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी उतना ही जरूरी हो गया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवाओं से खेलों को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और अनुशासित जीवन का आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है और युवाओं को खेलों से जोड़कर उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वह स्वयं हर महीने आयोजित होने वाली विभिन्न मैराथन और फिटनेस अभियानों में भाग लेते हैं ताकि युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। हाल ही में यमुनानगर में आयोजित मैराथन में करीब एक लाख युवाओं ने भाग लेकर फिटनेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, जो राज्य में बढ़ती खेल संस्कृति का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हरियाणा की खेल उपलब्धियों की सराहना करते हुए प्रदेश को भविष्य के ओलिंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि हरियाणा आने वाले वर्षों में भी देश के लिए सर्वाधिक पदक जीतने वाले राज्यों में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखेगा और भारत का गौरव बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि गांव-गांव से नई खेल प्रतिभाएं सामने आएं। इसके लिए स्कूल स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों को निरंतर सहयोग दिया जा रहा है। खेल नीति को समय-समय पर अपडेट किया जा रहा है ताकि खिलाड़ियों को बदलती जरूरतों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली सरकार में गृह, शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद, बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, हरियाणा के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम तथा सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और खेल जगत से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान देश में खेल अवसंरचना के विस्तार, फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
हरियाणा सरकार का मानना है कि यदि इसी तरह खेल सुविधाओं का विस्तार, खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में राज्य न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा। सरकार का दावा है कि उसकी खेल नीति का अंतिम लक्ष्य केवल अधिक पदक जीतना नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो स्वस्थ, अनुशासित और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बने।




