नाखूनों में दिख रहे हैं ये बदलाव तो हो जाएं सतर्क, शरीर में खून की कमी का हो सकता है संकेत; जानें लक्षण और बचाव

नाखूनों में दिख रहे हैं ये बदलाव तो हो जाएं सतर्क, शरीर में खून की कमी का हो सकता है संकेत; जानें लक्षण और बचाव

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खून में हीमोग्लोबिन का पर्याप्त स्तर होना बेहद जरूरी है। हीमोग्लोबिन की मदद से लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। जब शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है, तो इस स्थिति को एनीमिया यानी खून की कमी कहा जाता है। यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन महिलाओं और किशोरियों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।

भारत में एनीमिया एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 57 प्रतिशत महिलाएं और किशोरियां इस समस्या से प्रभावित हो सकती हैं। शरीर में आयरन की कमी एनीमिया के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके अलावा पोषण की कमी, खून का अधिक बहना और कुछ बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।

आमतौर पर लोग एनीमिया होने पर थकान, कमजोरी या चक्कर आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार इन्हें रोजमर्रा की भागदौड़ या काम के दबाव का नतीजा मान लिया जाता है। लेकिन शरीर में होने वाले कुछ छोटे बदलाव भी स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारी दे सकते हैं। नाखूनों का रंग, उनकी मजबूती और आकार में परिवर्तन ऐसे ही संकेतों में शामिल हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

हालांकि, नाखून देखकर अकेले एनीमिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। इन बदलावों के पीछे दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर सही जांच कराना और डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।

नाखूनों की सेहत से कैसे मिल सकता है खून की कमी का संकेत?

नाखूनों में होने वाले बदलाव कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी की ओर इशारा करते हैं। आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया में कुछ लोगों के नाखून कमजोर पड़ सकते हैं। उनकी सामान्य बनावट प्रभावित हो सकती है और वे पहले की तुलना में जल्दी टूटने लगते हैं।

स्वस्थ नाखूनों को मजबूत बनाए रखने के लिए शरीर को पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो हीमोग्लोबिन का निर्माण प्रभावित हो सकता है। इससे शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। लंबे समय तक आयरन की कमी बने रहने पर नाखूनों सहित शरीर के दूसरे हिस्सों में भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

अगर आपके नाखून बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार टूट रहे हैं, उनकी परतें अलग हो रही हैं या वे सामान्य से अधिक कमजोर महसूस हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब इसके साथ थकान, कमजोरी या चक्कर आने जैसी परेशानियां भी हों।

फिर भी यह समझना जरूरी है कि कमजोर नाखून होने का अर्थ हमेशा खून की कमी नहीं होता। बार-बार पानी या रसायनों के संपर्क में आने, नाखूनों पर चोट लगने, फंगल संक्रमण और अन्य पोषण संबंधी समस्याओं के कारण भी उनकी बनावट प्रभावित हो सकती है।

नाखूनों का गुलाबी रंग पड़ने लगे फीका तो दें ध्यान

नाखूनों के रंग में बदलाव भी स्वास्थ्य से जुड़ा एक संभावित संकेत हो सकता है। आमतौर पर नाखूनों के नीचे की त्वचा हल्की गुलाबी दिखाई देती है। इसका संबंध उस हिस्से में मौजूद रक्त और ऊतकों से होता है।

जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, तो कुछ लोगों में त्वचा और नाखूनों के नीचे का हिस्सा पहले की तुलना में फीका नजर आ सकता है। नाखूनों के आसपास या उनके नीचे की त्वचा का सफेद अथवा पीला दिखाई देना भी एनीमिया के संभावित संकेतों में शामिल हो सकता है।

हालांकि, केवल नाखूनों का रंग देखकर यह तय करना सही नहीं है कि किसी व्यक्ति को एनीमिया है या नहीं। प्राकृतिक त्वचा का रंग, रोशनी, शरीर की दूसरी स्थितियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इस पर असर डाल सकती हैं।

यदि नाखूनों के रंग में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है और साथ में शरीर में कमजोरी या असामान्य थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर खून की जांच के जरिए हीमोग्लोबिन के स्तर का पता लगाया जा सकता है।

चम्मच जैसे दिखने लगें नाखून तो हो सकती है आयरन की कमी

नाखूनों के आकार में होने वाला एक खास बदलाव भी ध्यान देने योग्य है। मेडिकल भाषा में इसे कोइलोनिकिया (Koilonychia) कहा जाता है। इस स्थिति में नाखून बीच से अंदर की ओर दबा हुआ और किनारों से ऊपर उठा हुआ दिखाई दे सकता है। इसका आकार कुछ हद तक चम्मच जैसा नजर आता है।

इस तरह के नाखूनों को देखकर उनकी सामान्य बनावट में आए बदलाव को पहचाना जा सकता है। कोइलोनिकिया का संबंध आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में आयरन की कमी होने पर ऐसा बदलाव दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। इसी तरह चम्मच जैसे नाखूनों के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं।

अगर नाखूनों का आकार धीरे-धीरे बदल रहा है, वे असामान्य रूप से पतले हो रहे हैं या बीच में गड्ढे जैसी बनावट बनने लगी है, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित रहेगा। यदि इसके साथ सांस फूलना, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना या लगातार थकान महसूस हो रही है, तो जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

समय पर समस्या का कारण पता चलने से उचित उपचार शुरू किया जा सकता है और शरीर में आयरन की कमी को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।

एनीमिया होने पर शरीर में दिख सकते हैं ये लक्षण

खून की कमी केवल नाखूनों की सेहत को प्रभावित करने तक सीमित नहीं रहती। हीमोग्लोबिन कम होने के कारण शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां महसूस हो सकती हैं।

एनीमिया के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • लगातार थकान महसूस होना: पर्याप्त आराम करने के बावजूद शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। सामान्य काम करने में भी पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।
  • कमजोरी और चक्कर आना: शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर कुछ लोगों को कमजोरी, सिर हल्का लगने या चक्कर आने की परेशानी हो सकती है।
  • सांस फूलना: सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या सामान्य शारीरिक गतिविधि के दौरान भी सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।
  • त्वचा का पीला पड़ना: कुछ लोगों की त्वचा, होंठों या आंखों के अंदरूनी हिस्से का रंग सामान्य से फीका दिखाई दे सकता है।
  • दिल की धड़कन तेज होना: शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इससे कुछ लोगों को धड़कन तेज महसूस हो सकती है।
  • एकाग्रता में परेशानी: एनीमिया के कारण थकान बढ़ सकती है और कुछ लोगों को ध्यान लगाने या सामान्य कामकाज करने में कठिनाई हो सकती है।

इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से एनीमिया है। ऐसी परेशानियां दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों में भी हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों के आधार पर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच कराना जरूरी है।

खून की कमी का पता लगाने के लिए कौन-सी जांच कराई जाती है?

एनीमिया की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर कम्प्लीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी (CBC) जांच कराने की सलाह देते हैं। इस जांच से हीमोग्लोबिन के स्तर और लाल रक्त कोशिकाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं।

यदि जांच में एनीमिया का पता चलता है, तो डॉक्टर उसके संभावित कारणों को समझने के लिए दूसरी जांच भी करा सकते हैं। आयरन की कमी की आशंका होने पर फेरिटिन और आयरन से संबंधित अन्य जांच उपयोगी हो सकती हैं। व्यक्ति की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जांच के परिणामों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाती है।

यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि शरीर में आयरन की कमी क्यों हुई है। कुछ मामलों में भोजन में आयरन की कमी इसकी वजह होती है, जबकि अन्य स्थितियों में अधिक रक्तस्राव, मासिक धर्म में ज्यादा खून बहना या पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी समस्याएं कारण हो सकती हैं।

इसलिए केवल आयरन की गोली लेना हर व्यक्ति के लिए सही समाधान नहीं है। सही कारण का पता लगाकर उपचार करना ज्यादा जरूरी है।

डाइट में शामिल करें आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ

शरीर में आयरन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खाने में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं, जिनसे शरीर को आयरन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलें।

दालें, चना, राजमा, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां और आयरन से भरपूर अनाज इसके अच्छे स्रोत हो सकते हैं। आहार में विविधता बनाए रखना और नियमित रूप से पौष्टिक भोजन करना भी जरूरी है।

आयरन के अवशोषण में विटामिन-सी मदद कर सकता है। इसलिए भोजन के साथ नींबू, अमरूद, संतरा और अन्य विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ लेना फायदेमंद हो सकता है। इससे पौधों से मिलने वाले आयरन को शरीर द्वारा अवशोषित करने में मदद मिलती है।

चाय और कॉफी भोजन के आसपास लेने से कुछ लोगों में आयरन का अवशोषण कम हो सकता है। इसलिए यदि आयरन की कमी है, तो इनके सेवन का समय डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करना उपयोगी हो सकता है।

अगर शरीर में आयरन की कमी काफी अधिक है, तो केवल खानपान में बदलाव करना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। आयरन की गोलियां खुद से शुरू नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा आयरन लेना नुकसानदायक हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर नाखूनों में लगातार बदलाव दिखाई दे रहे हैं और साथ में थकान, कमजोरी, चक्कर या त्वचा का रंग फीका पड़ने जैसे लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच कराने से एनीमिया की पहचान करने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, सीने में दर्द, बेहोशी या तेज और लगातार धड़कन जैसी गंभीर समस्याएं होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

ध्यान रखें कि नाखूनों में दिखने वाले बदलाव शरीर की स्थिति के बारे में संकेत दे सकते हैं, लेकिन वे एनीमिया की पुष्टि करने का विकल्प नहीं हैं। खून की जांच, लक्षणों का मूल्यांकन और डॉक्टर की सलाह ही समस्या का सही कारण समझने में मदद करते हैं। संतुलित आहार, समय पर जांच और उचित उपचार के जरिए आयरन की कमी से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

(Photo : AI Generated)