संघर्ष कमेटी ने सीबीआइ जांच, आरोपियों के लाइसेंस रद्द करने और संपत्तियों की जांच की मांग उठाई; मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग
पंजाब। परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में आयोजित पंजाब बंद के दौरान विभिन्न संगठनों की ओर से मिले समर्थन के लिए संघर्ष कमेटी ने सभी का आभार जताया। कमेटी ने स्पष्ट किया कि बंद समाप्त होने के बावजूद उनका धरना लगातार जारी रहेगा और जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रखा जाएगा। कमेटी ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इतने बड़े विरोध प्रदर्शन के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
संघर्ष कमेटी ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब में नशे के कारोबार और उससे जुड़े कथित संरक्षण के सवालों से भी जुड़ा है। कमेटी के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा ने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी और इस समस्या को खत्म करने के लिए लगातार संघर्ष किया था। ऐसे में उनके मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।
कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए। साथ ही आरोपियों के लाइसेंस रद्द करने, उनकी संपत्तियों की जांच कराने और इलाके में नशे की बिक्री के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई।
बंद के बाद भी धरना जारी रखने का ऐलान
पंजाब बंद के दौरान मिले समर्थन को संघर्ष कमेटी ने अपने आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण बताया। कमेटी ने बंद में सहयोग देने वाले विभिन्न संगठनों और लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जनता की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ है कि परविंदर सिंह झोटा के मामले में न्याय की मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है।
हालांकि, कमेटी ने यह भी साफ कर दिया कि बंद का आयोजन आंदोलन का अंतिम चरण नहीं है। जब तक सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक धरना जारी रहेगा। कमेटी के अनुसार, केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आरोपियों और मामले में कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्पष्ट कदम उठाने होंगे।
कमेटी ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई करने के दावे करती है, लेकिन परविंदर सिंह झोटा के हत्याकांड में अभी तक अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उसने सरकार से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्रभावी बनाया जाए और सभी संबंधित पहलुओं की पड़ताल की जाए।
मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग
संघर्ष कमेटी ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी के इस्तीफे की मांग उठाई। कमेटी का कहना है कि नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार तथा पुलिस प्रशासन की है। ऐसे में इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कमेटी ने आरोपियों के लाइसेंस रद्द करने और उनकी संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी रखी। उसके अनुसार, जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि संबंधित लोगों की संपत्तियां किन स्रोतों से अर्जित की गई हैं और क्या उनका किसी गैरकानूनी गतिविधि से कोई संबंध है। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
कमेटी ने यह भी मांग की कि इलाके में नशे की बिक्री के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए और उनके नाम प्राथमिकी (एफआइआर) में शामिल किए जाएं। इसके साथ ही ऐसे अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग भी उठाई गई।
संघर्ष कमेटी ने विशेष रूप से संबंधित क्षेत्र के ड्रग इंस्पेक्टर के खिलाफ सबसे पहले मामला दर्ज करने की मांग की। कमेटी का आरोप है कि नशे की बिक्री को रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और किसी संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
निलंबित एसएचओ को बर्खास्त करने की मांग
संघर्ष कमेटी ने उस थाना प्रभारी (एसएचओ) को बर्खास्त करने की मांग की है, जिसे मामले के संदर्भ में निलंबित किया गया है। कमेटी का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
कमेटी ने मांग की कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि घटना से पहले और बाद में पुलिस प्रशासन ने क्या कदम उठाए थे तथा नशे की बिक्री रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभाईं। कमेटी के अनुसार, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मांग के जरिए कमेटी ने पुलिस प्रशासन की जवाबदेही को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। उसका कहना है कि नशे के खिलाफ संघर्ष करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हत्याकांड की सीबीआइ जांच कराने की मांग
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच कराने की मांग भी संघर्ष कमेटी ने प्रमुखता से उठाई है। कमेटी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा हो सके और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को जांच से बाहर न रखा जाए।
कमेटी के अनुसार, जांच का दायरा केवल प्रत्यक्ष आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उन परिस्थितियों की भी पड़ताल होनी चाहिए, जिनमें घटना हुई, और यह देखा जाना चाहिए कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं बरती गई।
सीबीआइ जांच की मांग के साथ कमेटी ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे की जांच किस दिशा में बढ़ रही है। कमेटी का कहना है कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जांच पारदर्शी होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
घटनास्थल पर प्रतिमा स्थापित करने की मांग
संघर्ष कमेटी ने उस स्थान पर परविंदर सिंह झोटा की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी है, जहां उनकी हत्या हुई थी। कमेटी का कहना है कि परविंदर सिंह झोटा ने नशे के खिलाफ संघर्ष किया और इस सामाजिक समस्या के विरुद्ध आवाज उठाई। इसलिए उनकी स्मृति को सम्मान देने के लिए घटनास्थल पर प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए।
इसके अलावा कमेटी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से अपील की कि परविंदर सिंह झोटा को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। कमेटी का तर्क है कि नशे के खिलाफ उनके संघर्ष और इस दिशा में उठाई गई आवाज को उचित सम्मान मिलना चाहिए।
यह मांग आंदोलन को केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखती, बल्कि परविंदर सिंह झोटा की स्मृति और नशे के खिलाफ उनके कथित संघर्ष को सार्वजनिक पहचान दिलाने से भी जुड़ी है। हालांकि, शहीद का दर्जा देने और प्रतिमा स्थापित करने जैसे विषयों पर संबंधित संस्थाओं तथा सक्षम प्राधिकारियों की प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाना होगा।
मांगें नहीं मानीं तो और बड़ा आंदोलन
संघर्ष कमेटी ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। कमेटी ने कहा कि पंजाब बंद के बाद संघर्ष समाप्त नहीं होगा और धरना लगातार जारी रहेगा।
कमेटी के अनुसार, सरकार को मामले में ठोस कदम उठाने चाहिए। इसमें हत्याकांड की सीबीआइ जांच, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल, लाइसेंस रद्द करने और संपत्तियों की जांच जैसी मांगें शामिल हैं। कमेटी ने दोहराया कि जब तक इन मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का फैसला कायम रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा की आशंका का उल्लेख करते हुए कमेटी ने कहा कि यदि आंदोलन के दौरान कोई हिंसक घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। यह बयान सरकार पर दबाव बनाने और मामले में जल्द कार्रवाई की मांग के संदर्भ में आया है। हालांकि, प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।
नशे के मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही का सवाल
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में पंजाब बंद और संघर्ष कमेटी की मांगों ने राज्य में नशे के कारोबार तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। कमेटी इस मामले को नशे के खिलाफ संघर्ष करने वाले लोगों की सुरक्षा और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई से जोड़ रही है।
आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ सरकार के सामने चुनौती होगी कि वह मामले में जांच की स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों के बारे में स्पष्ट जानकारी दे। वहीं, संघर्ष कमेटी की मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल, पंजाब बंद के बाद भी धरना जारी रखने के ऐलान ने संकेत दिया है कि परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर विरोध अभी थमने वाला नहीं है। संघर्ष कमेटी ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए चेतावनी दी है और बड़ा आंदोलन शुरू करने की संभावना भी जताई है। अब इस पूरे मामले में सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।




