सीएम भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में पांच आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाया; नियुक्तियों से लेकर हथियार लाइसेंस तक की पड़ताल
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन और अन्य लोगों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों से अधिकारियों के तबादलों और नियुक्तियों, सरकारी नीतियों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, भर्तियों तथा हथियार लाइसेंस से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी फैसलों में कथित अनियमितताओं और आरोपितों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
मामले में सीबीआइ ने पांच आरोपितों को शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया है, जबकि राजबीर सिंह घुम्मन अब तक एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं। इससे पहले उन्हें दो बार समन भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। एजेंसी ने उनके परिसर पर नोटिस चस्पा करने के साथ ई-मेल के माध्यम से भी सूचना भेजी थी।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सीबीआइ ने 12 अक्टूबर को पंजाब सरकार को पत्र लिखकर विभिन्न विभागों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था। कई विभाग जानकारी दे चुके हैं, जबकि कुछ विभागों में दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया जारी है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित नीतियों और सरकारी फैसलों में किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप हुआ था या नहीं।
हाई कोर्ट के निर्देश पर छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआइ ने पांच अक्टूबर को राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अन्य आरोपितों में नितिन गोहल, जितिन गोहल, डॉ. रोमी महाजन, बीर देविंदर और खन्ना के कारोबारी आरएस नागरा शामिल हैं।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी भी की थी। अब जांच को आगे बढ़ाते हुए विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित फाइलें और दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं। एजेंसी का ध्यान उन सरकारी नीतियों, नियुक्तियों और परियोजनाओं पर है, जिनका उल्लेख जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में हुआ है।
मामले में आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। अभी तक जांच के आधार पर किसी भी आरोपित की दोषसिद्धि नहीं हुई है। सीबीआइ दस्तावेजों, कथित बातचीत और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
तबादला नीतियों और खाद्यान्न ढुलाई व्यवस्था की फाइलें तलब
सीबीआइ ने पंजाब सरकार से वर्ष 2024 की खाद्यान्न श्रम एवं ढुलाई नीतियों से संबंधित फाइलें मांगी हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 की तबादला नीतियों तथा अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों से जुड़े फैसलों का रिकॉर्ड भी तलब किया गया है।
जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के माध्यम से यह समझने का प्रयास कर रही है कि संबंधित नीतियां किस प्रक्रिया के तहत तैयार की गईं और अधिकारियों की नियुक्तियों तथा तबादलों से जुड़े फैसले किस स्तर पर लिए गए। सरकारी नीतियों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में किसी कथित अनियमितता की जांच के लिए संबंधित विभागों की फाइलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा वेरका द्वारा एसएपी सॉफ्टवेयर के उपयोग के लिए खरीदे गए लाइसेंस, सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ हुए समझौते की शर्तों और पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग में वितरकों को बदलने से जुड़े फैसलों का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
इन मामलों में एजेंसी खरीद प्रक्रिया, समझौतों की शर्तों और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी। हालांकि, इन सभी मामलों में किसी अनियमितता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बिजली और आवासीय परियोजनाएं भी जांच के दायरे में
सीबीआइ ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की न्यू खन्ना सिटी एक्सटेंशन परियोजना में हाईटेक डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के कार्य से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा है। एजेंसी इस परियोजना से जुड़ी फाइलों और सरकारी स्तर पर लिए गए फैसलों की जांच कर रही है।
इसके साथ ही ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से आरकेएम हाउसिंग लिमिटेड से संबंधित फाइलें उपलब्ध कराने को कहा गया है। चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजेज को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से दी गई मंजूरी से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।
जीरकपुर स्थित एस्कान प्रिमेरा ग्रुप हाउसिंग परियोजना की फाइलें भी तलब की गई हैं। इन परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेजों के जरिए एजेंसी सरकारी मंजूरियों, विभागीय प्रक्रियाओं और संबंधित फैसलों की पड़ताल कर सकती है।
जांच का दायरा विभिन्न विभागों और अलग-अलग तरह की परियोजनाओं तक फैला होने के कारण एजेंसी को कई स्तरों पर रिकॉर्ड जुटाना पड़ रहा है। विभागों से प्राप्त दस्तावेजों का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जाएगा, ताकि संबंधित फैसलों की प्रक्रिया और उनमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
भर्ती प्रक्रिया और मुख्यमंत्री कार्यालय में नियुक्तियों की जांच
सीबीआइ ने पंजाब लोक सेवा आयोग के माध्यम से सहायक नगर योजनाकारों की भर्ती से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा है। इसके अलावा पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कुछ मामलों की फाइलें भी तलब की गई हैं।
जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री कार्यालय में राजबीर सिंह घुम्मन की ओएसडी के रूप में नियुक्ति से संबंधित फाइल भी मांगी है। इसके साथ ही जितिन कुमार गोहल उर्फ राजा को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रोडक्शन मैनेजर के रूप में नियुक्त करने से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी।
इन नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों के माध्यम से एजेंसी नियुक्ति की प्रक्रिया, संबंधित आदेशों और प्रशासनिक मंजूरियों की पड़ताल कर सकती है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नियुक्तियों से जुड़े फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए थे या नहीं और क्या इन मामलों में किसी प्रकार का अनुचित प्रभाव इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मौजूद हैं।
सीबीआइ ने पंजाब खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन गगनदीप सिंह काकू अहलूवालिया और मुख्यमंत्री के एक अन्य ओएसडी डॉ. रोमी राजा महाजन समेत कुछ लोगों के हथियार लाइसेंस आवेदनों से जुड़ी फाइलें भी मांगी हैं।
हथियार लाइसेंस से संबंधित रिकॉर्ड की जांच में आवेदन, विभागीय मंजूरी और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल इन दस्तावेजों को तलब किए जाने को जांच की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। केवल फाइलें मांगे जाने से किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते।
ईडी की जांच में सामने आए पहलुओं पर भी नजर
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सरकारी नीतियों और फैसलों को कथित तौर पर प्रभावित करने या उनमें हेरफेर करने के आरोपों की पड़ताल की गई थी। अब सीबीआइ भी मामले से जुड़े दस्तावेजों और कथित बातचीत के आधार पर विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपितों के बीच कथित बातचीत और चैट के आधार पर कुछ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। एजेंसी संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करने पर भी विचार कर सकती है।
हालांकि, अधिकारियों से पूछताछ की संभावना का अर्थ यह नहीं है कि उनकी संलिप्तता साबित हो गई है। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
सीबीआइ के लिए अब सरकारी विभागों से मांगे गए रिकॉर्ड का विश्लेषण महत्वपूर्ण होगा। विभिन्न फाइलों में दर्ज आदेशों, मंजूरियों और फैसलों की तुलना कथित बातचीत तथा अन्य साक्ष्यों से की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग मामलों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
घुम्मन की पेशी पर निगाहें, मान ने कही थी जांच में सहयोग की बात
राजबीर सिंह घुम्मन को पिछले सप्ताह दो बार समन भेजे जाने के बावजूद वह सीबीआइ के सामने पेश नहीं हुए। एजेंसी ने उनके परिसर पर नोटिस चस्पा करने के साथ ई-मेल के माध्यम से भी समन भेजे थे। अब पांच अन्य आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बीच घुम्मन की पेशी को लेकर भी नजर बनी हुई है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले कह चुके हैं कि उचित माध्यम से समन मिलने पर उनके ओएसडी जांच में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस बयान के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसी के अगले कदम महत्वपूर्ण हो गए हैं।
सीबीआइ अब तक विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है और सरकार के कई विभागों से रिकॉर्ड मांगा गया है। जांच के अगले चरण में दस्तावेजों की पड़ताल के साथ आरोपितों से पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती, ईडी ने भी दर्ज किया मामला
पंजाब सरकार ने सीबीआइ की प्राथमिकी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिकी पर रोक लगाने या जांच रोकने से इन्कार करते हुए सोमवार को एजेंसी को निर्देश दिया था कि वह कोई कठोर कार्रवाई न करे।
इस घटनाक्रम के बाद मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया, दोनों स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का दायरा और उसके अनुपालन की स्थिति आगामी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
इसके बाद ईडी ने भी सीबीआइ की प्राथमिकी के आधार पर राजबीर सिंह घुम्मन और उनके सहयोगियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। इससे मामले में वित्तीय लेन-देन और कथित धन शोधन से जुड़े पहलुओं की जांच का रास्ता भी खुल गया है।
सीबीआइ को चार दिसंबर तक पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जांच रिपोर्ट सौंपनी है। इस समयसीमा को देखते हुए आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। सरकारी विभागों से मांगे गए रिकॉर्ड, आरोपितों से पूछताछ और कथित बातचीत की पड़ताल के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।
फिलहाल, मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सरकारी नीतियों, नियुक्तियों और परियोजनाओं से जुड़ी फाइलों की जांच में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि करने वाले ठोस साक्ष्य सामने आते हैं। इसका जवाब जांच पूरी होने और उपलब्ध तथ्यों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगा।




