लांबी में अकाली दल के पुराने राजनीतिक नेटवर्क को झटका, छह महीने पहले भाजपा ने बढ़ाई मालवा में सक्रियता
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मालवा क्षेत्र में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। इसी क्रम में शिरोमणि अकाली दल के सबसे मजबूत माने जाने वाले लांबी क्षेत्र से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों बादल ने भाजपा का दामन थाम लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल के बेहद करीबी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों के भाजपा में शामिल होने को मालवा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों सोमवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए। इस दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने उनका पार्टी में स्वागत किया। लंबे समय तक बादल परिवार के साथ राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहे ढिल्लों के भाजपा में आने से पार्टी को लांबी सहित आसपास के इलाकों में पुराने राजनीतिक संपर्कों और स्थानीय स्तर पर बने नेटवर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का प्रकाश सिंह बादल के साथ रिश्ता केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक सहयोग का भी रहा है। वह करीब 25 वर्षों तक प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सचिव के रूप में उनके साथ काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने चुनावी रणनीति, क्षेत्रीय गतिविधियों और पार्टी संगठन से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लांबी विधानसभा क्षेत्र में उनकी लगातार मौजूदगी के कारण स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच भी उनकी पहचान बनी रही।
बादल के चुनाव अभियानों से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों वर्ष 1994 से ही प्रकाश सिंह बादल के चुनाव अभियानों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। इसके बाद उनका राजनीतिक जुड़ाव लगातार मजबूत होता गया। बादल परिवार की राजनीति के केंद्र लांबी में उन्होंने लंबे समय तक संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियों को करीब से देखा और संभाला।
वर्ष 1997 से 2002 के बीच पंजाब में अकाली दल की सरकार के दौरान मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों राज्य मंत्री भी रहे। इस अवधि में सरकार और संगठन के स्तर पर उनका राजनीतिक अनुभव और संपर्क और व्यापक हुआ। इसके बाद भी लांबी क्षेत्र में उनकी सक्रियता बनी रही।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी ऐसे व्यक्ति का भाजपा में जाना, जिसने दशकों तक अकाली दल की राजनीति को नजदीक से देखा हो और बादल परिवार के साथ सीधे तौर पर काम किया हो, केवल एक नेता के दल बदलने तक सीमित नहीं माना जा सकता। इससे भाजपा को क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों, पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय समीकरणों को समझने में मदद मिल सकती है।
लांबी की राजनीति में बदलाव का संकेत
मालवा क्षेत्र पंजाब की चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। लांबी विधानसभा क्षेत्र लंबे समय तक प्रकाश सिंह बादल की राजनीतिक पहचान का प्रमुख केंद्र रहा। बादल ने इस क्षेत्र से कई बार चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ कायम की थी। ऐसे में उनके परिवार से सीधे जुड़े और लंबे समय तक उनके साथ काम कर चुके मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का भाजपा में जाना राजनीतिक रूप से विशेष महत्व रखता है।
भाजपा पिछले कुछ समय से पंजाब में अकेले अपने संगठनात्मक आधार को विस्तार देने पर जोर दे रही है। अकाली दल से अलग होकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के बीच पार्टी के लिए ऐसे चेहरे महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जिनकी किसी क्षेत्र में लंबे समय से व्यक्तिगत पहचान और सामाजिक संपर्क हो।
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों के पार्टी में आने से भाजपा को लांबी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। विशेष रूप से उन लोगों और पुराने राजनीतिक संपर्कों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है, जो दशकों से बादल परिवार की राजनीति से जुड़े रहे हैं।
परिवार की राजनीतिक विरासत भी रही अहम
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों जिस राजनीतिक परिवार से आते हैं, उसका पंजाब की राजनीति से पुराना संबंध रहा है। उनके पिता स्वर्गीय गुरराज सिंह ढिल्लों बादल भी शिरोमणि अकाली दल से जुड़े रहे। वह वर्ष 1952 से 1958 तक अकाली दल की ओर से राज्यसभा के सदस्य रहे थे।
गुरराज सिंह ढिल्लों की राजनीतिक भूमिका का संबंध प्रकाश सिंह बादल की शुरुआती राजनीतिक यात्रा से भी जोड़ा जाता है। इस तरह मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों के परिवार और बादल परिवार के बीच राजनीतिक संबंध कई दशकों पुराने रहे हैं।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि ने मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों को अकाली राजनीति और विशेषकर बादल परिवार की कार्यशैली को करीब से समझने का अवसर दिया। उन्होंने लंबे समय तक संगठन और चुनावी राजनीति में सक्रिय रहते हुए स्थानीय स्तर पर भी अपना नेटवर्क तैयार किया।
राजनीति से पहले सेना में दी सेवाएं
राजनीतिक जीवन शुरू करने से पहले मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया था। देश की सेवा के बाद उन्होंने वर्ष 1988 तक सेना में अपनी सेवाएं जारी रखीं।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उनका झुकाव सक्रिय राजनीति की ओर हुआ। इसके बाद वह प्रकाश सिंह बादल के साथ चुनाव अभियानों और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़ गए। वर्ष 1994 से शुरू हुआ यह राजनीतिक सहयोग आगे चलकर लगभग ढाई दशक तक जारी रहा।
उनकी सैन्य पृष्ठभूमि और लंबे राजनीतिक अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान दी। बादल परिवार के साथ लंबे जुड़ाव के कारण वह अकाली दल की संगठनात्मक राजनीति और मालवा के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से भी भली-भांति परिचित रहे।
भाजपा को पुराने अकाली संपर्कों से मिलने की उम्मीद
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों के भाजपा में शामिल होने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पार्टी पंजाब में अपना संगठन विस्तार करने के प्रयास में है। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव के लिए अब करीब छह महीने का समय बचा है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियां तेज कर रहे हैं।
ऐसे में भाजपा के लिए किसी ऐसे नेता का साथ मिलना, जिसका मालवा में दशकों पुराना राजनीतिक और सामाजिक संपर्क हो, संगठनात्मक दृष्टि से फायदेमंद हो सकता है। पार्टी को उम्मीद होगी कि ढिल्लों के अनुभव का इस्तेमाल लांबी के साथ-साथ आसपास के विधानसभा क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा।
उनके भाजपा में शामिल होने से पार्टी को केवल एक अनुभवी नेता नहीं, बल्कि बादल परिवार की राजनीति को करीब से समझने वाला ऐसा चेहरा मिला है, जिसकी क्षेत्र में लंबे समय से व्यक्तिगत पहचान रही है। यह भाजपा के लिए उन मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश का हिस्सा माना जा सकता है, जिनका राजनीतिक झुकाव लंबे समय तक अकाली दल की ओर रहा।
अकाली दल के लिए भी बढ़ी चुनौती
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का भाजपा में जाना शिरोमणि अकाली दल के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लांबी को अकाली दल और विशेष रूप से बादल परिवार का पारंपरिक मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है। यहां से जुड़े किसी वरिष्ठ और पुराने राजनीतिक चेहरे का भाजपा में जाना पार्टी के लिए संगठनात्मक स्तर पर चुनौती पैदा कर सकता है।
हालांकि किसी एक नेता के दल बदलने से चुनावी नतीजे तय नहीं होते, लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले ऐसे घटनाक्रम राजनीतिक माहौल और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर डाल सकते हैं। खासकर तब, जब संबंधित नेता किसी क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहा हो और उसकी स्थानीय स्तर पर पहचान हो।
भाजपा इस घटनाक्रम को मालवा में अपने विस्तार के अवसर के तौर पर देख रही है। वहीं, अकाली दल के सामने अपने पुराने प्रभाव वाले इलाकों में संगठन को मजबूत रखने और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखने की चुनौती होगी।
चुनाव से पहले मालवा पर सभी दलों की नजर
पंजाब की चुनावी राजनीति में मालवा क्षेत्र का महत्व किसी से छिपा नहीं है। विधानसभा की बड़ी संख्या में सीटें इसी क्षेत्र में आती हैं और राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए राजनीतिक दलों के लिए मालवा में मजबूत प्रदर्शन बेहद जरूरी माना जाता है।
इसी कारण चुनाव से पहले राजनीतिक दल यहां संगठन विस्तार, नेताओं की सक्रियता और स्थानीय प्रभाव वाले चेहरों को अपने साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान देते हैं। भाजपा का मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों को पार्टी में शामिल करना भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
लांबी में बादल परिवार की दशकों पुरानी राजनीतिक विरासत के बीच मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का भाजपा के साथ जुड़ना आने वाले चुनाव में नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत का संकेत दे रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा उनके अनुभव और क्षेत्रीय संपर्कों का किस तरह इस्तेमाल करती है और इसका असर लांबी तथा व्यापक मालवा की चुनावी राजनीति पर कितना पड़ता है।
फिलहाल इतना तय है कि चुनाव से पहले भाजपा ने बादल परिवार से जुड़े एक पुराने और अनुभवी राजनीतिक चेहरे को अपने पाले में लाकर मालवा की सियासत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की है। आने वाले महीनों में ऐसे और राजनीतिक बदलाव पंजाब के चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना सकते हैं।




