बिजली वितरण के निजीकरण पर दुष्यंत चौटाला का सरकार पर हमला, बोले- 4700 करोड़ का ठेका देने की हो जांच

बिजली वितरण के निजीकरण पर दुष्यंत चौटाला का सरकार पर हमला, बोले- 4700 करोड़ का ठेका देने की हो जांच

जेजेपी ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का किया समर्थन, गुरुग्राम और नूंह में 25 साल के लिए निजी कंपनी को वितरण सौंपने पर उठाए सवाल

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता दुष्यंत चौटाला ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जेजेपी बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ है और इस मुद्दे पर पूरी तरह कर्मचारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपकर प्रदेश के हितों के साथ समझौता कर रही है। पार्टी ऐसा नहीं होने देगी और कर्मचारियों के आंदोलन में हर स्तर पर सहयोग करेगी।

शुक्रवार को सिरसा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दुष्यंत चौटाला ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में आगामी 25 वर्षों के लिए बिजली वितरण का ठेका निजी कंपनी को सौंपने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कई दृष्टियों से गंभीर है, क्योंकि इन दोनों जिलों से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को होने वाली आय का बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। ऐसे में सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के पीछे सरकार की मंशा और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दुष्यंत चौटाला ने निजी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कंपनी की आर्थिक स्थिति को लेकर रिकॉर्ड में चिंताएं सामने आ रही हैं, तो उसे इतने बड़े स्तर पर बिजली वितरण की जिम्मेदारी सौंपना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और ठेका देने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की।

25 साल के ठेके पर उठाए सवाल

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का काम अगले 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को सौंपने का फैसला प्रदेश की बिजली व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उनका कहना था कि इन जिलों से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के राजस्व रिकॉर्ड में लगभग 50 प्रतिशत राजस्व आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि निगम के लिए सर्वाधिक लाभकारी माने जाने वाले क्षेत्रों में ही निजी कंपनी को वितरण का ठेका क्यों दिया गया।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इस फैसले का असर केवल बिजली निगम के कामकाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका संबंध आम उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और प्रदेश में रोजगार के अवसरों से भी है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने से उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेगा और बिजली वितरण व्यवस्था में किस तरह के सुधार होंगे।

उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि निजी कंपनी बिजली वितरण के लिए निगम के मौजूदा बुनियादी ढांचे का ही इस्तेमाल करेगी। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि निगम के संसाधनों का उपयोग करते हुए निजी कंपनी को ठेका देने से सरकार और उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा। उनके अनुसार, सरकार को इस निर्णय के आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

बिजली महंगी होने की आशंका जताई

दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया कि बिजली वितरण के निजीकरण से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। उन्होंने दिल्ली में बिजली वितरण के निजीकरण से जुड़े अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि वहां निजी कंपनियों के कामकाज को लेकर उपभोक्ताओं की सुविधाओं और बिजली दरों के संबंध में सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजीकरण के नाम पर लोगों को महंगी बिजली न मिले। बिजली जैसी आवश्यक सेवा का उद्देश्य आम जनता को भरोसेमंद और किफायती आपूर्ति उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि निजी कंपनी को वितरण की जिम्मेदारी सौंपने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, तो इससे सरकार के फैसले पर सवाल और गहरे होंगे।

जेजेपी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के फैसले का पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने भाजपा सरकार से पूछा कि जब सरकार बिजली क्षेत्र में सुधार करने और हरियाणा को बेहतर व्यवस्था वाला प्रदेश बनाने का दावा करती है, तो फिर वितरण का काम निजी कंपनी को सौंपने की जरूरत क्यों पड़ी।

रोजगार के अवसर कम होने की जताई चिंता

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बिजली वितरण के निजीकरण को प्रदेश के युवाओं के रोजगार से भी जोड़ते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निजी कंपनी को लंबे समय के लिए वितरण का ठेका सौंपने से बिजली निगम में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

दुष्यंत चौटाला के अनुसार, बिजली निगम में काम करने वाले योग्य और अनुभवी कर्मचारियों ने वर्षों से प्रदेश की बिजली व्यवस्था को संभाला है। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्यक्षमता को मजबूत करने के बजाय निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपना कर्मचारियों की दक्षता पर सवाल खड़े करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि निजीकरण के बाद मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी और भविष्य में बिजली क्षेत्र में भर्ती तथा रोजगार के अवसरों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। उनके मुताबिक, प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बनाए रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया कि इस फैसले से बिजली निगम में भविष्य में युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते सीमित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले कर्मचारियों के हितों, उपभोक्ताओं की जरूरतों और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।

हड़ताल से बिजली-पानी की आपूर्ति प्रभावित होने का दावा

दुष्यंत चौटाला ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पैदा हुई स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से लोगों को बिजली और पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, बिजली आपूर्ति बाधित होने से उद्योगों और कारखानों का कामकाज प्रभावित हुआ है, जबकि अस्पतालों में भी परेशानी बढ़ने की बात सामने आई है।

उन्होंने दावा किया कि बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर ऑपरेशन तक रुकने की स्थिति बनी है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह कर्मचारियों की मांगों और आम लोगों को हो रही परेशानियों के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली जैसी जरूरी सेवा में लंबे समय तक व्यवधान रहने से आम जनजीवन प्रभावित होता है। घरों में बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से सुनना और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। दुष्यंत चौटाला ने स्पष्ट किया कि जेजेपी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करती है और उनके साथ खड़ी रहेगी।

बिजली मंत्री की भूमिका पर भी सवाल

दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा के बिजली मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मंत्री वास्तव में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ हैं, तो उन्हें इस फैसले को चुनौती देने के लिए उपलब्ध कानूनी और नियामकीय विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से अब तक निजीकरण के फैसले के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। उनके अनुसार, बिजली नियामक व्यवस्था और संबंधित कानूनी मंचों के माध्यम से निर्णय की समीक्षा कराने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि निजीकरण का फैसला प्रदेश के हित में नहीं है, तो उसे केवल बयान देने के बजाय ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और क्या फैसले की समीक्षा के लिए कोई औपचारिक पहल की गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि निजीकरण को लेकर उसकी वास्तविक नीति क्या है। यदि सरकार बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना चाहती है, तो उसे कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करने और निर्णय की समीक्षा के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाने पर ध्यान देना चाहिए।

4700 करोड़ रुपये के ठेके की जांच की मांग

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने निजी कंपनी को लगभग 4700 करोड़ रुपये का ठेका दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि बिजली वितरण का इतना बड़ा ठेका देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और संबंधित कंपनी के अनुभव तथा वित्तीय स्थिति का किस तरह आकलन किया गया।

दुष्यंत चौटाला ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि ठेका देने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं, कंपनी की योग्यता और वित्तीय क्षमता का उचित मूल्यांकन किया गया या नहीं और निर्णय लेते समय प्रदेश के दीर्घकालिक हितों को किस हद तक ध्यान में रखा गया।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार, इतने बड़े आर्थिक महत्व वाले फैसले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।

जेजेपी नेता ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था से करोड़ों उपभोक्ताओं के हित जुड़े हैं। इसलिए सरकार को इस निर्णय से संबंधित सभी जरूरी तथ्यों को स्पष्ट करना चाहिए, ताकि लोगों को पता चल सके कि निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने के पीछे क्या आधार था और इससे प्रदेश को क्या लाभ मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों के आंदोलन में सहयोग का भरोसा

दुष्यंत चौटाला ने दोहराया कि जननायक जनता पार्टी बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनके आंदोलन में हर स्तर पर सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि बिजली निगम के कर्मचारियों ने अपनी मेहनत और अनुभव से प्रदेश की बिजली व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करे और कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाए। साथ ही बिजली आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता, अस्पतालों, उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को परेशानी न हो।

दुष्यंत चौटाला के बयान से स्पष्ट है कि हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण का मुद्दा अब केवल कर्मचारियों की हड़ताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की नीति, रोजगार, उपभोक्ताओं पर संभावित आर्थिक बोझ और सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा राजनीतिक विषय बन गया है।

अब इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया और बिजली कर्मचारियों के साथ बातचीत पर नजर रहेगी। साथ ही निजी कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार क्या स्पष्टीकरण देती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। जेजेपी ने जहां निजीकरण का विरोध जारी रखने का संकेत दिया है, वहीं बिजली कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि विवाद का समाधान किस तरह निकलता है और बिजली आपूर्ति कब तक सामान्य हो पाती है।