भाखड़ा बांध सुरक्षित, सिल्ट हटाने की जरूरत; मंत्री गोयल ने जल प्रबंधन पर रखी सरकार की तस्वीर

भाखड़ा बांध सुरक्षित, सिल्ट हटाने की जरूरत; मंत्री गोयल ने जल प्रबंधन पर रखी सरकार की तस्वीर

चंडीगढ़: पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को रोकने और किसानों की सिंचाई जरूरतों को नहरी पानी के जरिए पूरा करने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने अहम उपलब्धि बताया है। सोमवार को पंजाब भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में गोयल ने कहा कि नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए किए गए काम का असर अब दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है और किसानों की भूमिगत जल पर निर्भरता भी कम हुई है।

गोयल ने कहा कि कुछ वर्ष पहले पंजाब के भविष्य को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई जा रही थीं। विशेषज्ञों की ओर से यह तक कहा गया था कि यदि भूजल का लगातार इसी तरह दोहन होता रहा तो वर्ष 2037 तक राज्य के कई हिस्से रेगिस्तान जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए नहरी व्यवस्था को मजबूत करने और अधिक से अधिक कृषि भूमि तक नहरी पानी पहुंचाने पर जोर दिया।

कैबिनेट मंत्री के मुताबिक वर्ष 2022 तक पंजाब में उपलब्ध नहरी पानी का केवल करीब 26 प्रतिशत ही इस्तेमाल हो रहा था। सरकार द्वारा नहरों और माइनरों की व्यवस्था सुधारने तथा खेतों तक पानी पहुंचाने पर ध्यान देने के बाद अब इसका उपयोग बढ़कर करीब 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे राज्य में जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया।

गोयल ने कहा कि पंजाब की कृषि व्यवस्था लंबे समय से ट्यूबवेल और भूजल पर काफी हद तक निर्भर रही है। इस कारण लगातार पानी निकालने से भूजल स्तर पर दबाव बढ़ता गया। सरकार की कोशिश है कि जहां नहरी पानी उपलब्ध कराया जा सकता है, वहां किसानों को भूमिगत जल निकालने की जरूरत कम से कम पड़े।

उन्होंने बताया कि नहरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया गया है। सरकार के अनुसार इस दिशा में करीब 75 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस राशि से नहरों की क्षमता सुधारने, पुराने ढांचे को दुरुस्त करने और खेतों तक पानी पहुंचाने वाले खालों के निर्माण सहित कई कार्य किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि राज्य में 1,117 नहरों और माइनरों के माध्यम से किसानों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। उनके अनुसार इस नेटवर्क के जरिए करीब 39,000 क्यूबिक पानी किसानों के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है। नहरी पानी की पहुंच बढ़ने से सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भरता में कमी आई है।

गोयल ने दावा किया कि इसका असर केवल भूजल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बिजली की खपत पर भी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि नहरी पानी के इस्तेमाल में वृद्धि के साथ प्रदेश में बिजली की खपत में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसका एक कारण यह बताया गया कि जहां किसान पहले सिंचाई के लिए मोटर और ट्यूबवेल का इस्तेमाल करते थे, वहां नहरी पानी उपलब्ध होने से बिजली आधारित सिंचाई की जरूरत कम हुई।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए पानी का मुद्दा केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध कृषि, किसान की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था से है। यदि भूजल इसी गति से नीचे जाता रहा तो भविष्य में सिंचाई व्यवस्था और कृषि उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए नहरी पानी का अधिकतम उपयोग करना दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए जरूरी है।

प्रेसवार्ता के दौरान भाखड़ा बांध की सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर भी गोयल ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को भाखड़ा बांध की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार तकनीकी आकलन के आधार पर बांध पूरी तरह सुरक्षित है।

गोयल ने कहा कि हाल ही में विदेश से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने भी भाखड़ा बांध का निरीक्षण किया और इसे दुनिया के मजबूत बांधों में शामिल बताया। उन्होंने बांध की संरचना से जुड़े तकनीकी पहलू का उल्लेख करते हुए कहा कि पानी के दबाव के कारण बांध में करीब 1.03 इंच तक झुकाव आ सकता है और इसके बाद वह वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाता है।

मंत्री के अनुसार वर्ष 1995 से 2025 के बीच इस तरह की स्थिति करीब 15 बार सामने आ चुकी है। उन्होंने इसे बांध की सामान्य तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इससे बांध की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है।

गोयल ने भाखड़ा जलाशय में जमा सिल्ट को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि बांध में करीब 26 प्रतिशत सिल्ट जमा हो चुकी है। उनके मुताबिक यदि इस सिल्ट को हटाया जाता है तो जलाशय की भंडारण क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि सिल्ट हटाने के मामले को लेकर पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और केंद्र सरकार को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। राज्य का मानना है कि जलाशय की क्षमता को बनाए रखने और भविष्य में अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए सिल्ट प्रबंधन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

मंत्री ने कहा कि पंजाब में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन समय की आवश्यकता है। एक तरफ भूजल का स्तर लगातार चुनौती बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध नहरी जल का पूरा उपयोग करना भी जरूरी है। उनका कहना था कि यदि नहरों का पानी खेतों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए तो किसानों को भूजल निकालने के लिए ट्यूबवेल पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नहरी नेटवर्क को केवल कागजों पर मजबूत दिखाना नहीं, बल्कि उसके पानी को वास्तविक रूप से खेतों तक पहुंचाना है। इसके लिए जहां पुराने खालों की मरम्मत की जा रही है, वहीं जरूरत के अनुसार नए खालों का निर्माण भी किया जा रहा है।

गोयल के अनुसार नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से उन क्षेत्रों में विशेष लाभ हुआ है जहां किसान लंबे समय से भूजल पर निर्भर थे। इससे सिंचाई के विकल्प बढ़े हैं और पानी के स्रोतों पर दबाव कम करने की संभावना बनी है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के सामने जल संकट एक गंभीर और दीर्घकालिक चुनौती है। इसे केवल सरकार के स्तर पर हल नहीं किया जा सकता। किसानों को भी पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की दिशा में आगे आना होगा। फसल चयन, सिंचाई की तकनीक और उपलब्ध जल स्रोतों का संतुलित उपयोग आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पंजाब को उस स्थिति से बचाना है, जिसमें भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध न रहे। उनके अनुसार नहरी पानी के उपयोग में वृद्धि इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि यदि नहरी पानी का इस्तेमाल बढ़ता है और भूजल दोहन लगातार घटता है तो पंजाब के जल संसाधनों पर दबाव कम किया जा सकता है। सरकार की ओर से नहरों के पुनर्वास, नए खालों के निर्माण और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जो निवेश किया जा रहा है, उसका उद्देश्य इसी दिशा में स्थायी परिणाम हासिल करना है।

गोयल ने कहा कि पंजाब के किसानों और आम लोगों को पानी की उपलब्धता को लेकर भविष्य के लिए आश्वस्त करने के लिए सरकार को जल प्रबंधन पर लगातार काम करना होगा। नहरी पानी का बढ़ता उपयोग और भूजल स्तर में दर्ज किया जा रहा सुधार इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।

उन्होंने भाखड़ा बांध को लेकर भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों के आकलन के आधार पर बांध सुरक्षित है। साथ ही उन्होंने जलाशय में बढ़ती सिल्ट को हटाने की जरूरत दोहराई। उनके मुताबिक यदि सिल्ट प्रबंधन पर प्रभावी कार्रवाई होती है तो जल भंडारण क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रेसवार्ता में गोयल ने पंजाब के जल संकट से निपटने के लिए नहरी पानी को प्रमुख विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक सरकार द्वारा किए जा रहे निवेश और बुनियादी ढांचे में सुधार से नहरी पानी की पहुंच लगातार बढ़ी है। आने वाले समय में इसका लक्ष्य भूजल पर निर्भरता को और कम करना तथा राज्य के जल संसाधनों को सुरक्षित करना है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए यह केवल वर्तमान की जरूरत पूरी करने का सवाल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की जिम्मेदारी भी है। सरकार नहरी नेटवर्क को मजबूत कर इस दिशा में आगे बढ़ रही है और किसानों तक अधिक से अधिक पानी पहुंचाने के प्रयास जारी रखे जाएंगे।