भारत में एलपीजी यानी Liquefied Petroleum Gas की कीमतों में बदलाव का असर सीधे आम लोगों की जेब से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, छोटे कारोबार और बड़े उद्योगों तक दिखाई देता है। मई की शुरुआत में 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये और 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर में 261 रुपये की बढ़ोतरी की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर एलपीजी की कीमतों और इसकी सप्लाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
एलपीजी आज भारत के ऊर्जा ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। शहरों से लेकर गांवों तक करोड़ों परिवार खाना पकाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जरूरी ईंधन है। ऐसे में कीमतों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे घरेलू बजट और कारोबारी लागत को प्रभावित कर सकता है।
इसी बीच पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने भारत के सामने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत अब अपनी एलपीजी जरूरत का पहले की तुलना में बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की कुल एलपीजी जरूरत में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि कुछ समय पहले यह लगभग 40 प्रतिशत बताई जाती थी।
ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत में सबसे ज्यादा एलपीजी आखिर कहां बनती है और देश के किन शहरों का इस उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान है।
गुजरात का जामनगर क्यों है भारत का बड़ा LPG केंद्र
भारत में एलपीजी उत्पादन की बात होती है तो गुजरात का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आता है। राज्य का जामनगर शहर देश के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में शामिल है। यहां मौजूद विशाल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स भारत के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जामनगर में बड़े स्तर पर कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है। रिफाइनिंग की इस प्रक्रिया के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों के साथ एलपीजी भी प्राप्त होती है। इसी वजह से जामनगर को देश के प्रमुख एलपीजी उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है।
जामनगर का महत्व केवल एलपीजी तक सीमित नहीं है। यहां का रिफाइनरी क्षेत्र पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बंदरगाह के नजदीक होने के कारण इस क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी फायदा मिलता है।
ऊर्जा उत्पादन और वितरण की पूरी श्रृंखला में जामनगर की भूमिका इसे भारत के प्रमुख एनर्जी हब में शामिल करती है। देश की ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में भी इस क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ा है।
क्या केवल गुजरात में बनती है LPG?
ऐसा नहीं है कि भारत में एलपीजी का उत्पादन केवल गुजरात में होता है। देश के कई हिस्सों में रिफाइनरियों और गैस प्रोसेसिंग संयंत्रों के जरिए एलपीजी तैयार की जाती है।
मथुरा, पानीपत, हल्दिया और वडोदरा जैसे शहर भी भारत के एलपीजी उत्पादन नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में मौजूद रिफाइनरियों और संबंधित औद्योगिक संयंत्रों से घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए एलपीजी उपलब्ध कराई जाती है।
हालांकि, उत्पादन क्षमता और बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के कारण गुजरात का योगदान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से जामनगर भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख स्थान रखता है।
इस तरह देश में एलपीजी का उत्पादन किसी एक शहर या राज्य पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। अलग-अलग राज्यों में मौजूद रिफाइनरियां और गैस प्रोसेसिंग इकाइयां मिलकर देश की कुल जरूरत को पूरा करने में योगदान देती हैं।
LPG आखिर बनती कैसे है?
एलपीजी मुख्य रूप से दो प्रमुख स्रोतों से प्राप्त होती है। पहला स्रोत कच्चा तेल है और दूसरा प्राकृतिक गैस।
कच्चे तेल को रिफाइनरी में भेजे जाने के बाद उसे अलग-अलग तापमान पर प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के साथ प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसें भी प्राप्त होती हैं। इन्हीं गैसों को उचित प्रक्रिया से तैयार करके एलपीजी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
दूसरे तरीके में प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग की जाती है। प्राकृतिक गैस से अलग-अलग हाइड्रोकार्बन घटकों को अलग किया जाता है, जिनमें प्रोपेन और ब्यूटेन भी शामिल होते हैं। इन घटकों को आवश्यक मानकों के अनुसार प्रोसेस करने के बाद एलपीजी तैयार की जाती है।
इसके बाद एलपीजी को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है। वहां से इसे बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है, जहां घरेलू और कॉमर्शियल जरूरतों के अनुसार अलग-अलग आकार के सिलेंडरों में भरा जाता है।
भारत LPG का आयात भी करता है
भारत अपनी पूरी एलपीजी जरूरत घरेलू उत्पादन से पूरा नहीं करता। देश को बड़ी मात्रा में एलपीजी का आयात भी करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और वैश्विक सप्लाई की स्थिति का असर भारत की एलपीजी उपलब्धता और लागत पर पड़ सकता है।
कतर भारत के प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलपीजी की आपूर्ति होती है। समुद्री मार्गों के जरिए एलपीजी भारत के विभिन्न बंदरगाहों तक पहुंचती है और फिर इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है।
यही वजह है कि पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव बढ़ने पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है। अगर किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इससे ऊर्जा आयात की लागत और सप्लाई व्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया का तनाव भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर समुद्री परिवहन प्रभावित होने की आशंका रहती है। जहाजों को लंबे रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं या सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है और सप्लाई चेन पर दबाव पड़ सकता है।
एलपीजी के मामले में भी वैश्विक बाजार की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। इसलिए भारत घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी स्टोरेज क्षमता और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है।
घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने पर जोर
वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अगर देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा घरेलू स्तर पर पूरा करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी अचानक संकट का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल एलपीजी जरूरत में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी अब करीब 60 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है। पहले यह हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत बताया जाता था।
इस बदलाव का अर्थ यह है कि देश ने पिछले कुछ समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया है। हालांकि, बढ़ती आबादी, शहरीकरण और एलपीजी के बढ़ते उपयोग को देखते हुए भविष्य में मांग भी बढ़ सकती है।
LPG की कीमत बढ़ने का असर कहां पड़ता है?
एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अलग-अलग वर्गों पर अलग तरीके से पड़ता है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर महंगा होने का मतलब सीधे रसोई के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ हो सकता है।
वहीं, कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने का असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और खाद्य कारोबार पर पड़ सकता है। ऐसे व्यवसायों में ईंधन लागत बढ़ने पर उनकी कुल परिचालन लागत भी बढ़ती है।
कई बार कारोबारियों को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना पड़ता है। इसका प्रभाव खाने-पीने की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
इसलिए एलपीजी की कीमत केवल सिलेंडर खरीदने वाले उपभोक्ता के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि इसका प्रभाव व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
LPG का इस्तेमाल केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं
भारत में एलपीजी का सबसे बड़ा उपयोग घरेलू खाना पकाने के लिए होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल कई अन्य क्षेत्रों में भी किया जाता है।
होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे बड़ी मात्रा में कॉमर्शियल एलपीजी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
कुछ वाहनों में भी ऑटोगैस के रूप में एलपीजी का उपयोग किया जाता है। हालांकि, भारत में ऑटोमोटिव क्षेत्र में सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की चर्चा अधिक होती है, फिर भी एलपीजी के कुछ विशेष उपयोग मौजूद हैं।
एलपीजी को कई पारंपरिक ठोस ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसका उपयोग धुएं और स्थानीय वायु प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर जब इसकी तुलना लकड़ी या कोयले जैसे ठोस ईंधनों से की जाए।
LPG की खपत में हाल के महीनों में बदलाव
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी में भारत में एलपीजी की खपत करीब 3.012 मिलियन टन रही। फरवरी में यह घटकर लगभग 2.822 मिलियन टन और मार्च में करीब 2.379 मिलियन टन बताई गई।
इन आंकड़ों के आधार पर तीन महीनों में खपत में करीब 26 प्रतिशत की कमी दिखाई देती है। हालांकि, मासिक खपत में बदलाव कई कारणों से हो सकता है। मौसम, औद्योगिक मांग, घरेलू उपयोग, स्टॉक की स्थिति और आपूर्ति व्यवस्था जैसे कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
इसलिए केवल एक अवधि के आंकड़ों के आधार पर दीर्घकालिक खपत का रुझान तय करना उचित नहीं होगा। इसके लिए लंबे समय के आंकड़ों और अलग-अलग क्षेत्रों की मांग को भी देखना जरूरी है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का दावा
एलपीजी सप्लाई को लेकर सरकार की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार देश में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, सरकार और संबंधित तेल कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नियमित सप्लाई बनाए रखना है।
हाल ही में एलपीजी बुकिंग में 98 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात भी सामने आई। इससे यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता सप्लाई और कीमतों को लेकर सतर्क हैं और समय पर सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं।
DAC सिस्टम से डिलीवरी में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
एलपीजी डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी DAC जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस तरह की प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडर सही उपभोक्ता तक पहुंचे और डिलीवरी प्रक्रिया में अनियमितताओं की संभावना कम हो। डिजिटल व्यवस्था के बढ़ते उपयोग से कंपनियों को सप्लाई चेन की निगरानी करने में भी मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं के लिए भी ऐसी व्यवस्था महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई
एलपीजी की कीमतों और सप्लाई को लेकर किसी भी संकट की स्थिति में कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका बढ़ सकती है। इसे रोकने के लिए देशभर में जांच और छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 28 अप्रैल को देशभर में 2200 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान 325 डिस्ट्रीब्यूटर्स पर जुर्माना लगाए जाने और 72 को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा कई मामलों में नोटिस भी जारी किए गए।
ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एलपीजी की सप्लाई अधिकृत चैनल के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचे और किसी भी तरह की अवैध जमाखोरी या कालाबाजारी को रोका जा सके।
LPG के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है?
भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा हमेशा महत्वपूर्ण विषय रही है। देश में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ी है और करोड़ों परिवारों के लिए यह खाना पकाने का प्रमुख ईंधन बन चुका है।
ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बढ़ती मांग को देखते हुए भारत को घरेलू उत्पादन के साथ-साथ आयात, स्टोरेज और वितरण व्यवस्था को भी मजबूत बनाए रखना होगा।
गुजरात का जामनगर और देश के अन्य प्रमुख रिफाइनरी केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घरेलू उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी, बेहतर स्टोरेज सुविधाएं, सुरक्षित समुद्री आपूर्ति और पारदर्शी वितरण व्यवस्था मिलकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं।
फिलहाल एलपीजी की कीमतों में बदलाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति, पश्चिम एशिया में तनाव और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों के बीच भारत के ऊर्जा क्षेत्र पर लगातार नजर बनी हुई है। ऐसे में जामनगर जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।




