मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के बाद होगा कैबिनेट विस्तार, राहुल गांधी ने मांगी 30 सितंबर तक रिपोर्ट

मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के बाद होगा कैबिनेट विस्तार, राहुल गांधी ने मांगी 30 सितंबर तक रिपोर्ट

शिमला/चंडीगढ़: हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर फिलहाल विराम लग गया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दिल्ली यात्रा के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रस्तावित महत्वपूर्ण बैठक पूरी तरह नहीं हो सकी। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुख्यमंत्री की बैठक नहीं होने के कारण अब मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला आगे खिसकता नजर आ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री से प्रदेश सरकार में शामिल मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार करने को कहा है। राहुल गांधी की ओर से कथित तौर पर 30 सितंबर तक मंत्रियों की परफार्मेंस रिपोर्ट मांगी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि जब तक यह मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए मंत्री की नियुक्ति अथवा मौजूदा मंत्रियों में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू बुधवार को दिल्ली से लौट आए हैं। वह फिलहाल चंडीगढ़ में रुके हुए हैं और उनके वीरवार को शिमला पहुंचने का कार्यक्रम है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी दिल्ली से वापस लौट आए हैं। वहीं, सरकार के कई मंत्री अभी दिल्ली में हैं और उनके भी वीरवार को हिमाचल लौटने की संभावना है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 11 सितंबर को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक भी प्रस्तावित है। हालांकि, इस बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई बड़ा निर्णय होता है या नहीं, इस पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है।

मुख्यमंत्री सुक्खू और पार्टी हाईकमान के बीच दिल्ली में मंत्रिमंडल विस्तार सहित सरकार और संगठन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होनी थी। लेकिन राहुल गांधी के दिल्ली से बाहर होने के कारण उनके साथ प्रस्तावित बैठक नहीं हो पाई। इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम स्तर पर होने वाली राजनीतिक चर्चा भी आगे नहीं बढ़ सकी।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व हिमाचल सरकार के कामकाज का व्यापक आकलन करना चाहता है। इसके तहत मंत्रियों की जिम्मेदारियों, विभागीय प्रदर्शन और सरकार की साढ़े तीन वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री सहित सरकार के वरिष्ठ नेताओं को अपने-अपने विभागों की स्थिति, उपलब्धियों और चुनौतियों का ब्यौरा हाईकमान के सामने रखने को कहा गया है।

मंत्रिमंडल विस्तार के संदर्भ में यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नए मंत्री को शामिल करने के साथ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक कांग्रेस हाईकमान या मुख्यमंत्री की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

हिमाचल सरकार के कई मंत्री पिछले दो दिनों से दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकें कर रहे थे। इन बैठकों में प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्रियों ने हाईकमान को अपने-अपने विभागों की परफार्मेंस से अवगत कराया। सरकार की योजनाओं, विभागीय कामकाज और प्रदेश में सरकार के प्रदर्शन से जुड़े बिंदुओं को पार्टी नेतृत्व के सामने रखा गया।

मंत्रियों ने अपने क्षेत्रों और विभागों से संबंधित राजनीतिक फीडबैक भी हाईकमान के साथ साझा किया। कांग्रेस नेतृत्व सरकार की कार्यप्रणाली और संगठन की स्थिति दोनों का आकलन कर रहा है। आगामी समय में सरकार को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जाए और संगठन को चुनावी दृष्टि से कैसे मजबूत किया जाए, इन पहलुओं पर भी बातचीत हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से 30 सितंबर तक कैबिनेट मंत्रियों की परफार्मेंस रिपोर्ट देने को कहा है। इस रिपोर्ट में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत सभी कैबिनेट मंत्रियों के विभागों और उनकी साढ़े तीन साल की परफार्मेंस का ब्योरा शामिल किए जाने की बात कही जा रही है।

कांग्रेस नेतृत्व यह जानना चाहता है कि किस मंत्री के पास कौन सा विभाग है, संबंधित विभाग में अब तक क्या काम हुआ है और सरकार के गठन के बाद से उस विभाग का प्रदर्शन कैसा रहा है। इसके आधार पर मंत्रियों की कार्यक्षमता का आकलन किया जाएगा।

इसी वजह से अब यह माना जा रहा है कि 30 सितंबर से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कम हो गई है। रिपोर्ट तैयार होने और हाईकमान द्वारा उसका मूल्यांकन किए जाने के बाद ही नए मंत्री की नियुक्ति अथवा संभावित फेरबदल पर अंतिम निर्णय हो सकता है।

प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ एक नए मंत्री की नियुक्ति की चर्चा काफी समय से चल रही है। अब सूत्रों के अनुसार, नए मंत्री की ताजपोशी के साथ कुछ अन्य संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर भी नियुक्तियां की जा सकती हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष के पद के साथ मुख्य सचेतक की नियुक्ति पर भी विचार किए जाने की संभावना है।

मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा और सुविधाएं मिलने के कारण यह पद भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, कांगड़ा और मंडी क्षेत्र के कुछ विधायकों को इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से किसी पद पर मौका दिए जाने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ पार्टी के भीतर विभिन्न राजनीतिक समीकरणों को भी संतुलित किया जा सकता है।

हालांकि, अभी तक किसी विधायक का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री और कांग्रेस हाईकमान के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।

हिमाचल की राजनीति में क्षेत्रीय संतुलन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार या महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी चर्चा में रहता है। मौजूदा चर्चाओं में कांगड़ा और मंडी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। दोनों क्षेत्रों का प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव है। ऐसे में इन इलाकों के विधायकों को मंत्री, मुख्य सचेतक या विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे पद देकर राजनीतिक संतुलन बनाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, हाईकमान की ओर से मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा के बाद ही इन समीकरणों को अंतिम रूप मिलने की संभावना है। यदि किसी मौजूदा मंत्री के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेतृत्व संतुष्ट नहीं होता है तो विभागों में बदलाव अथवा जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

सुक्खू सरकार का कार्यकाल साढ़े तीन साल से अधिक पूरा कर चुका है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर अब सरकार के प्रदर्शन का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो गया है। मंत्रियों के विभागीय कामकाज के साथ-साथ सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता तक उनके प्रभाव को भी देखा जा सकता है।

रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया में मंत्रियों की उपलब्धियों के साथ उनकी राजनीतिक सक्रियता, विभागीय फैसलों की गति और संगठन के साथ तालमेल जैसे पहलुओं को भी महत्व मिल सकता है। हाईकमान के स्तर पर यह भी देखा जा सकता है कि सरकार की योजनाओं को लेकर जनता में किस तरह की प्रतिक्रिया है और प्रदेश कांग्रेस संगठन सरकार के साथ किस स्तर तक समन्वय बनाकर काम कर रहा है।

दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुक्खू का चंडीगढ़ में रुकना भी राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका वीरवार को शिमला लौटने का कार्यक्रम है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी वापस लौट चुके हैं। दूसरी ओर, हर्षवर्धन चौहान, चंद्र कुमार, कर्नल धनीराम शांडिल, विक्रमादित्य सिंह और रोहित ठाकुर अभी दिल्ली में मौजूद हैं। इन मंत्रियों के वीरवार को हिमाचल लौटने की संभावना है।

दो दिनों तक दिल्ली में चली बैठकों के बाद मंत्रियों ने हाईकमान के समक्ष अपने विभागों की स्थिति और सरकार के कामकाज का पक्ष रखा है। अब पार्टी नेतृत्व इस फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करेगा।

हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक 11 सितंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में इस बैठक पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि, यदि हाईकमान ने 30 सितंबर तक मंत्रियों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है तो तत्काल मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना कमजोर मानी जा रही है। बैठक में सरकार से जुड़े नियमित प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला बाद के लिए टाला जा सकता है।

फिलहाल हिमाचल कांग्रेस में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में केवल एक नए चेहरे को शामिल किया जाएगा या इसके साथ संगठनात्मक और संवैधानिक पदों पर भी बदलाव किए जाएंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू की दिल्ली यात्रा के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात नहीं हो पाने के कारण अंतिम निर्णय टल गया है।

अब 30 सितंबर तक मंत्रियों की परफार्मेंस रिपोर्ट तैयार होने के बाद कांग्रेस हाईकमान इस पर दोबारा विचार कर सकता है। यदि रिपोर्ट के आधार पर मंत्रियों के कामकाज में बदलाव की जरूरत महसूस की जाती है तो मंत्रिमंडल विस्तार के साथ विभागों का पुनर्वितरण भी संभव है। वहीं, मुख्य सचेतक और विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्तियां होने की स्थिति में कांगड़ा और मंडी के राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल मुख्यमंत्री शिमला लौटने की तैयारी में हैं और मंत्री भी दिल्ली से वापस आने वाले हैं। ऐसे में प्रदेश की राजनीति में अब नजर 30 सितंबर तक तैयार होने वाली रिपोर्ट और उसके बाद कांग्रेस हाईकमान के निर्णय पर टिकी है। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार और संगठन में संभावित बदलाव की तस्वीर भी इसी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।