खंडेबाद गांव में 217 कनाल 14 मरले सरकारी भूमि पर मंडी विकसित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी; मौजूदा मंडी पर घटेगा दबाव, शहर को ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद
लहरागागा। पंजाब सरकार ने लहरागागा क्षेत्र में कृषि उत्पादों की खरीद और मंडीकरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। शहर के निकट गांव खंडेबाद में 217 कनाल 14 मरले यानी 27 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पर नई अनाज मंडी स्थापित की जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में 31 अक्टूबर को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। नई मंडी बनने से क्षेत्र के किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही फसल खरीद के दौरान लहरागागा शहर के भीतर बढ़ने वाले यातायात दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।
पंजाब के जल संसाधन मंत्री और लहरागागा से विधायक बरिंदर कुमार गोयल ने पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से नई अनाज मंडी की जरूरत महसूस की जा रही थी। मौजूदा मंडी में धान और गेहूं सहित अन्य कृषि उत्पादों की बढ़ती आवक के कारण जगह की कमी हो रही थी। इस समस्या को देखते हुए नई मंडी स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
गोयल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त जगह और बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो। मंडी में खरीद और व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलें, इसके लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं का विकास महत्वपूर्ण है। खंडेबाद में नई मंडी स्थापित होने से मौजूदा व्यवस्था पर दबाव कम होगा और पूरे क्षेत्र की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
करीब 45 साल पुरानी मंडी पर बढ़ता जा रहा था दबाव
मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि लहरागागा की मौजूदा अनाज मंडी लगभग 45 वर्ष पहले करीब 12 एकड़ भूमि पर स्थापित की गई थी। उस समय क्षेत्र में कृषि उत्पादन और फसल खरीद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मंडी बनाई गई थी। बाद में इसी परिसर में कपास की खरीद और कारोबार के लिए कॉटन यार्ड भी विकसित किया गया।
पिछले कई वर्षों में खेती के क्षेत्र में बदलाव और फसल उत्पादन में वृद्धि के कारण मंडी में कृषि उत्पादों की आवक लगातार बढ़ी है। विशेष रूप से धान और गेहूं की खरीद के दौरान मंडी में किसानों और व्यापारियों की संख्या बढ़ने से उपलब्ध स्थान कम पड़ने लगा। पुरानी मंडी की सीमित क्षमता के कारण फसल उतारने, रखने, खरीद प्रक्रिया और अन्य व्यापारिक गतिविधियों के संचालन में कठिनाइयां आने लगी थीं।
गोयल के अनुसार, मौजूदा मंडी जिस समय बनाई गई थी, उस समय की जरूरतों के हिसाब से इसका आकार पर्याप्त था, लेकिन अब कृषि उत्पादन और खरीद की मात्रा में काफी बदलाव आ चुका है। ऐसे में पुरानी मंडी से पूरे क्षेत्र की मौजूदा जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। नई मंडी की स्थापना से भविष्य में बढ़ने वाली आवक को संभालने के लिए भी अतिरिक्त स्थान उपलब्ध होगा।
शहर के बीच मंडी होने से खरीद सीजन में जाम की समस्या
मंत्री ने कहा कि मौजूदा अनाज मंडी शहर के बीचोंबीच स्थित है। फसल खरीद के सीजन में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, अन्य कृषि वाहन, व्यापारी और किसान मंडी पहुंचते हैं। इसके कारण शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। कई बार वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है और आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मंडी में जगह कम होने के कारण फसल खरीद और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी अतिरिक्त दबाव बनता है। किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं, जबकि आढ़ती और व्यापारी खरीद प्रक्रिया में शामिल होते हैं। इस दौरान वाहनों की आवाजाही और फसल के प्रबंधन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना जरूरी है। पुरानी मंडी की सीमित जगह और शहर के बीच इसकी स्थिति के कारण दोनों तरह की समस्याएं सामने आ रही थीं।
गोयल ने कहा कि किसानों, व्यापारियों और आढ़तियों की ओर से लंबे समय से नई मंडी स्थापित करने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि नई मंडी बनने से फसल खरीद की व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा और शहर के अंदर अनावश्यक यातायात दबाव भी कम होगा।
खंडेबाद में सरकारी जमीन पर विकसित होगी मंडी
राज्य सरकार ने नई अनाज मंडी के लिए गांव खंडेबाद में 217 कनाल 14 मरले सरकारी भूमि को निर्धारित किया है। यह क्षेत्रफल 27 एकड़ से अधिक है। सरकार ने इसी भूमि पर मंडी विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही मंडी तक पहुंचने के लिए गांव लहल खुर्द की भूमि से रास्ता तैयार किया जाएगा।
नई मंडी के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होने से परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। अब संबंधित विभागों की ओर से मंडी के विकास और जरूरी सुविधाओं से जुड़े अगले चरणों पर काम किया जा सकेगा। मंडी तक पहुंचने वाले रास्ते की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि किसानों और व्यापारियों के वाहनों को आने-जाने में परेशानी न हो।
मंत्री ने कहा कि मंडी की स्थापना केवल एक नई खरीद केंद्र सुविधा तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र की कृषि और व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर आधार देना है। पर्याप्त जगह मिलने से फसल की आवक, खरीद और अन्य मंडी संबंधी कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
किसानों और आढ़तियों को मिलेगी सुविधा
नई अनाज मंडी स्थापित होने से लहरागागा और आसपास के गांवों के किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। फसल खरीद के समय मंडी में जगह की कमी के कारण होने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं। किसानों को अपनी उपज लेकर पहुंचने, उसे उतारने और खरीद प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा।
आढ़तियों और व्यापारियों के लिए भी नई मंडी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। फसल की आवक बढ़ने के साथ खरीद और व्यापारिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान होना जरूरी है। नई मंडी में उपलब्ध होने वाली अतिरिक्त जगह से इन गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा मंडी से जुड़ी अन्य सुविधाओं के विकास की भी संभावनाएं बनेंगी।
कृषि क्षेत्र में मंडियों की भूमिका केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं होती। ये किसानों, आढ़तियों, व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होती हैं। किसी क्षेत्र में मंडी की क्षमता बढ़ने से स्थानीय व्यापार को भी सहारा मिलता है। नई मंडी से लहरागागा क्षेत्र में कृषि कारोबार को बेहतर ढंग से संचालित करने का अवसर मिलेगा।
शहर की यातायात व्यवस्था को भी मिलेगी राहत
नई मंडी को शहर के बाहर खंडेबाद में विकसित करने का एक प्रमुख उद्देश्य लहरागागा के भीतर यातायात दबाव को कम करना भी है। मौजूदा मंडी के कारण खरीद सीजन में शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में कृषि वाहन पहुंचते हैं। नई मंडी शुरू होने के बाद फसल खरीद से जुड़े वाहनों की आवाजाही का बड़ा हिस्सा नए स्थान की ओर स्थानांतरित हो सकेगा।
इससे शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है। आम नागरिकों, दुकानदारों और अन्य वाहन चालकों को भी खरीद सीजन के दौरान होने वाली असुविधा से राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर नई मंडी के पूरी तरह विकसित होने, वहां खरीद गतिविधियां शुरू होने और पहुंच मार्ग की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
मंत्री ने कहा कि नई मंडी किसानों और व्यापारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कृषि उत्पादों की खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाने के साथ-साथ शहर की यातायात समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री और कैबिनेट का जताया आभार
बरिंदर कुमार गोयल ने नई मंडी के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पंजाब कैबिनेट का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने क्षेत्र की जरूरत को समझते हुए यह फैसला लिया है। नई मंडी की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी और अब इसके लिए भूमि निर्धारित करने तथा प्रस्ताव को मंजूरी देने का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और मंडीकरण व्यवस्था को मजबूत करना है। नई मंडी बनने से लहरागागा की मौजूदा मंडी पर निर्भरता कम होगी और क्षेत्र में कृषि उत्पादों की खरीद के लिए अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। भूमि पर मंडी का विकास, जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था और गांव लहल खुर्द की ओर से पहुंच मार्ग तैयार करने जैसे कार्य इसके क्रियान्वयन के प्रमुख हिस्से होंगे।
कुल मिलाकर, खंडेबाद में 27 एकड़ से अधिक भूमि पर नई अनाज मंडी स्थापित करने का फैसला लहरागागा के कृषि और व्यापारिक ढांचे के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे किसानों को फसल बेचने के लिए अधिक जगह मिलने, आढ़तियों और व्यापारियों की गतिविधियों को व्यवस्थित करने तथा शहर में खरीद सीजन के दौरान यातायात दबाव घटाने की उम्मीद है। अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें इस परियोजना के अगले चरण और मंडी के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने पर रहेंगी।




